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अवैध रूप से उर्वरक भंडारण करने पर दर्ज की गई एफआईआर

सागर। वंदे भारत लाईव टीवी न्यूज रिपोर्टर सुशील द्विवेदी ,8225072664-कलेक्टर संदीप जी आर के निर्देश पर रहली अनुभाग अन्तर्गत ग्राम खमरिया में खाद का अवैध भंडारण पाए जाने से 350 बोरी खाद और एक वाहन जप्त किया गया। उक्त कार्य में संलग्न पंकज दुबे निवासी खमरिया, सोमवती तिवारी निवासी खमरिया और मेसर्स पी के ट्रेडर्स जिला शामली उप्र के विरुद्ध पुलिस थाना रहली में एफआईआर दर्ज कराई गई है। राजस्व, कृषि ओर पुलिस विभाग के संयुक्त दल के द्वारा उक्त कार्यवाही की गई। प्रथम सूचना रिपोर्ट के अनुसार सोमवती तिवारी एवं पंकज दुबे खमरिया रहली एवं मेसर्स पी के ट्रेडर्स मोहल्ला खेलकलां, ईदगाह कैराना जिला शामली यू.पी. के विरूध्द अवैध रूप से उर्वरक भण्डारण करने पर उर्वरक नियंत्रण आदेश 1985 एवं आवश्यक वस्तु अधिनियम 1955 के उपबंधों के तहत थाना रहली में एफआईआर दर्ज की गई है। कलेक्टर के निर्देश पर तहसीलदार रहली के नेतृत्व में कृषि विभाग एवं पुलिस की संयुक्त दल द्वारा दिनांक 15/09/2025 को रात्रि लगभग 10.45 को कार्यवाही की गई। कार्यवाही में पाया गया कि इफको कम्पनी का लगभग 50 बोरी डी.ए.पी. अवैध रूप से परिवहन किया जा रहा था, जिसको जप्त कर थाना रहली मे रखवाया गया। ड्राईवर इन्द्रजीत पिता दौलतसिंह द्वारा वाहन से 50 बोरी भाड़े में सोमवती तिवारी खमरिया के घर से लाद कर महान्द्रा पुल पर जाना था। रात्रि में लगभग 11.45 बजे संबधित के घर पर तहसीलदार रहली, पुलिस एवं कृषि विभाग के व्दारा छापे की कार्यवाही की गई, जिसमें लगभग 300 बोरी जिप्सम ग्रेन्युल्स की पाई गई। उक्त उर्वरक की खरीदी की जांच में संबधित के व्दारा मेसर्स पी. के. ट्रेडर्स मोहल्ला खेलकला ईदगाह, कैराना जिला शामली यू.पी का टेक्स ईन्वाईस जिसमें उल्लेख है कि कृषि सम्पदा केन्द्र रहली के नाम से ईन्वाईस देयक काटा गया है। जबकि रहली मे इस नाम से कोई भी उर्वरक विक्रेता फर्म वर्तमान मे नहीं है। उक्त अवैध रूप से भण्डारित उर्वरक की मात्रा लगभग 300 बोरी जप्त कर सोमवती तिवारी खमरिया को सुपुर्द किया गया एवं अन्य जप्त डी ए पी की 50 बोरी पुलिस अभीरक्षा मे रखा गया है। दोनो जगह से जप्त किये गये उर्वरक डी ए पी का एवं जिप्सम ग्रेन्युअल का सेंपल लिया जाकर कार्यवाही कर जांच हेतु उप संचालक कृषि जिला सागर को प्रेषित किये गये। उपरोक्त छापामारी कार्यवाही में उर्वरको का भण्डारण अवैध रूप से किया जाकर उर्वरक नियत्रंण आदेश 1985 एवं आवश्यक वस्तु अधिनियम 1955 के उपबंधों के तहत प्रकरण पंजीबद्ध कर प्रकरण को विवेचना मे लिया गया।

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