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छात्र आंदोलन, झांसी में 10 मासूमों की मौत… उपचुनाव से पहले कुंद पड़ेगा CM योगी का ‘बंटोगो तो कटोगो’ का नारा?

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छात्रों के आंदोलन और झांसी की घटना से सीएम योगी के बंटोगे तो कंटोगे के नारे को लेकर सवाल उठने लगे हैं.

Katoge to Batoge Slogan Political Impact: पहले प्रयागराज में छात्र आंदोलन और अब झांसी मेडिकल कॉलेज में मासूमों की मौत की घटना उप चुनाव से पहले यूपी की राजनीति में नैरेटिव बदल सकता है. इससे सीएम योगी के बटोगे तो कटोगे नारे के धार भी कुंद पड़ सकती है.

उत्तर प्रदेश के सीएम योगी आदित्यनाथ के ‘बंटोगो तो कटोगे’ के नारे की देश ही नहीं दुनिया में धूम है. महाराष्ट्र और झारखंड विधानसभा चुनाव में तो यह नारा केंद्र में बना हुआ है. महाराष्ट्र में सीएम योगी के इस नारे की वजह से सत्ताधारी महायुती के भीतर ही तरकार है. लेकिन, ऐसा लगता है कि खुद उत्तर प्रदेश में सीएम योगी के इस नारे पर सवाल उठने वाले हैं. दरअसल, महाराष्ट्र और झारखंड में 20 नवंबर को होने वाले मतदान के साथ उत्तर प्रदेश की नौ विधानसभा सीटों पर भी वोटिंग होगी. उत्तर प्रदेश में लोकसभा चुनाव में भाजपा के खराब प्रदर्शन के बाद इस चुनाव को काफी अहम माना जा रहा है.

लोकसभा चुनाव के बाद मीडिया में ऐसी खूब खबरें आ रही थीं कि पार्टी के भीतर भी यूपी सीएम के नेतृत्व पर सवाल उठने लगे थे. कहा जा रहा था कि राज्य के डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य ने लोकसभा चुनाव में पार्टी के खराब प्रदर्शन को लेकर सीधे सीएम के खिलाफ मोर्चा खोल दिया था. लेकिन, पार्टी नेतृत्व ने इस बवंडर को थाम दिया और कहा गया कि सभी को उपचुनाव पर फोकस करना है.

उपचुनाव काफी अहम
भाजपा को करीब से समझने वाले राजनीतिक पंडितों का मानना है कि पार्टी के लिए ये उपचुनाव काफी अहम है. इसके लिए पार्टी ने जोरदारी तैयारी भी की है. राज्य सरकार के कई मंत्रियों को महीनों पहले से एक-एक विधानसभा में भेजा गया है. भाजपा इन उपचुनावों को इसलिए इतना महत्व दे रही है ताकि यह संदेश दिया जा सके कि बीते लोकसभा में विपक्षी इंडिया गठबंधन की जीत एक तुक्का थी. उसका जमीन पर कोई आधार नहीं है. वहीं अगर इन उपचुनावों में भाजपा का प्रदर्शन अपेक्षाकृत खराब रहता है तो पार्टी के भीतर और सवाल उठेंगे. ऐसे में पार्टी खासकर यूपी के सीएम योगी आदित्यनाथ के लिए इस उपचुनाव में जीत हासिल करना बहुत जरूरी है. इससे वह पार्टी के भीतर और ताकतवर होंगे. साथ ही विपक्षी की जीत को एक तुक्का साबित किया जा सकता है.

‘बंटोगे तो कटोगे’
बीते हरियाणा विधानसभा चुनाव में सीएम योगी ने ‘बंटोगे तो कटोगे’ का नारा देकर राष्ट्रीय स्तर पर अपने पक्ष में नैरेटिव कर लिया. दरअसल, भाजपा बहुसंख्यकवाद की राजनीति करती है. हरियाणा में वह वहां की सबसे मजबूत जाति जाट समुदाय के खिलाफ ओबीसी जातियों को इस नारे के सहारे गोलबंद कर लिया. इसके साथ ही इस नारे में हिंदू समुदाय को भी एकजुट रहने का संदेश छिपा हुआ है. जनमानस पर सीएम योगी के इस नारे का खूब प्रभाव देखा जा रहा है.

मगर बढ़ गई चुनौती
मगर उप चुनाव से ठीक पहले बीते कुछ दिनों से यूपी के प्रयागराज में छात्रों का आंदोलन और अब झांसी मेडिकल कॉलेज में अग्निकांड में 10 मासूमों की मौत ने राज्य की राजनीति का नैरेटिव अचानक से बदल दिया है. छात्रों आरओ और एआरओ की परीक्षा को दो पारी में कराने और मार्क्स नॉर्मलाइजेशन का विरोध कर रहे थे. इसको लेकर उनका पांच दिनों से आंदोलन चल रहा है. इस आंदोलन में छात्रों की भीड़ ने एक बार फिर बेरोजगारी को चर्चा के केंद्र में ला दिया. हालांकि उत्तर प्रदेश लोकसेवा आयोग ने छात्रों की कई मांगे मान ली. लेकिन, इसने राज्य में चुनाव से पहले नैरेटिव चेंज कर दिया. फिर मतदान से महज चार दिन पहले झांसी की घटना से राज्य के सरकारी स्वास्थ्य व्यवस्था की चर्चा अब केंद्र में आ गई है. विपक्ष इसको लेकर आक्रामक रुख अपना रहा है. ऐसे में सरकार को इन मुद्दों पर बात करनी होगी और बात करने पर सीएम योगी का नारा ‘बंटोगे तो कटोगे’ का प्रभाव कूंद पड़ेगा

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