
महुली सोनभद्र_(राकेश कुमार कन्नौजिया)_
राजा बरियार शाह खेल मैदान महुली में चल रही श्रीरामलीला का अंतिम दिवस ऐसा भक्ति और उल्लास से भरा रहा कि पूरा मैदान “जय श्रीराम” के नारों से थर्रा उठा। हजारों की भीड़ मंचन देखने के लिए मैदान में उमड़ पड़ी। समिति के पदाधिकारी भीड़ को व्यवस्थित करने में जुटे रहे, पर श्रद्धालुओं का उत्साह देखते ही बनता था।
लक्ष्मण शक्ति प्रसंग का मंचन सबसे भावुक रहा। जब लक्ष्मण जी मूर्छित होकर भूमि पर गिरे तो पूरा मैदान स्तब्ध रह गया। इसके बाद संजीवनी बूटी लाने निकले हनुमान जी का भरत से मिलन और कालनेमी राक्षस का छल-कपट दिखाया गया। हनुमान-भरत संवाद और कालनेमी वध के दृश्य पर दर्शकों ने तालियों और जयघोष से पूरा माहौल गूंजा दिया।
इसी क्रम में मेघनाथ और कुंभकरण के वध के युद्ध दृश्य ने मैदान को रोमांच और उत्साह से भर दिया। जब दोनों राक्षस रणभूमि में धराशायी हुए तो श्रद्धालुओं ने खड़े होकर “जय श्रीराम” का उद्घोष किया। वहीं सती सुलोचना का करुण विलाप देखकर दर्शक भावुक हो उठे और वातावरण कुछ देर के लिए गमगीन हो गया।
आज विजयादशमी एवं दशहरे के पावन पर्व पर सायं 3 बजे से रावण वध लीला का भव्य मंचन होगा। इसके उपरांत करीब 50 फीट ऊंचे रावण के पुतले का दहन किया जाएगा। आतिशबाजी और पटाखों की गड़गड़ाहट से आसमान गूंज उठेगा और पूरा कस्बा रोशनी से जगमगा उठेगा।
इसी के साथ मैदान में दशहरे के मेले का आयोजन भी होगा, जिसमें झूले, मिठाई और खिलौनों की दुकानें सज चुकी हैं। बच्चों और महिलाओं में मेले को लेकर खासा उत्साह देखा जा रहा है। दूर-दराज़ से आए लोग इस मेले में खरीदारी और मनोरंजन का आनंद लेंगे।
इस ऐतिहासिक आयोजन में रामलीला समिति के अध्यक्ष अरविंद जायसवाल, उपाध्यक्ष वीरेंद्र कुमार कन्नौजिया, सचिव राकेश कुमार कन्नौजिया, कोषाध्यक्ष अमित कुमार कन्नौजिया सहित समिति के सभी पदाधिकारी लगातार सक्रिय दिखे और मंचन की भव्यता को सफल बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
रामलीला का यह आयोजन न केवल धार्मिक आस्था का केंद्र रहा बल्कि सामाजिक एकता, सांस्कृतिक धरोहर और पारंपरिक उत्सवों की जीवंतता को भी संजोए हुए है।












