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सहारनपुर: सिंचाई विभाग कर्मचारियों का ज्ञापन– पुरानी पेंशन बहाली समेत नौ मांगों के निस्तारण में देरी पर चरणबद्ध आंदोलन की चेतावनी, प्रशासन पर बढ़ा दबाव

जनपद शाखा ने विभागीय अनियमितताओं और कर्मचारियों के हितों की अनदेखी के खिलाफ चेतावनी जारी की है।

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सहारनपुर: सिंचाई विभाग कर्मचारियों का ज्ञापन– पुरानी पेंशन बहाली समेत नौ मांगों के निस्तारण में देरी पर चरणबद्ध आंदोलन की चेतावनी, प्रशासन पर बढ़ा दबाव

सहारनपुर। उत्तर प्रदेश सिंचाई एवं जल संसाधन विभाग के मिनिस्टीरियल एसोसिएशन इरिगेशन डिपार्टमेंट (मि.ए.ई.डि.) की जनपद शाखा ने विभागीय अनियमितताओं और कर्मचारियों के हितों की अनदेखी के खिलाफ चेतावनी जारी की है। एसोसिएशन ने स्पष्ट किया है कि अगर पुरानी पेंशन बहाली समेत अन्य लंबित मांगों पर 10 अक्टूबर 2025 तक कार्रवाई नहीं हुई, तो कर्मचारियों द्वारा चरणबद्ध आंदोलन शुरू किया जाएगा, जिसकी जिम्मेदारी पूरी तरह प्रशासन की होगी।

एसोसिएशन के अध्यक्ष देवराज और मंत्री मोहित कुमार ने इस संबंध में प्रमुख अभियंता (विभागाध्यक्ष) और प्रमुख अभियंता (परियोजना एवं नियोजन) को ज्ञापन भेजा है। ज्ञापन में नौ प्रमुख मांगों को उठाया गया है, जो लंबे समय से विभाग में अनसुलझे पड़े हुए हैं और कर्मचारियों के मनोबल पर प्रतिकूल प्रभाव डाल रहे हैं।

नौ प्रमुख मांगें और उनका महत्व

  1. पुरानी पेंशन बहाली: कर्मचारियों ने इस लंबित मुद्दे को प्राथमिकता देते हुए कहा है कि पेंशन में हुई कटौती और बाधाएं उनके वित्तीय सुरक्षा को प्रभावित कर रही हैं।

  2. त्रुटिपूर्ण वरिष्ठता सूची पर कार्रवाई: कर्मचारी संघ ने उन अधिकारियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की है, जिन्होंने त्रुटिपूर्ण वरिष्ठता सूची जारी की।

  3. तीन सदस्यीय जांच रिपोर्ट का पालन: पिछले वर्षों में बनाए गए जांच आयोग की रिपोर्ट पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई, जिसे लागू करने की जरूरत बताई गई है।

  4. रिक्त पदों पर प्रोन्नति: कई कर्मचारियों की पदोन्नति लंबित है, जिससे विभागीय कार्यकुशलता प्रभावित हो रही है।

  5. प्रशासनिक अधिकारी पदों का विभाजन: 50:30:20 के अनुपात में प्रशासनिक अधिकारियों के दायित्व और जिम्मेदारी तय करने की मांग उठाई गई है।

  6. अधिष्ठान अनुभाग के प्रधान सहायक मुकुल कुमार को हटाने और उनके कार्यों की जांच: कर्मचारियों ने विभाग में अनुशासन और पारदर्शिता बनाए रखने हेतु यह कदम जरूरी बताया है।

  7. लिपिकीय संवर्ग के कार्य निर्धारण: स्पष्ट कार्य विभाजन नहीं होने के कारण विभागीय कार्य प्रभावित हो रहे हैं।

  8. वेतन-चिकित्सा धन आवंटन प्रक्रिया को सरल बनाना: लंबित चिकित्सा और वेतन संबंधी समस्याओं का समाधान सुनिश्चित करना।

  9. अन्य कल्याणकारी योजनाओं का निष्पादन: कर्मचारियों के हितों की रक्षा के लिए सभी योजनाओं का सही तरीके से पालन होना आवश्यक है।


आंदोलन की रूपरेखा

एसोसिएशन ने आंदोलन की योजना चरणबद्ध तरीके से बनाई है। इसके तहत:

  • 17 अक्टूबर 2025: प्रमुख अभियंताओं का घेराव

  • 30 अक्टूबर 2025: मुख्य अभियंता स्तर-2 कार्यालय के समक्ष धरना और ज्ञापन

  • 12 नवंबर 2025: प्रमुख अभियंता कार्यालय पर विशाल धरना

ज्ञापन की प्रतिलिपि जल शक्ति मंत्री, प्रमुख सचिव और प्रांतीय पदाधिकारियों को भी भेजी गई है, ताकि विभागीय स्तर पर गंभीरता से कार्रवाई सुनिश्चित हो सके।


कर्मचारी असंतोष और प्रशासनिक चुनौती

सूत्रों के अनुसार, यह असंतोष केवल सहारनपुर तक सीमित नहीं है। विभाग में कई वर्षों से पेंशन, प्रोन्नति और अन्य कल्याणकारी मुद्दे अनसुलझे पड़े हैं। कर्मचारियों का कहना है कि इन लंबित मुद्दों ने विभागीय कार्यकुशलता और मनोबल पर प्रतिकूल प्रभाव डाला है।

कर्मचारी संघ ने यह भी चेतावनी दी है कि यदि प्रशासन ने संवाद और वार्ता के माध्यम से समाधान नहीं निकाला, तो चरणबद्ध आंदोलन विभागीय कार्यों को प्रभावित कर सकता है। यह संकेत प्रशासन को भी दिया गया है कि कर्मचारी शांतिपूर्ण आंदोलन के प्रति गंभीर हैं और यह कदम सिर्फ उनके अधिकारों की रक्षा के लिए है।


सिंचाई विभाग में व्याप्त समस्याएं

उत्तर प्रदेश में सिंचाई विभाग को लंबे समय से कई समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है। इनमें:

  • पुरानी पेंशन बहाली और वित्तीय सुरक्षा में देरी

  • पदोन्नति और वरिष्ठता सूची में अनियमितताएं

  • रिक्त पदों और प्रशासनिक जिम्मेदारियों का असमान वितरण

  • वेतन, चिकित्सा और कल्याण योजनाओं का धीमा क्रियान्वयन

कर्मचारी संघ का कहना है कि इन मुद्दों पर यदि तुरंत कार्रवाई नहीं हुई, तो विभाग की परियोजनाएं और कार्य प्रभावित होंगे।


एसोसिएशन का संदेश और अपेक्षाएं

एसोसिएशन ने स्पष्ट किया है कि उनका आंदोलन शांतिपूर्ण और संवैधानिक होगा, और इसका उद्देश्य केवल कर्मचारी अधिकारों की रक्षा करना है। उन्होंने प्रशासन से आग्रह किया है कि:

  • पुरानी पेंशन बहाली और लंबित प्रोन्नति को प्राथमिकता दी जाए

  • जांच रिपोर्टों को लागू किया जाए और भ्रष्टाचार व अनियमितताओं का निष्पादन सुनिश्चित किया जाए

  • प्रशासनिक पदों और कार्यों का उचित विभाजन किया जाए

  • वेतन और चिकित्सा धन की प्रक्रिया सरल और पारदर्शी बनाई जाए

कर्मचारी संघ ने चेतावनी दी है कि अगर प्रशासन ने इन मांगों पर सकारात्मक कदम नहीं उठाए, तो विभाग में आंदोलन के कारण परियोजनाओं और कार्यों में देरी होगी।


प्रदेश स्तर पर संदेश

सहारनपुर की यह घटना प्रदेश के सिंचाई विभाग में व्याप्त समस्याओं को भी उजागर करती है। कर्मचारी संघ लंबे समय से पेंशन, प्रोन्नति और कल्याणकारी योजनाओं को लेकर संघर्ष कर रहा है। उनका कहना है कि कर्मचारी अधिकारों और विभागीय सुधार सुनिश्चित करने के लिए यह कदम आवश्यक है।

स्थानीय सूत्रों के अनुसार, यदि प्रशासन ने समय रहते संवाद और समाधान की प्रक्रिया शुरू नहीं की, तो आने वाले दिनों में प्रदेश के अन्य जिलों में भी सिंचाई कर्मचारियों का आंदोलन तेज हो सकता है।

उत्तर प्रदेश सिंचाई विभाग में कर्मचारियों का यह आंदोलन न केवल उनके अधिकारों की रक्षा के लिए है, बल्कि यह सकारात्मक प्रशासनिक सुधार और पारदर्शिता का संदेश भी देता है। कर्मचारी संघ ने प्रशासन से अपेक्षा जताई है कि वे संवाद और कार्यान्वयन के माध्यम से लंबे समय से लटके मुद्दों का समाधान करें।

यदि प्रशासन ने जल्द कार्रवाई नहीं की, तो सहारनपुर में चरणबद्ध आंदोलन शुरू होगा, जिसमें घेराव, धरना और विशाल प्रदर्शन शामिल होंगे। यह कदम विभागीय सुधार, अनुशासन और कर्मचारियों के मनोबल को मजबूत करने के उद्देश्य से उठाया गया है।

🖋️ रिपोर्ट — एलिक सिंह
ब्यूरो चीफ — दैनिक आशंका बुलेटिन / संपादक – वंदे भारत लाइव टीवी न्यूज़
📞 संपर्क: 8217554083

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