उत्तर प्रदेशबस्ती

बस्ती जिले के सभी ब्लॉकों में चल रहे अवैध अल्ट्रासाउंड सेंटर

अजीत मिश्रा (खोजी)

स्वास्थ्य महकमा बस्ती

मौत का सौदागर हुआ स्वास्थ्य विभाग,कर रहा जिले के लोगों की जान का सौदा। सब्जी की दुकान की तरह खुलते जा रहे गाली कूचों में अल्ट्रासाउंड सेंटर। पूरे जिले में केवल 96 के आसपास ही है रजिस्टर्ड अल्ट्रासाउंड सेंटर। लेकिन पीएनडीटी प्रभारी की कृपा से चल रहे जिले में हजारों की संख्या में अवैध सेंटर। पूर्व में रहे उप जिला अधिकारी गुलाबचंद ने किया था अवैध सेंटरो पर ताबड़तोड़ कार्रवाई। सील किए गए थे लगभग दर्जनों की संख्या में अवैध रूप से चल रहे सेंटर। ना खाता ना बही जो स्वास्थ्य विभाग के जिम्मेदार कहें वही सही। 5000*1000= के नियम पर काम कर रहे है स्वास्थ्य विभाग के जिम्मेदार।आखिर डिप्टी सीएमओ के ऊपर इतने आरोपों के बाद क्यों बचा रहे जिले के आला अधिकारी।क्या सबको मिल रही बराबर की हिस्सेदारी इसलिए अपनी कुर्सी पर जमे बैठे हैं भ्रष्टाचारी।बस्ती जिले के सभी ब्लॉकों में चल रहे अवैध अल्ट्रासाउंड सेंटर से जुड़ा है पूरा मामला।IMG 20251001 WA0180IMG 20251001 WA0189IMG 20251001 WA0189IMG 20251001 WA0188

#अवैध अल्ट्रासाउंड सेंटरों पर स्वास्थ्य विभाग की मेहरबानी, धड़ल्ले से चल रहा काला कारोबार। जिले में स्वास्थ्य विभाग की नाक के नीचे अवैध अल्ट्रासाउंड सेंटरों का कारोबार खुलेआम फल-फूल रहा है। कलवारी, कुसौरा, गायघाट और कुदरहा ब्लॉक में गली-कूचों तक में अवैध अल्ट्रासाउंड सेंटरों की भरमार है, लेकिन विभागीय अधिकारी मानो आंख बंद किए बैठे हैं। सूत्रों का दावा है कि जिले में सिर्फ 96 अल्ट्रासाउंड सेंटर ही रजिस्टर्ड हैं, जबकि हकीकत यह है कि हजारों की संख्या में बिना लाइसेंस के सेंटर धड़ल्ले से चल रहे हैं। सवाल यह है कि आखिर स्वास्थ्य विभाग की मेहरबानी से ही ये सेंटर क्यों पनप रहे हैं? लोगों में चर्चा है कि सफेद लिफाफा ही वह चाबी है, जिसके दम पर ये सेंटर बेरोकटोक काम कर रहे हैं। आरोप लग रहे हैं कि जब तक लिफाफा विभागीय टेबल तक पहुंच रहा है, तब तक कार्रवाई की उम्मीद करना बेमानी है। पूर्व में उप जिला अधिकारी गुलाबचंद ने अवैध सेंटरों पर ताबड़तोड़ छापेमारी कर दर्जनों सेंटर सील कराए थे, लेकिन उनके ट्रांसफर के बाद जैसे पूरा सिस्टम फिर से ढीला हो गया। अब हालात ये हैं कि ना खाता ना बही, जो सीएमओ और उनके अधीनस्थ तय करें वही सही।

जनता का बड़ा सवाल है – क्या सीएमओ साहब आंख बंद किए बैठे हैं? क्या विभागीय अधिकारियों की मिलीभगत के बिना इतना बड़ा अवैध नेटवर्क चल सकता है? और सबसे अहम, क्या जिले में चल रही ये गोरखधंधा केवल लापरवाही है या फिर इसकी जड़ें भ्रष्टाचार से जुड़ी हुई हैं।

सवाल उठता है कि जब सरकार और सुप्रीम कोर्ट तक बार-बार पीएनडीटी एक्ट के सख्त पालन की बात कर चुके हैं, तो बस्ती जैसे जिले में यह कानून मजाक क्यों बन गया है?

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