
सरताज – बरेली। शास्त्रीनगर स्थित दरगाह बड़े सय्यद साहब पर मंगलवार को बड़े ही अकीदत और शान-ओ-शौकत के साथ 84वां उर्स-ए-पाक मनाया गया। दरगाह परिसर में सुबह से ही जायरीन की भीड़ जुटनी शुरू हो गई। दूर-दराज इलाकों से आए जायरीन ने दरगाह पर हाजिरी दी और मन्नतें मांगी।
उर्स के मौके पर आयोजित महफ़िल-ए-शमा में कव्वालों ने सूफियाना कलाम पेश किए, जिन पर देर रात तक समां बंधा रहा। वहीं शायरों ने भी अपनी नज्मों और कलाम से महफिल को रोशन किया। दरगाह के खादिम शारिक ने बताया कि बड़े सय्यद साहब का उर्स हर साल पूरी अकीदत और मोहब्बत के साथ मनाया जाता है। यहां आने वाले जायरीन अपने दिल की मुरादें मांगते हैं और अल्लाह से रहमत की दुआ करते हैं।
उर्स के अंतिम दिन कुल शरीफ की रस्म अदा की गई। इस मौके पर मुल्क की तरक्की, अमन-ओ-चैन और भाईचारे की दुआ की गई। दरगाह पर सजाई गई महफिलों में मौजूद लोगों ने अल्लाह से मुल्क में अमन कायम रहने और इंसानियत की भलाई की फरियाद की।
दरगाह परिसर में उर्स के दौरान प्रबंध समिति की ओर से जायरीन के लिए लंगर और अन्य सुविधाओं का भी खास इंतज़ाम किया गया। इस तरह कुल शरीफ की दुआओं के साथ बड़े सय्यद साहब का 84वां उर्स सकुशल संपन्न हुआ









