

सहारनपुर: शाकुम्भरी वन क्षेत्र में वन माफिया और भ्रष्ट वन कर्मचारियों का खेल जारी — सरकारी प्रतिबंधित पेड़ों की अवैध कटाई से वन विभाग की छवि धुंधली
सहारनपुर। उत्तर प्रदेश के शिवालिक वन प्रभाग, सहारनपुर के शाकुम्भरी वन क्षेत्र में वन माफियाओं और कथित रूप से भ्रष्ट वन कर्मचारियों द्वारा सरकारी एवं गैर-सरकारी प्रतिबंधित प्रजाति के पेड़ों की अवैध कटाई का खेल लगातार जारी है। स्थानीय लोगों और वन प्रेमियों का कहना है कि वन विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों की छवि इस काले खेल की वजह से धुंधली होती जा रही है।
मिली जानकारी के अनुसार, शाकुम्भरी वन क्षेत्र की बीट कलसिया में मंगलवार की देर रात लगभग 300-300 क्विंटल के हरे-भरे आम और जामुन के पेड़ अवैध रूप से काटे गए। यह घटना ग्राम बाबैल और ग्राम कलसिया के बीच बी.डी. पब्लिक विद्यालय के सामने जाने वाली चक रोड पर हुई। यह मार्ग स्थानीय लोगों और छात्रों के लिए एक महत्वपूर्ण मार्ग है, और यहाँ से गुजरते समय पर्यावरण और वन संपदा की सुरक्षा भी अपेक्षित है।
सूत्रों का दावा है कि इस अवैध कटाई में शाकुम्भरी रेन्ज के वन क्षेत्र कलीसिया सेक्शन इंचार्ज वन दरोगा श्रवण कुमार और उनके सहयोगी वन कर्मचारी बृजेश कुमार की मिलीभगत रही। ग्रामीण और पर्यावरण कार्यकर्ताओं का कहना है कि ये अधिकारी रक्षक की भूमिका निभाने के बजाय भक्षक बन गए हैं, और वन माफियाओं के साथ मिलकर सरकारी और प्रतिबंधित प्रजातियों के पेड़ों की कटाई में सीधे शामिल हैं।
स्थानीय लोगों का यह भी आरोप है कि इस मामले में शाकुम्भरी रेन्ज के क्षेत्रीय वनाधिकारी की भूमिका भी संदिग्ध है। उनका कहना है कि अधिकारियों की मिलीभगत और वन क्षेत्र में काले कारनामों की अनदेखी वन विभाग की कार्यप्रणाली को दीमक की तरह खोखला कर रही है। इस कारण क्षेत्र में वन संपदा का संरक्षण और सुरक्षा केवल नाममात्र की बनी हुई है।
वन विशेषज्ञों और पर्यावरण कार्यकर्ताओं का कहना है कि शाकुम्भरी वन क्षेत्र में इस प्रकार की घटनाएं दिनचर्या बन चुकी हैं, और वन विभाग की प्राकृतिक संसाधनों की सुरक्षा में गंभीर लापरवाही सामने आ रही है। प्रतिबंधित प्रजाति के पेड़ों की कटाई न केवल पर्यावरणीय संतुलन को प्रभावित कर रही है, बल्कि स्थानीय जैव विविधता और वन्य जीवों के आवास को भी खतरे में डाल रही है।
स्थानीय ग्रामीणों ने बताया कि वन माफियाओं द्वारा की गई अवैध कटाई स्थानीय प्रशासन और वन अधिकारियों की मिलीभगत के बिना संभव नहीं थी। उन्होंने यह भी कहा कि पेड़ों की कटाई रात के समय की गई ताकि कोई बड़ी कार्रवाई न हो। इस प्रकार की कटाई से वन क्षेत्र में भ्रष्टाचार और अवैध गतिविधियों की जड़ें मजबूत हो रही हैं।
वन प्रेमियों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने इस घटना की कड़ी निंदा करते हुए कहा कि वन विभाग की इस तरह की लापरवाही से सरकारी नीति और कानून केवल कागजों में ही रह गए हैं। उन्होंने आग्रह किया कि इस मामले में उच्च अधिकारियों और शासन स्तर पर तुरंत सख्त कार्रवाई की जाए, ताकि वन माफिया और भ्रष्ट वन कर्मचारियों को खुला खेलने का मौका न मिले।
सहारनपुर शिवालिक वन प्रभाग की यह घटना न केवल वन विभाग की छवि को धूमिल कर रही है, बल्कि आम जनता और पर्यावरण कार्यकर्ताओं में असंतोष और नाराजगी भी बढ़ा रही है। लोगों का मानना है कि यदि सरकारी और गैर-सरकारी प्रतिबंधित पेड़ों की कटाई पर तुरंत रोक नहीं लगाई गई, तो शाकुम्भरी क्षेत्र की प्राकृतिक सुंदरता और वन संपदा गंभीर खतरे में पड़ जाएगी।
वन विभाग के विशेषज्ञों का कहना है कि हरे-भरे आम और जामुन के पेड़ शाकुम्भरी क्षेत्र की जैव विविधता में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। ये पेड़ न केवल वन्य जीवों के लिए खाद्य और आवास प्रदान करते हैं, बल्कि क्षेत्र की मिट्टी को सुरक्षित रखने और जल संरक्षण में भी अहम योगदान देते हैं। इस प्रकार की कटाई से स्थानीय पर्यावरणीय संतुलन बिगड़ता है, और वन क्षेत्र में आने वाले पर्यटन और सामुदायिक गतिविधियों पर भी नकारात्मक प्रभाव पड़ता है।
स्थानीय लोगों का यह भी आरोप है कि वन विभाग के वरिष्ठ अधिकारी अपने नियंत्रण और निगरानी तंत्र में गंभीर लापरवाही बरत रहे हैं। उन्होंने कहा कि पेड़ों की कटाई और अवैध लकड़ी की तस्करी पर रोक लगाने के लिए जो कड़े निर्देश होने चाहिए थे, वे केवल कागजों तक सीमित हैं। यही कारण है कि वन माफिया और भ्रष्ट वन कर्मचारी अपने काले कारनामों को खुलेआम अंजाम दे रहे हैं।
वन्यजीव और पर्यावरण विशेषज्ञ भी इस बात पर चिंता व्यक्त कर रहे हैं कि इस प्रकार की कटाई से क्षेत्र में वन्य जीवों की जैव विविधता खतरे में आ सकती है। पेड़ों के कट जाने से पक्षियों और अन्य वन्य जीवों के लिए भोजन और आश्रय का संकट उत्पन्न हो जाता है। इसके साथ ही स्थानीय किसानों और ग्रामीणों को भी जल संरक्षण और प्राकृतिक संसाधन उपलब्ध कराने में कठिनाई आती है।
स्थानीय लोग और सामाजिक संगठन अब इस मामले को उच्च अधिकारियों और मीडिया के माध्यम से उजागर करने का प्रयास कर रहे हैं। उनका कहना है कि यदि समय रहते इस पर कार्रवाई नहीं हुई, तो वन क्षेत्र में और अधिक अनियंत्रित कटाई और वन संपदा का नुकसान होना तय है। उन्होंने वन विभाग से तत्काल जांच, दोषियों की पहचान और कड़ी कार्रवाई की मांग की है।
वन विशेषज्ञों का कहना है कि इस प्रकार की घटनाएं सिर्फ वन संपदा ही नहीं, बल्कि सरकारी नीतियों और कानूनों की विश्वसनीयता पर भी सवाल खड़े करती हैं। इसलिए इस मामले में केवल स्थानीय वन अधिकारियों तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि प्रांतीय और राज्य स्तरीय अधिकारियों को भी संज्ञान लेना चाहिए, ताकि वन माफिया और भ्रष्ट कर्मचारी कानून के तहत दंडित हों।
इस पूरे मामले ने स्पष्ट कर दिया है कि सहारनपुर शिवालिक वन प्रभाग में शाकुम्भरी रेन्ज की वन सुरक्षा और पर्यावरण संरक्षण की स्थिति अत्यंत नाजुक है। यदि अब तक कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया, तो वन माफियाओं और भ्रष्ट वन कर्मचारियों द्वारा किए जाने वाले अवैध कार्य लगातार बढ़ सकते हैं।
स्थानीय जनता, पर्यावरण कार्यकर्ता और वन प्रेमियों का कहना है कि सरकारी और गैर-सरकारी प्रतिबंधित पेड़ों की कटाई रोकना वन विभाग की प्राथमिक जिम्मेदारी है। इसके लिए आवश्यक है कि उच्च अधिकारियों द्वारा तुरंत कड़ी निगरानी, नियमित निरीक्षण और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए।
इस पूरे प्रकरण से यह स्पष्ट है कि वन माफिया और भ्रष्ट वन कर्मचारी शाकुम्भरी क्षेत्र में अवैध रूप से पेड़ों की कटाई कर वन विभाग की छवि को धूमिल कर रहे हैं। समय रहते अगर प्रशासन ने सही दिशा में कदम नहीं उठाया, तो क्षेत्र में पर्यावरणीय संकट और वन संपदा का नुकसान और बढ़ सकता है।
🖋️ रिपोर्ट — एलिक सिंह
ब्यूरो चीफ — दैनिक आशंका बुलेटिन / संपादक – वंदे भारत लाइव टीवी न्यूज़
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