
।। राजस्व_विभाग अब जनता की सेवा का नहीं, लूट का सबसे बड़ा अड्डा बन चुका है।।
उत्तर प्रदेश
गाँव से लेकर शहर तक हर भूमि से जुड़ा काम – नामांतरण, खतौनी, सीमांकन, विरासत, नक्शा, रजिस्ट्रेशन – हर जगह भ्रष्टाचार जड़ें जमा चुका है।
⭐ लेखपाल से लेकर कानूनगो, राजस्व निरीक्षक, नायब तहसीलदार, तहसीलदार और SDM तक, हर स्तर पर “रेट लिस्ट” तय है।
किसी को रिपोर्ट जल्दी चाहिए तो दरवाजे के बाहर लाइन नहीं, टेबल के नीचे लिफाफा देना पड़ता है। आम किसान अपनी जमीन का हक पाने के लिए महीनों चक्कर लगाता है, जबकि पैसे वाले एक फ़ोन पर काम करवा लेते हैं। ऊपर तक हिस्सेदारी तय है , इसलिए कोई अफसर एक-दूसरे पर कार्रवाई नहीं करता।
⭐ RTI डालो तो जवाब अधूरा, शिकायत करो तो फाइल गायब और मीडिया में आवाज उठाओ तो “जांच जारी है” का ढोंग शुरू।
⭐ यह व्यवस्था नहीं, संगठित डकैती है — जहाँ जनता के हक की जमीन और मेहनत दोनों बिकती हैं।
अगर सरकार वाकई ईमानदार है, तो तहसीलों में लाइव CCTV और पब्लिक पोर्टल से हर एंट्री ऑनलाइन कराए — तभी यह राजस्व विभाग फिर से “जनसेवा विभाग” कहलाएगा।



















