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सिर्फ कागजों में संचालित हो रहे हैं, लाखों रुपये खर्च कर बनाए गए एकीकृत ठोस अपशिष्ट प्रबंधन केंद्र व सामुदायिक शौचालय 

सिर्फ कागजों में संचालित हो रहे हैं, लाखों रुपये खर्च कर बनाए गए एकीकृत ठोस अपशिष्ट प्रबंधन केंद्र व सामुदायिक शौचालय

पंकज चौबे सिद्धार्थनगर

 लाखों रुपये के लागत से बनाए गए एकीकृत ठोस अपशिष्ट प्रबंधन केंद्र निष्प्रयोजन होकर रह गए हैं अभी भी कई ग्राम पंचायत में का संचालन नहीं हो रहा है! स्वच्छ भारत मिशन अन्तर्गत गावों को स्वच्छ रखने के लिए ग्राम पंचायतों में लाखों रुपये खर्च कर एकीकृत ठोस अपशिष्ट प्रबंधन केंद्र बनाया गया, इन केंद्रों पर एक कर्मी व एक कूड़ा गाड़ी की तैनाती भी की गयी, लेकिन क्या जिस उद्देश्य से यह केंद्र लाखों रुपये खर्च कर और कर्मचारी को प्रतिमाह मानदेय देकर काग़ज़ों में खाना पूर्ति की जा रही है योजना सफल हो रही हैं कि नहीं, इसको देखने वाला कोई नहीं है I आलम यह है कि गाव के लोगों को इसके बारे में कुछ पता ही नहीं है, इस योजना के अंतर्गत तरल व ठोस कचरे को अलग अलग गाव के लोग रखे, कर्मचारी गाड़ी घर घर जाकर कूड़ा लेकर निस्तारण केंद्र तक पहुंचाएगा वहां उसका निस्तारण होगा
ताजा मामला विकास खंड बढ़नी अन्तर्गत ग्राम पंचायत सिसवा बुजुर्ग का है जहां काग़ज़ों में कुड़ा प्रबंधन केंद्र के साथ कूड़ा गाड़ी के ड्राइवर(रामू ई रिक्शा चालक)का  मानदेय 20 jun 2025 को 14518 रुपये +31jul 2025 को 15120 रुपये 25sep2025 को 15372 रुपये भी दिया गया है लेकिन जमीनी हकीकत कुछ और ही है वहीं सामुदायिक शौचालय में मानदेय रखरखाव नल रिबोर के नाम पर 19676 +788+19350 रुपये का भुगतान भी किया गया लेकिन आज तक कोई कार्य नहीं हुआ
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