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बस्ती: मौत का ‘शॉर्टकट’ बना हरदिया मार्ग, अनियंत्रित ट्रक ने कार-टेम्पो को रौंदा।

टोल की 'बचत' या जिंदगी से 'खिलवाड़'? हरदिया में ट्रक ने ढाया कहर, 3 की मौत!

।। बस्ती: टोल बचाने की ‘लालच’ ने ली तीन जिंदगियां, हरदिया चौराहे पर मौत का तांडव।।

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बस्ती।। जनपद में रफ्तार का कहर थमने का नाम नहीं ले रहा है। रविवार को हरदिया चौराहे के पास एक अनियंत्रित ट्रक ने ऐसी तबाही मचाई कि सड़क पर चीख-पुकार और अफरातफरी मच गई। इस भीषण सड़क हादसे में तीन लोगों की दर्दनाक मौत हो गई, जबकि टेंपो सवार पांच अन्य लोग गंभीर रूप से घायल हैं। यह हादसा महज एक दुर्घटना नहीं, बल्कि व्यवस्था की अनदेखी और भारी वाहनों की मनमानी का नतीजा है।

कैसे हुआ हादसा?

प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, बांसी की तरफ जा रहा एक तेज रफ्तार ट्रक अचानक अनियंत्रित हो गया। बेकाबू ट्रक ने सामने से आ रही एक कार और सवारी से लदे टेंपो को जोरदार टक्कर मार दी। टक्कर इतनी भीषण थी कि कार और टेंपो के परखच्चे उड़ गए। टेंपो में ड्राइवर समेत पांच लोग सवार थे, जो लहूलुहान होकर सड़क पर गिर पड़े। स्थानीय लोगों और सूचना पर पहुंची यातायात पुलिस ने कड़ी मशक्कत के बाद घायलों को अस्पताल पहुंचाया और सड़क पर लगे लंबे जाम को खुलवाया।

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जानकारी के अनुसार, टक्कर इतनी जबरदस्त थी कि टेम्पो के परखच्चे उड़ गए। हादसे में घायल कुल छह लोगों को तत्काल जिला अस्पताल ले जाया गया, जहाँ इलाज के दौरान तीन लोगों ने दम तोड़ दिया। मृतकों में शहर के मालवीय रोड स्थित ‘ए वन बुटीक’ की संचालिका प्रीति शुक्ला (45 वर्ष) और नगर थाना क्षेत्र के खड़ौआ निवासी अमरजीत (25 वर्ष) शामिल हैं। एक अन्य मृतक की शिनाख्त के प्रयास अभी भी जारी हैं।

अस्पताल पहुंचे जनप्रतिनिधि और अधिकारी

घटना की सूचना मिलते ही गो सेवा आयोग के उपाध्यक्ष (दर्जा प्राप्त राज्यमंत्री) महेश शुक्ल, जिला पंचायत अध्यक्ष संजय चौधरी और सीओ सिटी सत्येंद्र भूषण त्रिपाठी जिला अस्पताल पहुंचे। जिला पंचायत अध्यक्ष संजय चौधरी ने बताया कि मृतक अमरजीत उनके रिश्तेदार थे।

प्रशासनिक सक्रियता दिखाते हुए अधिकारियों ने स्वास्थ्य विभाग से समन्वय स्थापित किया और रात में ही दो शवों का पोस्टमार्टम कराया गया। हादसे में प्रीति शुक्ला के पति बृजेश शुक्ला भी घायल हुए हैं, जिनका उपचार अस्पताल में चल रहा है।

पुलिस की कार्रवाई

हादसे के बाद ट्रेलर चालक वाहन छोड़कर मौके से फरार हो गया। पुलिस ने ट्रेलर को कब्जे में ले लिया है और आरोपी चालक की तलाश के लिए टीमें गठित कर दी गई हैं।

नोट: इस दुखद घटना के बाद जिले में शोक की लहर है, विशेषकर व्यापारी वर्ग प्रीति शुक्ला के आकस्मिक निधन से स्तब्ध है।

टोल बचाने का ‘शॉर्टकट’ बना काल

हादसे के बाद स्थानीय ग्रामीणों का गुस्सा फूट पड़ा। लोगों का सीधा आरोप है कि मुख्य मार्गों पर टोल टैक्स बचाने के चक्कर में भारी वाहन (ट्रक और ट्रेलर) इस रूट का इस्तेमाल करते हैं।

अवैध प्रवेश: बड़े वाहनों के लिए यह मार्ग उपयुक्त न होने के बावजूद, चालक धड़ल्ले से गाड़ियां निकालते हैं।

प्रशासनिक लापरवाही: ग्रामीणों का कहना है कि बार-बार शिकायत के बाद भी इन भारी वाहनों के प्रवेश पर रोक नहीं लगाई जा रही है।

रोजाना का खतरा: आए दिन होने वाली इन दुर्घटनाओं ने स्थानीय निवासियों के मन में खौफ पैदा कर दिया है।

तीखे सवाल: जिम्मेदार कौन?

क्या प्रशासन और परिवहन विभाग अभी भी किसी बड़ी त्रासदी का इंतजार कर रहा है? चंद रुपयों का टोल बचाने के चक्कर में बेगुनाहों की जान ली जा रही है। क्या हरदिया चौराहा अब ‘डेथ जोन’ बन चुका है? पुलिस जाम तो हटवा देती है, लेकिन उन कारणों को क्यों नहीं हटाती जिनकी वजह से ये जाम और मौतें हो रही हैं?

“सड़क पर बहता खून सिर्फ एक दुर्घटना की गवाही नहीं देता, बल्कि उस सिस्टम पर सवाल उठाता है जो टोल बचाने वाले मौत के सौदागरों को खुली छूट दिए हुए है।”

अजीत मिश्रा (खोजी)

बस्ती

उत्तर प्रदेश

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