उत्तर प्रदेशलखनऊ

सेवानिवृत्ति के मुहाने पर खाकी का दाग: 50 हजार की रिश्वत लेते जीएसटी डिप्टी कमिश्नर गिरफ्तार

जीएसटी विभाग में हड़कंप: डिप्टी कमिश्नर को विजिलेंस ने रंगे हाथ दबोचा रिश्वतखोरी का 'अंतिम पड़ाव': रिटायरमेंट से पहले भ्रष्टाचार के जाल में फंसीं डिप्टी कमिश्नर

अजीत मिश्रा (खोजी)

खाकी और कलम के बीच का ‘भ्रष्टाचार’: सेवाकाल के अंतिम पड़ाव पर दाग

  • वाराणसी: जीएसटी की डिप्टी कमिश्नर 50 हजार की रिश्वत लेते गिरफ्तार
  • विजिलेंस का बड़ा एक्शन: जीएसटी की डिप्टी कमिश्नर अंबिका रंगे हाथ गिरफ्तार
  • फाइल निपटाने के बदले मांग रहे थे रिश्वत, जीएसटी की डिप्टी कमिश्नर पर विजिलेंस का शिकंजा

वाराणसी। सरकारी नौकरी को समाज में ‘सेवा’ का पर्याय माना जाता है, लेकिन जब वही सेवा निजी स्वार्थ की भेंट चढ़ जाए, तो व्यवस्था पर से विश्वास उठना स्वाभाविक है। वाराणसी में जीएसटी (राज्य कर) सेक्टर-6 की डिप्टी कमिश्नर अंबिका की गिरफ्तारी ने एक बार फिर प्रशासनिक तंत्र की उस काली सच्चाई को उजागर किया है, जो आम आदमी को तिल-तिल कर मारती है।

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​सेवानिवृत्ति के करीब, फिर भी लालच का अंत नहीं

​यह बेहद शर्मनाक और विडंबनापूर्ण है कि जिस अधिकारी को अपने लंबे कार्यकाल के अंतिम पड़ाव पर, यानी सेवानिवृत्ति के महज कुछ महीनों पहले, एक आदर्श और गरिमापूर्ण विदाई की तैयारी करनी चाहिए थी, वह खाकी के शिकंजे में कैद हो रही है। ₹50,000 की रिश्वत के लिए अपना पूरा करियर, मान-सम्मान और पेंशन की सुरक्षा दांव पर लगा देना, यह दर्शाता है कि भ्रष्टाचार की जड़ें कितनी गहरी हो चुकी हैं।

​फाइलें जो रिश्वत की मोहताज हैं

​शिकायतकर्ता अजय कुमार मौर्य, जो ब्लैक स्मिथ इंडस्ट्रीज के निदेशक हैं, का मामला केवल एक फाइल का निस्तारण या फरवरी 2023 के जीएसटी रिटर्न का मुद्दा नहीं है; यह उस प्रशासनिक अवरोध का प्रतीक है, जिसे अधिकारी जानबूझकर पैदा करते हैं ताकि टेबल के नीचे से सुविधा शुल्क वसूला जा सके। क्या एक उद्यमी का काम बिना ‘सुविधा शुल्क’ के नहीं हो सकता? क्या सरकारी दफ्तरों में फाइलों की गति अब केवल नोटों की गड्डियों पर निर्भर है?

​विजिलेंस की कार्रवाई: एक चेतावनी

​उत्तर प्रदेश सतर्कता अधिष्ठान (विजिलेंस) की वाराणसी इकाई द्वारा रंगे हाथ की गई यह गिरफ्तारी सराहनीय है। दादा रेस्टोरेंट के पास बिछाया गया यह जाल उन भ्रष्ट अधिकारियों के लिए एक कड़ा संदेश है, जो यह समझते हैं कि बंद कमरों और रेस्टोरेंट्स में होने वाला लेन-देन कभी सामने नहीं आएगा।

​व्यवस्था में सुधार की दरकार

​यह मामला केवल एक व्यक्ति का नहीं, बल्कि उस पूरी व्यवस्था का है जहाँ ‘लोक सेवक’ को ‘लोक शोषक’ बनते देर नहीं लगती। जब तक जनता जागरूक होकर ऐसे अधिकारियों के खिलाफ विजिलेंस की हेल्प-लाइन नंबरों (9454401866 / 9454401222) पर शिकायत दर्ज कराना जारी रखेगी, तब तक भ्रष्ट तंत्र को सांसें लेना मुश्किल होगा।

​डिप्टी कमिश्नर की यह गिरफ्तारी एक चेतावनी है—पद और प्रतिष्ठा का दंभ कानून से ऊपर नहीं हो सकता। समय रहते संभल जाइए, क्योंकि भ्रष्टाचार की कमाई का अंत हमेशा अपमानजनक होता है।

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