
अजीत मिश्रा (खोजी)
” कैंटोमेंट कांड” : नोटिस में नियम, जेब में नियमावली।
अयोध्या।
कहते हैं — “जहाँ कानून सोता है, वहाँ नोटिस बोलता है।”
और अयोध्या के कैंटोमेंट बोर्ड में तो हालात यह हैं कि कानून फाइल में सोता है और नोटिस सुबह-सुबह किरायेदारों के दरवाज़े पर योगा करने पहुंच जाता है।
मुख्य अधिशाषी अधिकारी ने हाल में नोटिस जारी किया — 58 दुकानों में से केवल 6 वैध हैं, बाकी खाली करो। वाह! क्या बात है! यानी दशकों से किराया वसूला गया, पर अब याद आया कि एग्रीमेंट तो हुआ ही नहीं। कानून भी सोच में पड़ गया — अरे भाई, बिना एग्रीमेंट के किराया वसूली… यह कौन सा नया योगासन है?
दरअसल, छावनी बोर्ड का यह “कैंटोमेंट कांड” अयोध्या का नया प्रशासनिक महाकाव्य बन चुका है —🔥 जहाँ वैध दुकानदार भगोड़े घोषित हैं और अवैध कब्जेदार सरकारी संरक्षित प्रजाति माने जाते हैं।
बताया जाता है कि जग्गू महाराज नामक एक ‘स्थानीय संत’ ने दुकान संख्या 42 के सामने पूरी पार्किंग को ‘जग्गू धाम’ घोषित कर दिया है। यहाँ रोज़ाना तेल की आरती होती है, पेंचकस कीर्तन चलता है, और गाड़ियों की मरम्मत के नाम पर“राजस्व” टपकता है। बोर्ड के अधिकारी इस धाम से इतने प्रभावित हैं कि वहाँ से गुजरते हुए नोटिस अपने आप जेब में छिप जाते हैं। अब देखिए, बोर्ड कहता है — “सभी कार्रवाई नियमों के अनुसार हो रही है।” पर सवाल यह है कि ये नियम किस फाइल में रहते हैं? क्योंकि जमीनी हकीकत तो यह है कि — जिन्होंने किराया दिया, उन्हें नोटिस मिला* जिन्होंने कब्जा किया, उन्हें सलाम मिला।”
🔥 पूर्व विधायक पवन पांडेय* ने इस भ्रष्टाचार पर आवाज उठाई थी, पर अफ़सोस — बोर्ड के कान में शायद वही तेल पड़ा है जो जग्गू की मोटर में डाला जाता है।
छावनी परिषद के बाबू अब इतने अनुभवी हो चुके हैं कि रसीद और रिश्वत में फर्क करना भूल गए हैं। एक हाथ में फाइल, दूसरे में पर्ची, तीसरा हाथ शायद किसी की जेब में। अंत में, बोर्ड की सफाई पर एक ही सवाल— अगर सब कुछ नियमों के अनुसार है, तो नियम किसके अनुसार बने हैं?
🤩 अयोध्या के व्यापारी अब मज़ाक में कहते हैं — कैंटोमेंट बोर्ड में अगर ईमानदारी की जांच हुई…तो सबसे पहले जांच अधिकारी पर ही नोटिस जारी हो जाएगा।








