

सहारनपुर: दलित बच्चे के बदलने का विवाद, रसूखदार डॉक्टर हिमांशु शर्मा के खिलाफ न्याय की राह मुश्किल
“सहारनपुर में दलित बच्चे के बदलने का विवाद: रसूखदार चिकित्सक हिमांशु शर्मा के खिलाफ न्याय की उम्मीद थमी”
“केयर हॉस्पिटल विवाद: रसूख के आगे दब गई पुलिस और स्वास्थ्य विभाग, अनुज परिवार को न्याय की आस”
“सहारनपुर में बच्चे के बदलने का सनसनीखेज मामला: रसूखदार डॉक्टर हिमांशु शर्मा पर नहीं कोई असर”
सहारनपुर में एक दलित गरीब परिवार के बच्चे के बदलने के आरोप ने पूरे शहर में हड़कंप मचा दिया है। विवाद का केंद्र डॉ. हिमांशु शर्मा हैं, जिन्हें स्थानीय लोग एक रसूखदार और प्रभावशाली चिकित्सक मानते हैं। घटना के अनुसार, गत 11 सितंबर को पीड़ित अनुज के परिवार ने केयर हॉस्पिटल में बच्चे के बदलने का आरोप लगाते हुए पुलिस को तहरीर दी। घटना सीसीटीवी कैमरे में कैद हो गई थी, जिससे पुलिस के पास स्पष्ट सबूत मौजूद थे।
अनुज के परिवार की तहरीर पर थाना गंगोह में अपराध संख्या-227/25 दर्ज की गई, जिसमें गंभीर धाराएं शामिल थीं। हालांकि, चर्चाओं के अनुसार, पुलिस ने उसी रात डॉ. हिमांशु शर्मा को थाने बुलाकर पूछताछ की, लेकिन उनके रसूख और दबाव के चलते बिना किसी कानूनी कार्रवाई के उन्हें थाने से छोड़ दिया गया। इस कदम ने पीड़ित परिवार और शहरवासियों में नाराजगी और असंतोष बढ़ा दिया।
घटना के दौरान अस्पताल के बाउंसरों द्वारा अनुज के परिवार के साथ मारपीट और जातिसूचक शब्दों का प्रयोग करने की भी खबरें सामने आईं। मौके पर सीओ सिटी द्वितीय मनोज कुमार यादव पहुंचे और स्थिति को नियंत्रित किया। बावजूद इसके, पांच दिन बीत जाने के बाद भी पुलिस जांच में कोई ठोस प्रगति नहीं हुई। स्वास्थ्य विभाग ने भी मामले में निष्क्रियता दिखाई, जिससे यह संदेश गया कि रसूख के आगे प्रशासन अपनी कुम्भकर्णी नींद से जाग नहीं पाया।
इस विवाद में अब नया मोड़ आया है। जिस महिला ने हॉस्पिटल में डिलीवरी की थी, उसने अपने वीडियो बयान में साफ कहा कि बच्चे की लिंग लड़की है, न कि लड़का। उनके अनुसार, उनका परिवार गलतफहमी का शिकार हुआ। यह बयान पीड़ित परिवार के लिए न्याय की मांग को और मजबूत करता है और अस्पताल की प्रक्रियाओं पर भी सवाल खड़े करता है।
सूत्रों के अनुसार, विवाद में डॉ. हिमांशु शर्मा और स्वास्थ्य विभाग के बीच गुप्त गठजोड़ की चर्चाएं आम हैं। इसके अलावा, अस्पताल और ब्लड बैंक को लेकर उनके नाम अक्सर सुर्खियों में आते रहते हैं। इस पूरे प्रकरण ने शहर में स्वास्थ्य व्यवस्था, न्याय और रसूख के बीच संबंधों पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
विशेषज्ञ और स्थानीय लोग मानते हैं कि डॉ. हिमांशु शर्मा ने अपने रसूख के चलते सहारनपुर में अपनी अलग पहचान बनाई है। हालांकि, अनुज और उसके परिवार को न्याय मिल पाएगा या नहीं, यह अभी अनिश्चित है। इस प्रकरण ने शहरवासियों में प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग की निष्क्रियता को लेकर चिंता और नाराजगी पैदा कर दी है।
यह मामला न केवल बच्चों की सुरक्षा, बल्कि समाज में न्याय और समानता के महत्व को भी उजागर करता है। पीड़ित परिवार अब न्याय की आस लगाए बैठा है, जबकि शहर में लोग पुलिस और स्वास्थ्य विभाग की निष्क्रियता को लेकर सवाल उठा रहे हैं।
रिपोर्ट: एलिक सिंह
संपादक – समृद्ध भारत समाचार पत्र एवं वंदे भारत लाइव टीवी न्यूज़
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