

महफिल-ए-शमा में सजेगी रूहानी महफिल:बुर्रहानुद्दीन चिश्ती ताला बाबा का ऐतिहासिक मेला अपने उरुज ऐ उन्वान परः कुल की रस्म के साथ होगा समापन
जयपुर । राजस्थान की राजधानी जयपुर जिले के जमवारामगढ़ तहसील के ताला ग्राम की पहाड़ी पर स्थित गंगा-जमुनी तहजीब,साम्प्रदायिक सद्भाव और आपसी भाईचारेकी अनूठी मिसाल माने जाने वाले हजरत बाबा शेख बुरहानुद्दीन चिश्ती रहमतुल्ला अलैह की दरगाह शरीफ, ताला का सदियों पुराना पांच दिवसीय वार्षिक उर्स व मेला इन दिनों पूरे अपने उरुज और शबाब पर है। 9 अप्रैल 2026 से शुरू हुआ यह धार्मिक आयोजन 12 अप्रैल 2026 को पारंपरिक कुल की सम के साथ सम्पन्न होगा, जबकि 13 व 14 अप्रैल को क्षेत्रीय गुदडी मेले का आयोजन होगा यह मेला न केवल धार्मिक आस्था का केंद्र है, बल्कि हिन्दू-मुस्लिम एकता, सामाजिक समरसता और सांझी संस्कृति का जीवंत प्रतीक भी है,इसमें देश-विदेश से लाखों जायरीन और श्रद्धालु भाग लेकर अपनी अकीदत पेश कर रहे हैं।शुक्रवार की नमाज में देश के अमन-चैनकी दुआ।शुक्रवार 10 अप्रैल को दरगाह परिसर में बड़ी संख्या मैं जायरीन एकत्रित हुए थे , जहां दोपहर लगभग डेढ़ बजे जुम्मे की नमाज अदा की गई। नमाज के बाद मुल्क में अमन, शांति, भाईचारा और तरक्की के लिए विशेष दुआएं मांगी गई। इस दौरान दरगाह परिसर रूहानी माहौल से सराबोर नजर आया।• मिलाद, तकरीर और सुफियाना कव्वालियों से गूंजा दरबार शाम को आयोजित मिलाद शरीफ और तकरीर कार्यक्रमोंमें उलेमा-ए-कराम ने कुरआन और हदीस की रोशनीमें इंसानियत, भाईचारे और नेक रास्ते पर चलने का संदेश दिया। हजरत मोहम्मद साहब के जीवन आदर्शोंको अपनाने पर जोर दिया गया ।रात्रि में राजस्थान सहितदे श की प्रसिद्ध कव्वाल पार्टियों ने एक से बढ़कर एकसूफियाना कलाम पेश कर माहौल को भक्तिमय औररूहानी बना दिया। जायरीन देर रात तक इन कार्यक्रमोंका आनंद लेते रहे महफिल-ए-शमा में सजेगी रूहानी महफिल शनिवार 11 अप्रैल को ईशा की नमाज के बाद मिलाद-ए-पाक एवं महफिल-ए-शमाका आयोजन होगा, जिसमें देश-प्रदेश के नामी कव्वाल बाबा की शान में कलाम पेश करेंगे। इस आयोजन को लेकर श्रद्धालुओं में विशेष उत्साह बना हुआ है।कुल की रस्म के साथ होगा।समापन रविवार 12 अप्रैल को प्रातः 10 बजे से 11बजे के मध्य कुल की रस्म अदा की जाएगी।इस दौरान हिन्दू और मुस्लिम दोनों समुदायोंके श्रद्धालु दरगाह में चादर, फूल अर्पित कर मन्नतें मांगेंगे। नवविवाहित जोड़े, बच्चों के मुंडन (जडुला) तथा अन्य धार्मिक रस्मों केमाध्यम से लोग अपनी आस्था व्यक्त करेंगे और बाबा का आशीर्वाद प्राप्त करेंगे।गुदड्डी मेले में उमड़ेगा ग्रामीण जनसैलाब उस के समापन के बाद 13 एवं 14 अप्रैल को आयोजित होने वाले पारंपरिक गुदड्डी मेले में आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों से बड़ी संख्या में लोग भाग लेंगे। यह मेला क्षेत्रीय लोकसंस्कृति, व्यापार और सामाजिक मेलजोल का महत्वपूर्ण केंद्र होता है।व्यवस्थाएं चाक-चौबंद, जनप्रतिनिधि जुटे-ग्राम पंचायत ताला के सरपंच आमिर खान शेख, पूर्व सरपंच फखरुददीन खान शेख, अन्नू खान शेख तथा हाजी शकूर खान शेख,लतीफ, हाजी इकबाल बशीर खान शेख आदि ने बताया कि मेले को लेकर सभी आवश्यक व्यवस्थाएंसुनिश्चित की गई हैं। श्रद्धालुओं की सुविधा, सुरक्षा, पेयजल,साफ-सफाई और यातायात प्रबंधन के लिए विशेष इंतजाम किएगए हैं, ताकि दूर-दराज से आने वाले जायरीनों को किसी प्रकारकी असुविधा न हो।
● आस्था के साथ सामाजिक एकता का संदेश-बाबा बुरहानुद्दीन चिश्ती का यह मेला हर वर्ष धार्मिक आस्थासाथ-साथ सामाजिक एकता, प्रेम और भाईचारे का संदेशदेता है। वहां विभिन्न धर्मों के लोग एक साथ इबादत और श्रद्धामें शामिल होकर देश की सांस्कृतिक विविधता और एकता कोसशक्त बनाते हैं।मेले मे रोडवेज, चिकित्सा, बिजली, पानी, पीडब्लूडी, रसद, पंचायत प्रशासन, पुलिस जाप्ता प्रशासनिक अधिकारी मौजूद है।







