
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नई दिल्ली में आयोजित ग्रामीण भारत महोत्सव में शिल्पगुरु इकराम हुसैन के पीतल के कलश पर उकेरी गई मां हीराबेन का चित्र देखकर सराहना की। इकराम हुसैन ने प्रधानमंत्री से पांच मिनट तक बातचीत की और उनके हुनर की तारीफ करने पर उत्साहित हुए। शिल्पगुरु ने बताया कि वह आठ साल की उम्र से कारीगरी कर रहे हैं।
नई दिल्ली के भारत मंडपम में पीएम मोदी मुरादाबाद के इकराम हुसैन की नक्काशी को देखते हुए – फोटो : संवाद
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी नई दिल्ली के भारत मंडपम में आयोजित ग्रामीण भारत महोत्सव में पीतल के कलश पर उकेरी गई अपनी मां हीराबेन का चित्र देखकर आश्चर्यचकित हो गए। उन्होंने चित्र उकेरने वाले शिल्पगुरु इकराम हुसैन से पांच मिनट तक बातचीत की। उनके हुनर की सराहना करते हुए पीठ थपथपाई।
प्रधानमंत्री से मिली शाबासी से शिल्पगुरु और उनके परिजन बेहद उत्साहित हैं। पीरजादा रोजेवाली जियारत चौक के रहने वाले इकराम हुसैन ने बताया कि दो जनवरी को नई दिल्ली में ग्रामीण भारत महोत्सव में भाग लेने गए थे। वहां हस्तशिल्प की 180 दुकानें लगी थीं। चार जनवरी की सुबह 11 बजे वह अपने भाई मो. इस्लाम के साथ कलश पर कारीगरी का डेमो दे रहे थे।तभी प्रधानमंत्री मोदी उनके स्टाॅल पर आ गए। शिल्पगुरु द्वारा कलश पर राम दरबार, रामलला के चित्र के अलावा पीएम के साथ उनकी मां हीराबेन का चित्र उकेरा जा रहा था। पीएम अपनी मां का चित्र देखकर बहुत खुश हुए।
उन्होंने इकराम से पूछा कि कितने समय से इस पर नक्काशी कर रहे हैं तो शिल्पगुरु ने बताया कि तीन साल से बना रहे हैं और जल्द ही यह पूरी तरह से तैयार हो जाएगा। प्रधानमंत्री ने मटकों की बिक्री को लेकर पूछा तो शिल्पगुरु ने कहा कि ऑर्डर पर सामान बनाते हैं। यह भी बताया कि वह आठ साल की उम्र से ही कारीगरी कर रहे हैं। अंत में प्रधानमंत्री उनकी पीठ थपथपाकर चले गए।
हस्तशिल्प को समर्पित, नहीं की शादी
हस्तशिल्प गुरु इकराम हुसैन ने बताया कि उन्होंने अपने पिता हाजी अब्दुल हमीद से कारीगरी का हुनर सीखा। आठ साल की उम्र से ही इस काम को सीखना शुरू कर दिया था। हस्तशिल्प कला से इतना लगाव हुआ कि उन्होंने शादी नहीं की। अब उनकी उम्र 61 साल हो चुकी है। उन्होंने कहा कि पीएम मोदी और उनकी मां के चित्र वाला कलश बनने के बाद वह पीएम को गिफ्ट करेंगे।
28 नवंबर 2022 को उनको नेशनल अवाॅर्ड मिला था। उन्हें केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल ने पुरस्कार दिया था। एक लाख रुपये के साथ ताम्रपत्र मिला था। इसके पहले वह प्रदेश सरकार की तरफ से डॉ. भीमराव आंबेडकर अवाॅर्ड, डॉ. राम मनोहर लोहिया अवाॅर्ड, 2013 में नेशनल अवाॅर्ड द्वितीय मिला था।
इकराम हुसैन के भाई अबरार हुसैन को भी 2013 में डॉ. राम मनोहर लोहिया अवाॅर्ड मिला था। उनकी बहनें सईदा और राशिदा को हस्तशिल्प में प्रदेश सरकार से अवाॅर्ड मिल चुके हैं।












