
डेंगू चिकनगुनियां के बीच अब स्क्रब टायफस ने भी दस्तक दी है। ज्ञात हो कि “चिगर माइटस” का ओरिएंशिया सुसुगामुशी माइटस इंसानी शरीर मे प्रवेश करने से स्क्रब टायफस होता है। यह मायटस चूहों के शरीर मे चिपके रहते है तथा चूहो के खून से ही बढ़ते है। बारिश के समय पर चंहों के बिल से बाहर आने पर उनके शरीर पर मौजूद यह मायटस खेतों ऊचे घासों झाड़ियों आदि मे फैलते है। इन कीटाणुओ के संपर्क मे आने पर स्क्रब टायफस बीमारी होती है। इस बीमारी की कोई दवाई नही है। हाल मे हुई बारिश तथा बारिश से उगने वाली घास तथा झाड़ियों से यह बीमारी फैलने की आशंका रहती है। जानकारी के अनुसार नागपुर के ग्रामीण क्षेत्रों मे स्क्रब टायफस का खतरा बढ़ता दिख रहा है। नागपुर शहर मे अबतक स्क्रब टायफस के 05 संदिग्ध मरीज मिले है, उनके नमूने जांच के लिए प्रयोगशाला मे भेजे गए है। स्क्रब टायफस के मरीजों को यकृत सहित निमोनियां की शिकायत होने की आशंका रहती है। वहीं पीलिया तथा सांस लेने पर तकलीफ का खतरा भी हो सकता है। आमतौर पर पच्चीस फीसदी मरीजों को मस्तिष्क का रोग होता है। अनेक मरीजों मे रक्त मे प्लेटलेट्स एवं डब्ल्यूबीसी कम।होते है। समय पर ईलाज न मिलने पचास फीसदी मरीजों को मौत का खतरा रहता है। प्राप्त जानकारी के अनुसार स्क्रब टायफस से अबतक तीन मरीजो की मौत एम्स मे उपचार के दौरान हुई है। इनमे से सैंतीस और चौंतीस वर्षीय महिला तथा एक चौबीस वर्षीय पुरूष शामिल है। चूहों के शरीर से बढ़ने वाले “चिगर माइटस”ऊची घास घनी झाड़ियों मे ज्यादा फैलते है। इन माइटस के संपर्क मे आने से संक्रमण का खतरा होता है। ऐसे जगहो पर जाने से बचना चाहिए। चारा घास जमा करते समय पर शरीर पर पूरे कपड़े पहनने चाहिए। झाड़ियों मे काम करके घर लौटने पर गर्म पानी से कपड़ों को धोना, एवं नहाना चाहिए। बीमारी के लक्षण नजर आने पर तुरंत अपने डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए।






