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सेगाव/- भारत की परिवार व्यवस्था ही रत्नों की खान है। इसी परिवार व्यवस्था से डॉक्टर, इंजीनियर,संत,सुधार, शहीद ओर महात्मा निकले हैं। यह बात देव ग्राम गंधावड़ में आयोजित हो रही संगीत में श्रीमद् पावन प्रज्ञा पुराण कथा के तृतीय दिवस परिवार खंड के अंतर्गत कथा वाचिका ब्रह्मवादिनी बहन सुनीता पाटीदार ने कही। उन्होंने आगे बताते हुए कहां की परिवार समाज की रीड है जैसे परिवार होंगे वैसा ही समाज होगा। और अच्छे परिवार से ही अच्छे समाज का और अच्छे समाज से अच्छे राष्ट्र का निर्माण होता है। परिवार एक प्रयोगशाला है जिसकी वैज्ञानिक परिवार की ग्रहणी होती है। जो अपने विचार और भावनाओं से सूसू संस्कृति मानव का निर्माण करती है। परिवार को सुदृढ़ बनाने के लिए पहला सूत्र श्रमशीलता दूसरा मितव्ययिता तीसरा सुव्यवस्था चौथा सहकारिता और पांचवा शालीनता इन पांच सूत्रों को अपनाकर घर को स्वर्ग बनाया जा सकता है। हमारे देश की परिवार व्यवस्था का उदाहरण विदेश में भी दिया जाता है। लेकिन आज विडंबना है कि हमारी परिवार व्यवस्था बिखरती हुई जा रही है। जिस पर पाश्चात संस्कृति हावी होती हुई जा रही है। हमें इसके कुचक्र से बचना होगा और पुनः आदर्श परिवारों का निर्माण करना होगा जिससे हमारा समाज संस्कृति और राष्ट्र पुनः विश्व गुरु बनने की ओर अग्रसर होगा। कथा के अंत में संयुक्त परिवार का संचालन कर रहे महिमाराम जी पटेल व चक्कीवाले के बेटे बहुओं व नाती पोतों द्वारा माता-पिता का पूजन व सम्मान किया गया । मुझे इस दुनिया में लाया मुझे बोलना चलना सिखाया ओ मात पिता तुम्हें वंदन मैंने किस्मत से तुम्हें पाया गीत सुनाकर ब्रह्मवादिनी बहन संगीता विष्णोले, प्रभा पाटीदार व कविता कुशवाह द्वारा उपस्थित जन समुदाय को भावविभोर किया गया। अंत में आभार आयोजन समिति के विकास पाटीदार द्वारा माना गया।
सेगाँव से प्रवीण यादव की खबर










