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“खाकी की चुप्पी, अपराधियों की धमक—लालगंज में फिर लौटा दहशत का वक्त!”

नवागत थानाध्यक्ष की पहली परीक्षा: लालगंज में सिस्टम को ठेंगा दिखा गए लोरिक गैंग के गुर्गे।

अजीत मिश्रा (खोजी)

🚨बस्ती: लालगंज में खाकी पस्त, अपराधी मस्त; ‘आग की होली’ से दहला बाजार🚨

🔥बस्ती दहला: लालगंज में पुलिस पस्त, अपराधियों ने खेली ‘आग की होली’!

🔥खाकी को खुली चुनौती: “रोक सको तो रोक लो”, चार दुकानें फूँककर बदमाश फरार।

🔥हिस्ट्रीशीटरों का नंगा नाच: लालगंज पुल के पास बदमाशों का तांडव, राख हुई व्यापारियों की पूंजी।

🔥पुलिस की नाक के नीचे गुंडाराज: क्या बस्ती में फिर लौट आया है दहशत का दौर?

🔥जेल से चला ‘रिमोट’, बाहर जली दुकानें; आखिर कब जागेगा प्रशासन?

उत्तर प्रदेश।

बस्ती।। जनपद के लालगंज थाना क्षेत्र में कानून-व्यवस्था की धज्जियां उड़ाते हुए बेखौफ बदमाशों ने पुलिस की कार्यप्रणाली पर गहरा प्रश्नचिह्न लगा दिया है। लालगंज पुल के पास स्थित बाजार में बीती रात हिस्ट्रीशीटर किशन यादव गैंग और लोरिक गैंग के गुर्गों ने जो तांडव मचाया, उसने आम जनता और व्यापारियों के मन में दहशत भर दी है। बदमाशों ने सरेराह चार दुकानों को आग के हवाले कर दिया, जिससे लाखों का सामान और नकदी जलकर राख हो गई।1773839159 69baa337b51dd

🚨जेल के बदले की आग में जला बाजार

सूत्रों की मानें तो यह पूरी वारदात बदले की भावना से प्रेरित है। गैंग का सरगना लोरिक पांडेय पहले ही जेल जा चुका है, जिसकी बौखलाहट अब सड़कों पर उतर आई है। जेल जाने के बाद इस गैंग ने अपनी ‘ताकत’ दिखाने के लिए शांत बाजार को निशाना बनाया। विकास, अमन, रोहन, शिवा चौहान, रोहन पांडेय, मुकेश चौधरी और अभय सिंह जैसे गुर्गों के नाम इस आगजनी में प्रमुखता से सामने आ रहे हैं। आधा दर्जन से अधिक बदमाशों ने मिलकर दुकानों में आग लगाई और मौके से फरार हो गए।

🚨नवागत थानाध्यक्ष को ‘खुली चुनौती’

यह वारदात महज एक अपराध नहीं, बल्कि इलाके के नवागत थानाध्यक्ष को सीधे तौर पर दी गई चुनौती है। बदमाशों के हौसले इतने बुलंद हैं कि उन्होंने अपनी करतूतों से साफ संदेश दे दिया है— “रोक सको तो रोक लो”। पुलिस की नाक के नीचे घंटों तक उत्पात मचता रहा, लेकिन सिस्टम की सुस्ती ने अपराधियों को सुरक्षित भागने का पूरा मौका दिया।

🚨व्यापारियों में आक्रोश, सिस्टम पर सवाल

लाखों की संपत्ति खाक होने के बाद लालगंज के व्यापारियों में भारी रोष है। बाजार के लोगों का कहना है कि जब रक्षक ही सो रहे हों, तो भक्षक तो खेल खेलेंगे ही।

⭐क्या पुलिस का इकबाल खत्म हो चुका है?

⭐हिस्ट्रीशीटरों की लिस्ट फाइलों में धूल क्यों फांक रही है?

⭐रात की गश्त के नाम पर पुलिस क्या सिर्फ खानापूर्ति कर रही है?

“यह घटना पुलिस प्रशासन के मुंह पर तमाचा है। अगर हिस्ट्रीशीटर खुलेआम बाजार फूंक रहे हैं, तो आम आदमी की सुरक्षा भगवान भरोसे है।” — एक स्थानीय व्यापारी

🚨दहशत के साये में लालगंज

फिलहाल पूरे बाजार में सन्नाटा और दहशत का माहौल है। आरोपी बेखौफ होकर सिस्टम को ठेंगा दिखा रहे हैं। अब देखना यह है कि नवागत थानाध्यक्ष इस ‘चुनौती’ को स्वीकार कर अपराधियों को सलाखों के पीछे भेजते हैं या फिर लालगंज इसी तरह अपराधियों के तांडव का गवाह बनता रहेगा।

लालगंज बाजार के पुल के पास बीती रात हुई आगजनी की घटना ने जनपद की सुरक्षा व्यवस्था की कलई खोल दी है। जेल गए लोरिक पांडेय की बौखलाहट में उसके गुर्गों ने जिस तरह व्यापारियों की मेहनत की कमाई (दुकानों) को फूंका है, वह सीधे तौर पर पुलिस को दी गई चुनौती है।

🔥हिस्ट्रीशीटरों का खुला खेल: किशन यादव गैंग के आधा दर्जन गुर्गों ने हथियारों के दम पर इलाके में आतंक मचाया।

🔥पुलिस की विफलता: नवागत थानाध्यक्ष के कार्यभार संभालते ही अपराधियों का यह दुस्साहस प्रशासन की शिथिलता दर्शाता है।

⭐व्यापारियों की मांग: पीड़ित व्यापारियों ने तत्काल गिरफ्तारी और मुआवजे की मांग की है। चेतावनी दी गई है कि यदि 24 घंटे में कार्रवाई नहीं हुई तो बाजार बंद कर उग्र आंदोलन किया जाएगा।

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