
सीधी। नाम पर न जाइए नाम में क्या रखा है काम पर गौर कीजिए। वैसे तो साॅइ एक्सपर्ट टेक्नोलॉजी नाम सुनकर ऐसा लगता है कि यह कोई इलेक्ट्रॉनिक सामान बनाने या फिर बेचने की दुकान होगी, लेकिन वास्तव में ऐसा है नहीं यह एक झोलाछाप फर्म है जिसका असल उद्देश्य शासन को चूना लगाना और टैक्स पेयर्स के गाढी कमाई को लूटना है। जी हां हम सही कह रहे हैं साॅइ एक्सपर्ट टेक्नोलॉजी नाम की यह फर्म वास्तव में कहीं है ही नहीं लेकिन आदिवासी विकासखंड क्षेत्र कुसमी के केवल चार ग्राम पंचायतों में लगभग 38 लाख की सामग्री फर्म ने कागजों में सप्लाई कर दी है। प्राप्त जानकारी के अनुसार साॅइ एक्सपर्ट टेक्नोलॉजी नाम की यह तथा कथित फर्म नम्रता मिश्रा के नाम पर है जिसका पंजीयन 1 जुलाई 2017 को कराया गया है। सूत्रों से हासिल जानकारी के मुताबिक नम्रता मिश्रा के पति का नाम जीवेन्द्र मिश्रा है जो कि इस पूरे फर्जी वाडे के मास्टरमाइंड है और एक फर्जी फर्म चलकर फर्जी वाडे को अंजाम दे रहे हैं और इस फर्जीवाड़े में उनके सहयोगी हैं रामभद्र शुक्ला जो कि वर्तमान समय में ग्राम पंचायत भगवार जनपद पंचायत कुसमी में सचिव के पद पर पदस्थ हैं। सूत्रों की बातों पर यकीन किया जाए तो रामभद्र शुक्ला जीवेन्द्र मिश्रा की मौसी के लड़के हैं इस तरह दोनों भाई-भाई है और दोनों भाई मिलकर एक फर्जी फर्म के जरिए फर्जी वाडे को अंजाम दे रहे हैं। बताया जाता है कि रामभद्र शुक्ला वर्ष 2019-20 में ग्राम पंचायत कोडार में सचिन के पद पर पदस्थ थे तब इन्होंने इस तथा कथित फॉर्म साॅइ एक्सपर्ट टेक्नोलॉजी को ईपीओ क्रमांक 2347 674 दिनांक 23 अप्रैल 2020 को लोहा, सीमेंट रेता और गिट्टी के लिए 75300 रुपए का भुगतान किया गया है लेकिन इस बिल में कहीं भी तारीख का उल्लेख नहीं है कि किस तारीख को यह बिल काटा गया है। इसी तरह बिल क्रमांक 202 दिनांक 18 अक्टूबर 2019 जिसमें गिट्टी, रेता और सीमेंट का का उल्लेख किया गया है। इस बिल पर ईपीओ क्रमांक 2264 747 दिनांक 11 दिसंबर 2019 को 101000 रुपए का भुगतान किया गया है।इसी तरह बिल क्रमांक 201 दिनांक 19 अक्टूबर 2019 में गिट्टी , सीमेंट और लोहा के लिए 198600 का भुगतान आईपीओ क्रमांक 2264 747 दिनांक 11 दिसंबर 2019 को किया गया है। इतना ही नहीं बिल क्रमांक 232 दिनांक 12 जनवरी 2020 को 98000 का भुगतान एपीओ क्रमांक 2347 674 दिनांक 23 अप्रैल 2020पंप सेट, पाइप केवल और अन्य सामग्री के नाम पर हुआ है। उक्त बिल में ₹60000 का भुगतान तो अन्य सामग्री के नाम पर किया गया है लेकिन अन्य सामग्री का कोई उल्लेख नहीं है। उक्त तथाकथित फर्म साॅइ एक्सपर्ट टेक्नोलॉजी के इन सभी बिलों में इनका पता हरिजन थाना के पास अर्जुन नगर सीधी लिखा हुआ है। इससे भी मजेदार बात तो यह है कि इस फर्म के द्वारा जिन सामग्रियों का बिल काटा गया है और भुगतान का आहरण किया गया है उन सामग्रियों के लिए यह फॉर्म रजिस्टर्ड ही नहीं है। हमने जब फार्म के रजिस्ट्रेशन की जानकारी हासिल की तो पता चला कि यह फर्म तो केवल पेंट और वार्निश तथा सीमेंट की बिक्री के लिए रजिस्टर्ड है फिर भी इस फार्म के जरिए लोहा, रेता ,गिट्टी और पंप ,केबल तक के बिल काटे जा रहे हैं।
फर्म की जानकारी के लिए जब हमने भुगतान करता सचिव रामभद्र शुक्ला से उनके मोबाइल पर संपर्क किया तो उन्होंने बताया कि यह दुकान सीधी जिला मुख्यालय के अंधियार खोह में रीवा रोड पर है। गौर तलब है कि रामभद्र शुक्ल द्वारा बताए गए पते पर मारुति ट्रेडर्स है जिसका संचालन साॅइ एक्सपर्ट टेक्नोलॉजी के कर्ताधर्ता जीवेन्द्र मिश्रा के भाई द्वारा किया जाता है। कुछ समय पूर्व इसी मारुति ट्रेडर्स के दो दरवाजा में से एक दरवाजे पर साॅइ एक्सपर्ट टेक्नोलॉजी नाम का बैनर लगाया गया था अब उसे भी हटा लिया गया है। आखिर झोले में चल रही है फर्म का पता भुगतान करता सचिव रामभद्र शुक्ला के अलावा भला और किसी को कैसे हो सकता है। बहरहाल अंधेर गर्दी के आलम में भी जिम्मेदार कहते हैं त्रुटि हो सकती है गड़बड़ी नहीं लेकिन यह कितनी बड़ी गड़बड़ी है इसका पता तो जांच के बाद ही चलेगा।














