
“सिद्धार्थनगर: बिजली विभाग की ‘मुर्दा शांति’, सड़क पर बिछा है मौत का जाल”
"बांसी मुख्य मार्ग पर हादसों का 'ओपन इन्विटेशन', क्या बिजली विभाग किसी बड़ी अनहोनी का इंतज़ार कर रहा है?"
अजीत मिश्रा (खोजी)
।। सिद्धार्थनगर: क्या बड़े हादसे का इंतज़ार कर रहा है बिजली विभाग? सड़क पर मौत का ‘जाल’ बिछाए बैठे जिम्मेदार।।
बस्ती मंडल, उत्तर प्रदेश।
सिद्धार्थनगर।। क्या सिद्धार्थनगर का बिजली विभाग किसी अनहोनी या जानलेवा हादसे का इंतज़ार कर रहा है? शायद हाँ। बांसी रोडवेज मुख्य मार्ग जैसे अति व्यस्त इलाके में पुलिस बूथ के ठीक पास बिजली के तारों का सड़क पर बेतरतीब पड़े होना न केवल विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाता है, बल्कि यह सीधे तौर पर आम नागरिकों की जान से खिलवाड़ है।
📢लापरवाही की इंतहा
बीते कई दिनों से बिजली के तार सड़क पर लावारिस हालत में पड़े हैं, लेकिन बिजली विभाग के अधिकारियों के कानों पर जूं तक नहीं रेंग रही है। यह मार्ग बांसी का मुख्य प्रवेश द्वार और सबसे व्यस्त रास्तों में से एक है। यहाँ दिन-रात हज़ारों वाहनों और राहगीरों का आवागमन होता है। सड़क पर पड़ा यह ‘बिजली का जाल’ न केवल यातायात को बाधित कर रहा है, बल्कि कभी भी किसी बड़े विद्युत हादसे का सबब बन सकता है।
📢हादसे को न्योता देता ‘मौत का तार’
स्थानीय लोगों और दुकानदारों में भारी आक्रोश है। राहगीरों का कहना है कि बिजली के तार सड़क पर होने के कारण आए दिन लोग फिसलकर गिर रहे हैं। यदि कोई वाहन इनके ऊपर से गुजर जाए या कोई अनजाने में इन्हें छू ले, तो परिणाम कितना भयावह हो सकता है, इसका अंदाजा लगाना भी मुश्किल है। सवाल यह है कि यदि विभाग को अपनी जिम्मेदारी का अहसास नहीं है, तो फिर इस लापरवाही का खामियाजा आम जनता क्यों भुगते?
📢सवाल वही—जिम्मेदार कौन?
क्या बिजली विभाग की जवाबदेही सिर्फ बिल वसूलने तक सीमित है? जब विभाग का अमला आए दिन बिजली चोरी पकड़ने और कनेक्शन काटने के लिए सक्रिय दिखता है, तो फिर जानलेवा तारों को हटाने के लिए उनके पास समय क्यों नहीं है?
📢बांसी की जनता अब प्रशासन और बिजली विभाग के आला अधिकारियों से सवाल पूछ रही है:
👉क्या किसी बड़े हादसे के बाद ही विभाग की नींद खुलेगी?
👉पुलिस बूथ के पास होने के बावजूद इन तारों को क्यों नहीं हटाया जा रहा?
👉शहर की सुरक्षा और व्यवस्था के लिए आखिर कौन सा विभाग जिम्मेदारी लेगा?
अगर समय रहते इन तारों को दुरुस्त नहीं किया गया, तो आने वाले समय में होने वाली किसी भी दुर्घटना का सीधा दोष विभाग की उदासीनता पर मढ़ा जाएगा। प्रशासन को चाहिए कि वह बिना देर किए इन तारों को हटवाए और लापरवाही बरतने वाले जिम्मेदार कर्मचारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करे।












