उत्तर प्रदेशबस्तीलखनऊ

बस्ती: पीडब्ल्यूडी के प्रशासनिक अधिकारी पर लगे भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप, सतर्कता विभाग करेगा जांच

बस्ती: पीडब्ल्यूडी के एओ पर भ्रष्टाचार का काला चिट्ठा, विजिलेंस करेगा जांच भ्रष्टाचार पर प्रहार: 27 वर्षों से जमे एओ प्रेमचंद की अब खैर नहीं

अजीत मिश्रा (खोजी)

बस्ती में भ्रष्टाचार का ‘अक्षयवट’: क्या कार्रवाई तक ही सीमित रहेगा न्याय?

  • पीडब्ल्यूडी में सेटिंग-गेटिंग का खेल: 65 लाख की अवैध कमाई के आरोपी एओ के खिलाफ जांच के आदेश
  • बस्ती पीडब्ल्यूडी: करोड़ों के ठेकों में भ्रष्टाचार की परतें उतरीं, सतर्कता विभाग संभालेगा मोर्चा
  • मंत्री और विधायक की शिकायत पर हरकत में शासन: एओ प्रेमचंद के कारनामों की होगी विजिलेंस जांच

​बस्ती के पीडब्ल्यूडी (PWD) महकमे में भ्रष्टाचार की जड़ें कितनी गहरी हैं, इसकी बानगी प्रशासनिक अधिकारी प्रेमचंद की करतूतों से मिलती है। 27 वर्षों तक एक ही जिले में जमे रहकर ‘भ्रष्टाचार का रिकॉर्ड’ तोड़ने का दावा कोई मामूली बात नहीं है। यह सीधे तौर पर प्रशासनिक तंत्र की उस मिलीभगत की ओर इशारा करता है, जिसने एक व्यक्ति को जिले में ‘अजेय’ बना दिया था।बस्ती जिले के पीडब्ल्यूडी (PWD) अधीक्षण अभियंता वृत्त कार्यालय में तैनात प्रशासनिक अधिकारी (एओ) प्रेमचंद एक बार फिर विवादों के घेरे में आ गए हैं। उन पर जिले में 27 वर्षों तक तैनात रहने के दौरान भ्रष्टाचार के नए कीर्तिमान स्थापित करने का आरोप लगा है।

आरोपों का विवरण:

इस मामले को लेकर सामने आए प्रमुख आरोप निम्नलिखित हैं:

  • सेटिंग-गेटिंग और ठेकेदारी: आरोप है कि प्रेमचंद ने अपने पद का दुरुपयोग करते हुए ‘सेटिंग-गेटिंग’ के माध्यम से अपने चहेतों को करोड़ों रुपये के ठेके दिलाए हैं।
  • अवैध धन उगाही: उन्होंने अपने चहेतों को ठेके दिलाने के एवज में भारी रकम कमाई है।
  • पत्नी के फर्म का दुरुपयोग: यह आरोप भी है कि उन्होंने अपनी पत्नी के नाम पर संचालित फर्म के माध्यम से किस्तों में 65 लाख रुपये की बड़ी रकम अवैध रूप से प्राप्त की है।

​आरोप गंभीर हैं—सेटिंग-गेटिंग के जरिए चहेतों को करोड़ों के ठेके दिलाना और अपनी पत्नी के नाम पर संचालित फर्म के माध्यम से 65 लाख रुपये की अवैध कमाई करना। यह केवल धन उगाही नहीं, बल्कि जनता के उस टैक्स के पैसे का खुला अपमान है, जो विकास के नाम पर वसूला जाता है।

​अब जब अपना दल (एस) के प्रदेश सचिव संजय सिंह पगार, मंत्री आशीष पटेल और विधायक अजय सिंह ने इस मामले को शासन तक पहुंचाया है, तो सतर्कता विभाग द्वारा जांच के निर्देश दिए गए हैं। लेकिन सवाल यह है कि 27 सालों तक इस ‘अक्षयवट’ की जड़ें किसने सींचीं? क्या जांच केवल कागजी खानापूर्ति बनकर रह जाएगी, या ‘गिरहबान बचाने के हथकंडे’ अपना रहे भ्रष्टाचारियों पर वाकई नकेल कसी जाएगी?भ्रष्टाचार के इन गंभीर मामलों की शिकायत अपना दल (एस) के प्रदेश सचिव संजय सिंह पगार ने की है। इस शिकायत को मंत्री आशीष पटेल और विधायक अजय सिंह ने भी समर्थन दिया है।

मामले की गंभीरता को देखते हुए शासन ने त्वरित कदम उठाए हैं:

  • जांच के आदेश: शासन के अनु सचिव अभिषेक गंगवार ने प्रमुख अभियंता (पीडब्ल्यूडी) को पत्र लिखकर इस पूरे प्रकरण की जांच सतर्कता विभाग (विजिलेंस) से कराने के निर्देश दिए हैं।
  • आरोपी की सक्रियता: खबरों के अनुसार, शिकायत दर्ज होने और जांच के आदेश मिलने के बाद, आरोपी एओ प्रेमचंद अपनी बचाव की कोशिशों में जुट गए हैं और कथित तौर पर संबंधित लोगों से मिलकर अपना पक्ष बचाने के हथकंडे अपना रहे हैं।

बस्ती की जनता अब केवल जांच का आदेश नहीं, बल्कि दोषियों के खिलाफ कठोर दंडात्मक कार्रवाई और वसूली की उम्मीद कर रही है। जब तक भ्रष्ट अधिकारियों को संरक्षण देने वाली व्यवस्था नहीं बदलेगी, तब तक ऐसे ‘प्रेमचंद’ हर विभाग में अपनी जड़ें जमाते रहेंगे।

अब देखना यह है कि सतर्कता विभाग की जांच में इन आरोपों की पुष्टि होने के बाद प्रशासन क्या ठोस कार्रवाई करता है।

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