
अजीत मिश्रा (खोजी)
।। रामपथ पर ‘कैफ’ का गुंडाराज: सत्ता के संरक्षण में फल-फूल रहा अवैध वसूली का सिंडिकेट।।
वृहस्पतिवार 22 जनवरी 26, उत्तर प्रदेश।
अयोध्या। मर्यादा पुरुषोत्तम श्रीराम की पावन नगरी, जहाँ मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ‘जीरो टॉलरेंस’ और ‘रामराज्य’ की परिकल्पना को साकार करने में जुटे हैं, वहीं उनके दावों को ज़मीनी स्तर पर कुछ रसूखदार और उनके गुर्गे सरेआम चुनौती दे रहे हैं। रामपथ के साहिबगंज रोड पर ‘कैफ’ नाम के एक व्यक्ति ने अतिक्रमण और अवैध वसूली का ऐसा काला साम्राज्य स्थापित कर रखा है, जिसके आगे प्रशासन नतमस्तक नजर आ रहा है।
👉पार्षद का नाम और सिस्टम की शह
इस पूरे खेल का सबसे चौंकाने वाला पहलू यह है कि आरोपी कैफ खुद को वर्तमान पार्षद सुल्तान अंसारी का करीबी और ‘छोटा भाई’ बताकर धौंस जमाता है। स्थानीय लोगों और दुकानदारों के बीच चर्चा है कि नगर निगम ने खुद कैफ जैसे चेहरों को आगे कर रखा है ताकि ‘दिखावे’ के लिए अतिक्रमण हटाया जाए और ‘पर्दे के पीछे’ से वसूली का सिंडिकेट चलाया जा सके। यहाँ का सीधा मंत्र है— “ठेला लगाओ, अतिक्रमण बढ़ाओ, बस हमारे बंदे तक हिस्सा पहुँचाओ।”
👉पत्रकारों से बदसलूकी और रसूख की हनक
इस भ्रष्टाचार का भंडाफोड़ तब हुआ जब साहिबगंज रोड पर कुछ पत्रकारों ने ठेला संचालकों की मनमानी का विरोध किया। इस पर बीच में कूदे कैफ ने न केवल पत्रकारों से अभद्रता की, बल्कि अहंकार में चूर होकर यहाँ तक कह दिया कि— “पुलिस, प्रशासन और पत्रकार सब मेरी जेब में हैं, पार्षद सुल्तान अंसारी मेरे बड़े भाई हैं, मेरा कोई कुछ नहीं बिगाड़ पाएगा।” जब पत्रकारों ने इस गुंडागर्दी का वीडियो बनाना शुरू किया और पुलिस को सूचना दी, तो खुद को ‘सिस्टम का आका’ बताने वाला कैफ अपनी गाड़ी छोड़कर मौके से रफूचक्कर हो गया। हद तो तब हो गई जब इस वसूली एजेंट को बचाने के लिए पार्षद का बॉडीगार्ड तक मौके पर पहुँच गया और सिफारिशी फोन घनघनाने लगे।
👉नगर निगम पर उठते गंभीर सवाल
यह स्थिति नगर निगम की कार्यशैली पर एक गहरा काला धब्बा है। एक तरफ परिवर्तन दल फोटो खिंचवाने के लिए अभियान चलाता है, दूसरी तरफ कैफ जैसे लोग उसी अतिक्रमण से अवैध वसूली का सिंडिकेट पालते हैं।
👉जनता और प्रशासन से सीधे सवाल:
🔥क्या कैफ नगर निगम का आधिकारिक कर्मचारी है? यदि हाँ, तो उस पर अब तक कार्रवाई क्यों नहीं हुई?
🔥यदि वह कर्मचारी नहीं है, तो विभाग के नाम पर वसूली करने की हिम्मत उसे कहाँ से मिली?
🔥क्या अयोध्या जैसे पवित्र स्थल पर पार्षद के नाम का सहारा लेकर चल रहा यह भ्रष्टाचार मुख्यमंत्री की साख को बट्टा नहीं लगा रहा?
पुलिस ने फिलहाल एक ठेला संचालक को हिरासत में लिया है, लेकिन असली मास्टरमाइंड और उसे संरक्षण देने वाले ‘सफेदपोश’ अभी भी कानून की पहुँच से दूर हैं। यदि एक सजग पत्रकार के साथ ऐसी अभद्रता हो सकती है, तो आम जनता की सुरक्षा का क्या? अब देखना यह है कि क्या अयोध्या प्रशासन इस सिंडिकेट को ध्वस्त कर ‘रामराज्य’ की मर्यादा बहाल करता है या फिर भ्रष्टाचार का यह खेल ऐसे ही अनवरत चलता रहेगा।








