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।। भ्रष्टाचार की ‘रस्सी’ पर टिकी विकास की नींव: चार महीने में ही जमींदोज हुई ₹20 लाख की पानी टंकी।।

।। सरिया की जगह 'रस्सी' का खेल: तिलगड़िया बुजुर्ग में सरकारी धन की खुली डकैती, बाल-बाल बचे ग्रामीण।।

अजीत मिश्रा (खोजी)

।। भ्रष्टाचार की ‘रस्सी’ पर टिकी विकास की नींव: चार महीने में ही जमींदोज हुई ₹20 लाख की टंकी।।

वृहस्पतिवार 22 जनवरी 26, उत्तर प्रदेश।

डुमरियागंज (सिद्धार्थनगर) ।। सरकार जहाँ एक ओर ‘हर घर जल’ योजना के जरिए गांव-गांव तक पानी पहुँचाने का दावा कर रही है, वहीं डुमरियागंज तहसील के तिलगड़िया बुजुर्ग गांव में भ्रष्टाचार का एक ऐसा “अजूबा” सामने आया है जिसे देखकर इंजीनियरिंग के सिद्धांत भी शर्मसार हो जाएं। यहाँ महज चार महीने पहले जैक्सन कंपनी द्वारा बनाई गई पानी की टंकी की दीवार ताश के पत्तों की तरह भरभराकर गिर गई।FB IMG 1769054133456 FB IMG 1769054160272 FB IMG 1769054152851 FB IMG 1769054146719 FB IMG 1769054140885

💫सरिया की जगह ‘रस्सी’ का खेल

घटनास्थल पर मौजूद ग्रामीणों ने जो आरोप लगाए हैं, वे रोंगटे खड़े कर देने वाले हैं। आरोप है कि दीवार के निर्माण में मजबूती के लिए लोहे की सरिया का इस्तेमाल करने के बजाय रस्सी डाल दी गई थी। ₹20 लाख की भारी-भरकम लागत से तैयार इस ढांचे का चार महीने में ही ध्वस्त हो जाना निर्माण की गुणवत्ता पर एक बड़ा प्रश्नचिह्न खड़ा करता है। क्या यह पैसा जनता की सहूलियत के लिए था या ठेकेदार और जिम्मेदारों की जेबें भरने के लिए?

💫टला बड़ा हादसा, पर कौन लेगा जिम्मेदारी?

दीवार जिस वक्त गिरी, सौभाग्य से वहाँ कोई मौजूद नहीं था, वरना यह भ्रष्टाचार किसी की जान का दुश्मन बन सकता था। लेकिन सवाल यह है कि क्या प्रशासन किसी बड़े हादसे का इंतजार कर रहा है? मानक दरकिनार किए गए, घटिया सामग्री का प्रयोग हुआ और जाँच के नाम पर अब तक केवल खानापूर्ति ही दिख रही है।

💫निर्माण एजेंसी पर उठते सवाल

जैक्सन कंपनी द्वारा किए गए इस निर्माण ने न केवल विभागीय लापरवाही को उजागर किया है, बल्कि उन पर्यवेक्षकों (Supervisors) की भूमिका को भी संदिग्ध बना दिया है जिनकी नाक के नीचे यह “रस्सी वाला ढांचा” तैयार हुआ। क्या भुगतान से पहले गुणवत्ता की जाँच नहीं की गई थी?

ग्रामीणों की मांग: “यह महज एक दीवार का गिरना नहीं है, बल्कि सरकारी धन की डकैती है। हम मांग करते हैं कि निर्माण कंपनी को ब्लैकलिस्ट किया जाए और संबंधित अधिकारियों पर कठोर दंडात्मक कार्रवाई हो।”

तिलगड़िया बुजुर्ग की यह गिरती दीवार प्रदेश में हो रहे विकास कार्यों की गुणवत्ता की पोल खोल रही है। अगर भ्रष्टाचार की नींव पर ऐसे ही ‘रस्सी’ के सहारे निर्माण होते रहे, तो आम जनता खुद को असुरक्षित महसूस करने पर मजबूर होगी। अब देखना यह है कि क्या शासन इस मामले में केवल लीपापोती करता है या भ्रष्टाचार के दोषियों को सलाखों के पीछे भेजकर एक नजीर पेश करता है।

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