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खनन माफियाओं पर शिकंजा कसने की मांग तेज़ — सोनभद्र में मनमाने खनन की शिकायत पर लखनऊ से जांच टीम रवाना, लेकिन टीम पहुंचने से पहले ही खदानों में छाया सन्नाटा

खनन माफियाओं पर शिकंजा कसने की मांग तेज़ — सोनभद्र में मनमाने खनन की शिकायत पर लखनऊ से जांच टीम रवाना, लेकिन टीम पहुंचने से पहले ही खदानों में छाया सन्नाटा

सोनभद्र 
संवाददाता – राकेश कुमार कन्नौजिया की रिपोर्ट

सोनभद्र  जनपद में मनमाने खनन और नियमों के खुले उल्लंघन की शिकायत को लेकर कांग्रेस प्रतिनिधिमंडल ने लखनऊ स्थित खनन निदेशालय में निदेशक माला श्रीवास्तव को एक विस्तृत शिकायती पत्र सौंपा। शिकायती पत्र मिलते ही खनन निदेशालय ने तुरंत जांच टीम जिले के लिए रवाना कर दी, जिसके बाद प्रशासनिक हलचल तेज़ हो गई।

लेकिन हैरानी की बात यह रही कि टीम के सोनभद्र पहुंचने से पहले ही खनन क्षेत्र में सन्नाटा पसर गया। जिन स्थानों पर दिन-रात खनन कार्य चलता था, वहां अचानक जेसीबी, टीपर और अन्य भारी उपकरण गायब मिले, खदानों के गेट बंद कर दिए गए और पूरे क्षेत्र में ‘घोर खामोशी’ का माहौल छा गया।

सूत्रों के अनुसार, कांग्रेस प्रतिनिधियों ने अपनी शिकायत में ओबरा तहसील के कुछ पट्टाधारकों पर नियमों का उल्लंघन कर मानक से अधिक खनन करने का आरोप लगाया था। शिकायत मिलते ही कार्रवाई के आदेश तो जारी कर दिए गए, लेकिन जांच टीम के आगमन की खबर खदान संचालकों को पहले से कैसे और किसके माध्यम से मिल गई, यह अब तक एक बड़ी पहेली बनी हुई है।

जिले के दिल्ली मारकुंडी खनन क्षेत्र के कई खदानों—जैसे राधे राधे इंटरप्राइजेज, महादेव इंटरप्राइजेज समेत अन्य—का मिज़ाज पूरी तरह बदल गया। जिन स्थानों पर खनन गतिविधियां जोरों पर थीं, वहां अब सन्नाटा और बंद गेट दिखाई दे रहे हैं।

स्थानीय ग्रामीणों और युवाओं ने इसे “पुराना खेल” बताया—सूचना मिलते ही ट्रकों और मशीनों को छिपा देना, और टीम को दिखावे के लिए तैयार माहौल दिखाना। लोगों का आरोप है कि खनन कारोबारियों और विभागीय कर्मचारियों की मिलीभगत से असली जांच हर बार ठंडे बस्ते में चली जाती है।

जनता और सामाजिक कार्यकर्ताओं की मांग है कि इस बार जांच सिर्फ औपचारिकता न बनकर वास्तविक कार्रवाई का रूप ले। लोगों का कहना है कि जब शिकायत लखनऊ तक पहुंच सकती है और टीम भेजी जा सकती है, तो जांच की वास्तविक प्रभावशीलता पर प्रश्न उठना प्रशासन की साख पर धब्बा है।

अब निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि जांच टीम क्या सच उजागर करेगी—या फिर यह मामला भी अन्य शिकायतों की तरह कागज़ों में दबकर रह जाएगा। जनता चाहती है कि प्रशासन पारदर्शिता और जवाबदेही दिखाए, क्योंकि जब तक कागज़ों पर लिखा ‘ज़ीरो टॉलरेंस’ ज़मीन पर लागू नहीं होगा, तब तक खनन माफियाओं की यह मिलीभगत जारी रहेगी।

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