
राखी का रिश्ता बना मौत का बंधन
भाइयों ने ही बहन और उसके प्रेमी को उतार दिया मौत के घाट — सोनभद्र दोहरे हत्याकांड का सनसनीखेज़ खुलासा

स्थान: सोनभद्र
संवाददाता (राकेश कुमार कन्नौजिया)_
“जिस कलाई पर कभी राखी बंधी थी, उसी हाथ ने बहन की जान ले ली।”
यूपी के सोनभद्र जिले से एक दिल दहला देने वाला मामला सामने आया है। हाथीनाला थाना क्षेत्र के जंगल में मिली युवती की लाश ने जो रहस्य पैदा किया था, उससे अब पुलिस ने पर्दा उठा दिया है।
सर्विलांस/एसओजी और हाथीनाला पुलिस की संयुक्त टीम ने दोहरा हत्याकांड सुलझाते हुए दो अभियुक्तों को गिरफ्तार किया है।
प्यार, धोखा और खून की कहानी
मृतका की पहचान मुन्नी गुप्ता (पत्नी दुखन साव, निवासी मोतीपुर, पटना, बिहार) के रूप में हुई है।
वह अपने प्रेमी दुखन साव के साथ गुजरात भाग गई थी। दोनों वहां साथ रह रहे थे, लेकिन परिवार को यह रिश्ता मंजूर नहीं था।
इसी बीच भाइयों ने योजना रची —
फोन पर बहन को कहा,
> “घर लौट आओ, अब कोई परेशानी नहीं, हम तुम्हारी शादी करा देंगे।”
भरोसे में आई मुन्नी अपने प्रेमी के साथ विंध्याचल पहुँची।
वहीं से चारपहिया वाहन में बैठाकर दोनों को सोनभद्र की ओर लाया गया।
मौत का सफर शुरू हुआ
जैसे ही गाड़ी बरकछा मोड़ के पास पहुंची, पहले से तय योजना के तहत एक और युवक को गाड़ी में बैठाया गया।
कुछ दूरी तय करते ही, हाथीनाला के पास दोनों की गोली मारकर हत्या कर दी गई।
युवती का शव — हाथीनाला के जंगल में फेंका गया
युवक का शव — दुद्धी थाना क्षेत्र के जंगल में ठिकाने लगाया गया
इस तरह खुली गुत्थी
जब गुजरात में युवक के भांजे ने गुमशुदगी की रिपोर्ट दर्ज कराई और सोनभद्र में अज्ञात शव मिलने की खबर सामने आई, तो पुलिस ने तकनीकी जांच शुरू की।
मोबाइल लोकेशन और सर्विलांस टीम की मदद से पुलिस आरोपियों तक पहुंची।
गिरफ्तार आरोपी:
मुन्ना कुमार पुत्र द्वारिका प्रसाद
राहुल उर्फ सिद्धार्थ पुत्र द्वारिका प्रसाद
(निवासी – ग्राम मोतीपुर, थाना नौबतपुर, जिला पटना, बिहार)
दोनों को हाथीनाला तिराहे से गिरफ्तार किया गया।
पिकअप वाहन को भी पुलिस ने बरामद कर लिया है।
शेष तीन भाइयों की तलाश में पुलिस की टीमें लगी हैं।
– विश्वास के बदले धोखा
पुलिस लाइन में आयोजित प्रेसवार्ता में अधिकारियों ने बताया —
> “यह मामला सिर्फ हत्या का नहीं, बल्कि रिश्तों में छल और सामाजिक संकीर्णता का भयावह उदाहरण है।”
समाज के लिए एक सवाल
मुन्नी गुप्ता की हत्या ने उस सोच को आईना दिखाया है,
जो आज भी प्यार को बगावत समझती है।
“जब प्यार पर समाज की बंदिशें भारी पड़ जाएं,
तो रिश्तों की डोर भी राखी नहीं बचा सकती।”
सोनभद्र के जंगलों में मिली यह लाश समाज से यह सवाल पूछ रही है —
क्या प्यार की सज़ा अब भी मौत है?












