बभनान: पत्रकारों पर साथी को ‘मरवाने’ और दबाव बनाकर ‘समझौता’ कराने का आरोप

अजीत मिश्रा (खोजी)
बभनान में पत्रकारों की भूमिका पर उठे सवाल, साथी को ‘मरवाने’ और ‘समझौता कराने’ के गंभीर आरोप
- बभनान प्रकरण: ‘बाबू साहब’ पत्रकारों की भूमिका पर सवाल, निंदा प्रस्ताव की उठी मांग
- डरपोक पत्रकारिता पर तंज: ‘भ्रष्टाचारियों के खिलाफ लड़ने की हिम्मत नहीं, तो छोड़ दें पेशा’
बस्ती: बभनान क्षेत्र के पत्रकारों की कार्यशैली एक बार फिर विवादों के घेरे में है। हाल ही में सामने आए एक मामले ने स्थानीय पत्रकारिता जगत में हड़कंप मचा दिया है, जहाँ दो पत्रकारों पर अपने ही एक साथी को मरवाने और बाद में दबाव डालकर समझौता कराने के गंभीर आरोप लगे हैं।
क्या है पूरा मामला?
रिपोर्ट के अनुसार, बभनान के दो तथाकथित ‘बाबू साहब’ पत्रकारों पर आरोप है कि उन्होंने कथित तौर पर चेयरमैन की मेहरबानी पाने के लिए अपने ही साथी पत्रकार को प्रताड़ित करने और मरवाने में भूमिका निभाई। आरोप है कि पीड़ित पत्रकार पर समझौता करने का दबाव बनाया गया और उसे डराया गया कि यदि वह नहीं माना, तो उसे धारा 376 जैसे गंभीर मामलों में फंसा दिया जाएगा।
- आरोप: बभनान के दो पत्रकारों पर आरोप लगाया गया है कि उन्होंने अपने ही एक साथी को ‘मरवाने’ में भूमिका निभाई और फिर दबाव बनाकर ‘समझौता’ भी करवाया।
- समझौते का दबाव: सूत्रों के अनुसार, इन पत्रकारों ने पीड़ित पत्रकार को डराया कि यदि वह समझौता नहीं करेगा, तो उसे धारा 376 (बलात्कार) के मामले में फंसा दिया जाएगा।
- स्वार्थ की पत्रकारिता: इन पत्रकारों की ‘दुकान’ चेयरमैन की मेहरबानी से चलती है, इसलिए वे अपराधियों के खिलाफ आवाज उठाने के बजाय उनके साथ खड़े नजर आते हैं।
- आवाहन: पत्रकारों से अपील है कि वे ऐसे पत्रकारों का बहिष्कार करें और चेयरमैन के खिलाफ निंदा प्रस्ताव पारित करें।
- पत्रकारिता पर सलाह: यदि कोई पत्रकार भ्रष्टाचार के खिलाफ लड़ने से डरता है, तो उसे पत्रकारिता छोड़ देनी चाहिए। लेखक ने संयम रखने और सही समय आने पर जवाब देने की वकालत की है।
स्वार्थ और पत्रकारिता का गठजोड़
इन पत्रकारों की ‘दुकान’ स्थानीय चेयरमैन की कृपा पर चल रही है। यही कारण है कि ये पत्रकार अपराधियों के खिलाफ आवाज उठाने के बजाय, पीड़ित को ही प्रताड़ित करने में जुट गए। लेख के अनुसार, ये पत्रकार समझौते का दबाव बनाने के लिए मिठाई का डिब्बा लेकर पीड़ित के घर तक पहुँच गए थे।
पत्रकार संगठनों से कार्रवाई की मांग
इस घटना के बाद अब अन्य पत्रकारों और संगठनों से सख्त रुख अपनाने की मांग की जा रही है:
- स्थानीय पत्रकारों से अपील की गई है कि वे ऐसे आचरण वाले पत्रकारों का पूरी तरह बहिष्कार करें।
- चेयरमैन के खिलाफ निंदा प्रस्ताव पारित करने और उनके भ्रष्टाचार के विरुद्ध अभियान चलाने की बात कही गई है।
- लेखक ने स्पष्ट शब्दों में कहा है कि यदि कोई पत्रकार भ्रष्टाचार या भ्रष्टाचारियों के खिलाफ लड़ने में डर महसूस करता है, तो उसे पत्रकारिता छोड़ देनी चाहिए।
पत्रकारों के लिए नसीहत
सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देने के बजाय संयम बरतें और सही समय का इंतजार करें। धैर्य रखकर ही बड़े विवादों का सम्मानजनक और प्रभावी जवाब दिया जा सकता है।
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