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विशेष रिपोर्ट: ठगी का नया जाल, तकनीक और विश्वास का दुरुपयोग कर रहे साइबर अपराधी

खुद को ड्रोन विशेषज्ञ बताकर लोगों को झांसे में लिया, ठग लिए 62 लाख नौकरी के नाम पर ठगी: नौकरी दिलाने का झांसा देकर लाखों की ठगी, कई लोग बने शिकार

अजीत मिश्रा (खोजी)

‘ड्रोन विशेषज्ञ’ बनकर करोड़ों के सपने दिखाने वाला शातिर गिरफ्तार, नौकरी और मदद के नाम पर लोगों से ठगे लाखों

संवाददाता, बस्ती/महराजगंज

  • भावनात्मक धोखाधड़ी: भाई को जेल से छुड़ाने का झांसा देकर 14.43 लाख ठगे
  • साइबर अपराध पर चेतावनी: रसूखदार लोगों के साथ तस्वीरें दिखाकर ठगी करने वाले गिरोह सक्रिय
  • अन्य मामला: सामान बेचने के नाम पर महिला से 90 हजार की ठगी

​डिजिटल युग में तकनीक का सहारा लेकर ठगी करने वाले अपराधी अब नए-नए हथकंडे अपना रहे हैं। हाल ही में महराजगंज और बस्ती जिले से सामने आए कई मामले इस बात की गवाही देते हैं कि कैसे अपराधी लोगों के भरोसे का फायदा उठाकर उन्हें अपना शिकार बना रहे हैं। इनमें ड्रोन तकनीक के नाम पर करोड़ों की ठगी से लेकर नौकरी और कानूनी मदद के नाम पर वसूली तक के मामले शामिल हैं।हमारे क्षेत्र में हाल के दिनों में साइबर अपराध और धोखाधड़ी की घटनाओं में एक चिंताजनक वृद्धि देखी गई है। अपराधी अब केवल साधारण तरीके से नहीं, बल्कि मनोवैज्ञानिक चालों का इस्तेमाल करके लोगों को अपना शिकार बना रहे हैं। ये ठग उच्च-स्तरीय सरकारी प्रोजेक्ट, विदेशी नौकरी और कानूनी मदद का झांसा देकर आम नागरिकों की गाढ़ी कमाई लूट रहे हैं।

​ड्रोन प्रोजेक्ट के नाम पर 62 लाख की चपत

​इस ठगी का मुख्य मामला महराजगंज के कोठीभार निवासी राहुल सिंह से जुड़ा है। आरोप है कि राहुल ने खुद को ‘ड्रोन इनोवेटर’ बताकर लोगों को बड़े प्रोजेक्ट्स का सपना दिखाया। उसने दिल्ली में मुलाकात के दौरान अपनी पहुँच रसूखदार लोगों तक होने का दावा किया और कई हाई-प्रोफाइल तस्वीरें व वीडियो दिखाकर पीड़ित को अपने जाल में फंसा लिया।महराजगंज के कोठीभार निवासी राहुल सिंह का मामला यह दर्शाता है कि कैसे ठग अपनी छवि को ‘प्रभावशाली’ बनाने के लिए कितनी मेहनत करते हैं।

  • कार्यप्रणाली: आरोपी ने पहले खुद को ‘ड्रोन इनोवेटर’ (नवाचारी) पेश किया। लोगों का भरोसा जीतने के लिए उसने रसूखदार व्यक्तियों के साथ अपनी फर्जी तस्वीरें और वीडियो का सहारा लिया।
  • फंसाने की रणनीति: पीड़ित चंद्रभूषण मिश्र को उसने दिल्ली में एक सुनियोजित बैठक के दौरान विश्वास में लिया। आरोपी ने यह दावा किया कि वह केंद्र सरकार के एक अत्यंत महत्वपूर्ण ड्रोन प्रोजेक्ट पर काम कर रहा है। जब शिकार पूरी तरह से उसकी बातों में आ गया, तो उसने तकनीकी खराबी (महत्वपूर्ण पार्ट खराब होना) का बहाना बनाकर 62 लाख रुपये की भारी-भरकम राशि और महंगे इलेक्ट्रॉनिक गैजेट्स (मोबाइल-लैपटॉप) ऐंठ लिए। यह मामला स्पष्ट करता है कि कैसे तकनीकी क्षेत्र के नाम पर आम लोगों को गुमराह किया जा रहा है।

​आरोपी ने पीड़ित चंद्रभूषण मिश्र को बताया कि वह केंद्र सरकार के एक महत्वपूर्ण ड्रोन प्रोजेक्ट पर काम कर रहा है, जिसका एक हिस्सा खराब हो गया है। रिसर्च के नाम पर उसने 62 लाख रुपये की मांग की और पीड़ित से लैपटॉप व मोबाइल फोन भी ऐंठ लिए। जब समय बीतने पर न तो प्रोजेक्ट शुरू हुआ और न ही पैसे वापस मिले, तब ठगी का अहसास हुआ। पुलिस ने पीड़ित की तहरीर पर मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।

​नौकरी दिलाने के नाम पर भी सक्रिय हैं ठग

​ नौकरी की तलाश में भटक रहे युवाओं की मजबूरी का फायदा उठाना इन ठगों का मुख्य पेशा बन गया है।केवल ड्रोन का मामला ही नहीं, बल्कि नौकरी दिलाने के नाम पर भी कई लोग ठगी का शिकार हो चुके हैं:

  • केस 1 (नगर थाना क्षेत्र): विदेश भेजने के नाम पर मोहम्मद इरशाद से 8.91 लाख रुपये की ठगी की गई।
  • केस 2 (हरैया): स्वास्थ्य विभाग में नौकरी दिलाने के बहाने सतीश पांडेय ने फर्जी सूची दिखाकर एक लाख रुपये वसूले।
  • केस 3 (नगर थाना क्षेत्र): ब्लॉक को-ऑर्डिनेटर की नौकरी दिलाने का झांसा देकर शत्रुधन लाल श्रीवास्तव ने 4.60 लाख रुपये हड़प लिए।

​भाई को जेल से छुड़ाने के नाम पर 14.43 लाख की वसूली

​बस्ती के सोनहा क्षेत्र में एक और चौंकाने वाला मामला सामने आया, जहां एक महिला को उसके भाई को जेल से छुड़ाने का झांसा देकर 14.43 लाख रुपये की ठगी की गई। शातिर ने महिला को फोन कर मदद का भरोसा दिलाया और अलग-अलग खातों में पैसे ट्रांसफर करवाए। जब भाई की रिहाई नहीं हुई और आरोपी टालमटोल करने लगा, तब महिला को धोखाधड़ी का पता चला।सोनहा क्षेत्र में सामने आया मामला सबसे अधिक संवेदनशील है, जहां अपराधियों ने एक पीड़ित के पारिवारिक संकट का फायदा उठाया।

  • भावनात्मक ब्लैकमेल: महिला को उसके भाई के जेल में होने का पता था। शातिर ने इसी कमजोरी को पकड़ा और 24 मई को फोन करके खुद को मददगार बताते हुए रिहाई का भरोसा दिलाया।
  • डिजिटल लूट: अपराधी ने धीरे-धीरे 35 लाख से शुरू करके कुल 14.43 लाख रुपये महिला और उसके रिश्तेदारों के खातों से ट्रांसफर करवा लिए। जब भाई बाहर नहीं आया और आरोपी ने टालमटोल शुरू की, तब पीड़िता को ठगी का एहसास हुआ।

​पुलिस की अपील: ‘अज्ञात व्यक्तियों पर न करें भरोसा’

​इन मामलों के बाद पुलिस प्रशासन सतर्क हो गया है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि किसी भी अनजान व्यक्ति द्वारा फोन पर दी गई नौकरी की पेशकश, सरकारी प्रोजेक्ट या मदद के नाम पर पैसों का लेन-देन न करें। सोशल मीडिया या फोन पर दिखाई गई रसूखदारों के साथ तस्वीरों को देखकर किसी पर भरोसा करना महंगा पड़ सकता है। पुलिस ने इन सभी मामलों में प्राथमिकी दर्ज कर ली है और सख्त कार्रवाई का भरोसा दिया है।पुलिस प्रशासन ने इन मामलों को गंभीरता से लिया है और जनता के लिए कुछ महत्वपूर्ण दिशा-निर्देश जारी किए हैं:

  • गोपनीयता: किसी भी अनजान व्यक्ति के साथ अपनी व्यक्तिगत जानकारी, परिवार की स्थिति या वित्तीय विवरण साझा न करें।
  • सत्यापन: सरकारी नौकरी या बड़े प्रोजेक्ट्स के दावों की पुष्टि हमेशा संबंधित आधिकारिक वेबसाइट या कार्यालय जाकर करें। सोशल मीडिया पर किसी की रसूखदार लोगों के साथ फोटो देखकर प्रभावित न हों।
  • डिजिटल सतर्कता: किसी भी अज्ञात व्यक्ति के कहने पर पैसे ट्रांसफर न करें। यदि कोई संदिग्ध व्यक्ति फोन करता है, तो तुरंत निकटतम साइबर सेल या थाने को सूचित करें।
  • कानूनी सतर्कता: याद रखें, जेल से किसी को छुड़ाने या सरकारी प्रक्रिया में हेरफेर करने के नाम पर पैसे की मांग करना स्वयं भी एक अपराध है।

आम जनता से अपील है कि वे किसी भी तरह के प्रलोभन में न आएं और संदिग्ध गतिविधियों की सूचना तुरंत अपने नजदीकी थाने को दें।

ये घटनाएं चेतावनी हैं कि डिजिटल युग में ‘सावधानी ही बचाव है’। महराजगंज और बस्ती की पुलिस इन सभी मामलों में प्राथमिकी दर्ज कर गहन जांच कर रही है और आरोपियों के बैंक खातों की ट्रैकिंग की जा रही है। उम्मीद है कि पुलिस की सख्त कार्रवाई से इन ठगों के हौसले पस्त होंगे।

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