

🚨🔥 सहारनपुर एसडीए में बड़ा खेल! जोन-12 के जेई शोएब आलम और जोन-2 के जेई आशीष सक्सेना पर अवैध कॉलोनी माफियाओं से गहरी सांठगांठ के आरोप — हाजी शराफत की अवैध कॉलोनी में फिर छुपकर रात-रात भर निर्माण, सरकारी राजस्व को लाखों का नुकसान, सिस्टम में “सेटिंग” और “सुरक्षण” का आरोप — “कार्रवाई करो, नहीं तो सबूत सार्वजनिक करेंगे” 🔥🚨 सहारनपुर विकास प्राधिकरण (एसडीए) एक बार फिर गहरे भ्रष्टाचार और अवैध निर्माण के गंभीर आरोपों में फंसता दिख रहा है, जहां जोन-12 में तैनात अवर अभियंता (JE) शोएब आलम और जोन-2 के JE आशीष सक्सेना का नाम इस पूरे खेल के कथित मास्टरमाइंड के रूप में तेजी से उभरकर सामने आया है; आरोप है कि दोनों अधिकारियों ने बिल्डर-माफिया और भूमाफिया से मिलकर न सिर्फ अवैध कॉलोनियों को खुली छूट दी है, बल्कि एसडीए के कानून और मास्टर प्लान को उनकी टेबल पर रखे किसी “पुराने कागज़” की तरह रौंद दिया है। मामला खानआलमपुरा क्षेत्र का है, जहां शाहजहानी मस्जिद के पास हाजी शराफत ने करीब तीन बीघा भूमि पर अवैध कॉलोनी काटी थी; इस पर पूर्व में कड़ी कार्रवाई हुई, बुलडोजर चला, चेतावनी दी गई, कोर्ट-कायदे का हवाला देकर साफ कहा गया कि बिना नक्शा पास कराए एक ईंट भी नहीं लगेगी — लेकिन जैसे ही जेई शोएब आलम ने जोन-12 की कुर्सी संभाली, उसी अवैध कॉलोनी में फिर रात-रात भर निर्माण शुरू हो गया, जहाँ ट्रक, मशीनें, मजदूर, फाउंडेशन, RCC डालना और दीवारें खड़ी करने का काम बिना किसी डर-भय के होता देखा गया, मानो पूरा कानून ही ठेके पर दे दिया गया हो। सूत्रों का दावा है कि “मैदान में संरक्षण शोएब आलम, फाइल-सिस्टम में सेटिंग जेई आशीष सक्सेना” मॉडल पर यह पूरा नेटवर्क चलता है; जनता का आरोप है कि वैध निर्माण कराने वाला ईमानदार नागरिक महीनों एसडीए के चक्कर काटता रहता है, फ़ाइलें अटकाई जाती हैं, नोटिस चिपकाए जाते हैं, जबकि यहां कथित रुपये लेकर कॉलोनी रात भर में तैयार हो रही है और सुबह एसडीए अधिकारी मौन साधे बैठ जाते हैं। लोग यह भी कह रहे हैं कि आजकल एसडीए में फॉर्मूला साफ है—“पेमेंट दो, प्लॉट बनाओ, नक्शा बाद में देखेंगे; आवाज उठाओ तो डराओ-धमकाओ”; क्षेत्रीय पत्रकारों और समाजसेवियों का आरोप है कि अवैध कार्य पकड़ने पर दबाव बनाया जाता है, वीडियो न बनाने की चेतावनी दी जाती है और “ऊपर से सेटिंग है” कहकर चुप रहने को कहा जाता है। जबकि सच्चाई यह है कि यह कॉलोनी एसडीए में किसी भी प्रकार से पास नहीं है, उस पर 100 मीटर की निर्माण छूट भी लागू नहीं होती, यानी नियम स्पष्ट कहते हैं कि जो भी निर्माण हुआ है, उसे तत्काल ध्वस्त किया जाना चाहिए, लेकिन इसके उलट निर्माण और तेज़ी से बढ़ रहा है और अधिकारियों की चुप्पी यह संकेत देती है कि मामला सिर्फ फील्ड स्तर तक सीमित नहीं, बल्कि बड़े स्तर पर सांठगांठ और सुविधा-शुल्क का खेल है। नागरिकों ने शासन, मंडलायुक्त और डीएम सहारनपुर से मांग की है कि तुरंत दोनों जेई को प्रभाव-से-बाहर कर निलंबित किया जाए, भ्रष्टाचार की उच्च स्तरीय जांच हो, अवैध निर्माण का ड्रोन सर्वे कराकर बुलडोजर कार्रवाई सुनिश्चित की जाए, और अगर प्रशासन ने कार्रवाई में देरी की तो मौजूद वीडियो, व्हाट्सऐप चैट्स, कॉल रिकॉर्डिंग, स्थान प्रमाण फोटो, रात-की-साइट फुटेज और गवाहों के बयान सोशल मीडिया, प्रेस क्लब और शासन-स्तर पर सार्वजनिक कर दिए जाएंगे क्योंकि अब प्रश्न सिर्फ निर्माण का नहीं, बल्कि सिस्टम और आम जनता के विश्वास का है — लोग पूछ रहे हैं: “क्या एसडीए में रिश्वतखोरी और माफियावाद ही असली नीति बन गई है? क्या नियम सिर्फ गरीब और ईमानदार के लिए हैं? और क्या सरकार की जीरो-टॉलरेंस नीति इस भ्रष्ट लॉबी के सामने बौनी साबित हो रही है?” फिलहाल उच्च अधिकारी चुप हैं और यह मौन जनता के संदेह को और मजबूत कर रहा है कि “खेल बहुत बड़ा है और हाथ बहुत ऊपर तक जुड़े हैं।”
✍️ ब्यूरो रिपोर्ट
एलिक सिंह
संपादक/ब्यूरो चीफ — वंदे भारत लाइव टीवी न्यूज़ / दैनिक आशंका बुलेटिन, सहारनपुर
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