उत्तर प्रदेशबस्ती

भ्रष्टाचार पर “जीरो टॉलरेंस” नीति को चुनौती — 557847रुपये की अनियमितता पर अब तक नहीं हुई वसूली

अजीत मिश्रा (खोजी)

।।दो वर्ष से लोकपाल मनरेगा आदेश लंबित, वसूली कार्रवाई ठप।।

🔥 भ्रष्टाचार पर “जीरो टॉलरेंस” नीति को चुनौती — 557847रुपये की अनियमितता पर अब तक नहीं हुई वसूली।

 बस्ती | 29 अक्टूबर 2025 | 

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की “Zero Tolerance Policy on Corruption” के बावजूद, जनपद बस्ती के गौर विकासखंड अंतर्गत ग्राम पंचायत इटबहरा में मनरेगा योजना के तहत हुए “बुद्ध के गड्ढे की खुदाई एवं सफाई कार्य” में ₹5,57,847 की वित्तीय अनियमितता का मामला दो वर्षों से जांच और वसूली प्रक्रिया में अटका हुआ है।

🔹 लोकपाल आदेश पर दो वर्ष से ठप अनुपालन

लोकपाल मनरेगा, जनपद बस्ती ने 10 नवम्बर 2023 को ग्राम प्रधान, ग्राम सचिव और तकनीकी सहायक को दोषी ठहराते हुए समानुपातिक राजस्व वसूली के निर्देश दिए थे।साथ ही खण्ड विकास अधिकारी (गौर) के विरुद्ध प्रशासनिक असहयोग के आधार पर धारा 25 के तहत विधिक कार्रवाई के आदेश भी पारित किए गए थे।

🔹 अपील खारिज, आदेश अब प्रभावी

उत्तरदायियों द्वारा दाखिल अपील को लोकपाल (अपीलीय अधिकारी), ग्राम्य विकास विभाग, लखनऊ ने 06 अगस्त 2025 को विलंबित और निराधार बताते हुए 14 अक्टूबर 2025 को अस्वीकृत कर दिया।

इस निर्णय के बाद लोकपाल मनरेगा बस्ती का आदेश अब अंतिम एवं प्रवर्तनीय (Final & Enforceable) स्थिति में है, किंतु जिला प्रशासन स्तर पर अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई।

🔹 जिलास्तरीय जांच समिति की पुष्टि

*जिलाधिकारी बस्ती द्वारा गठित तीन सदस्यीय जांच समिति ने 22 अगस्त 2025 को अपनी रिपोर्ट में ₹4,26,347 की अनियमितता की पुष्टि की थी*।

इस रिपोर्ट के आधार पर संबंधित ग्राम प्रधान की वित्तीय एवं प्रशासनिक शक्तियाँ निलंबित कर दी गई थीं।

🔹 न्यायालयी कार्यवाही और सीमित स्थगन आदेश

मामला बाद में न्यायालय पहुँचा।

माननीय इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने PIL No.1358/2025 (आदित्य सिंह बनाम उत्तर प्रदेश राज्य एवं अन्य) में टिप्पणी की —“शासन ने कार्रवाई प्रारंभ कर दी है।”इसके पश्चात Writ-C No.31308/2025 में न्यायालय ने केवल 22 अगस्त 2025 की जिलास्तरीय जांच रिपोर्ट की सम्पूर्ण कार्रवाई पर स्थगन आदेश दिया।

हालाँकि, लोकपाल मनरेगा बस्ती के आदेश (10.11.2023) पर कोई न्यायिक रोक प्रभावी नहीं है।

🔹 ग्राम प्रधान को पुनः अधिकार

न्यायालय के सीमित स्थगन आदेश के चलते 17 अक्टूबर 2025 को निलंबित ग्राम प्रधान को पुनः वित्तीय एवं प्रशासनिक अधिकार प्राप्त हो गए।

विशेषज्ञों का कहना है कि यह स्थिति शासन की “जीरो टॉलरेंस” नीति के विपरीत है, क्योंकि लोकपाल आदेश प्रभावी होते हुए भी अनुपालन लंबित है।

🔹 जनहित याचिकाकर्ता की माँगें

जनहित याचिकाकर्ता आदित्य सिंह (ग्राम इटबहरा, गौर, बस्ती) ने जिलाधिकारी को पत्र भेजकर मुख्यमंत्री की नीति के अनुरूप लोकपाल आदेश के तत्काल अनुपालन की माँग की है। उनकी प्रमुख माँगें हैं —

1️⃣ दोषी ग्राम प्रधान, सचिव एवं तकनीकी सहायक से ₹5,57,847 की वसूली।

2️⃣ अनुपालन प्रतिवेदन लोकपाल मनरेगा, बस्ती एवं मनरेगा आयुक्त, लखनऊ को भेजा जाए।

3️⃣ खण्ड विकास अधिकारी (गौर) के विरुद्ध धारा 25 के तहत विधिक कार्रवाई।

4️⃣ ग्राम स्तर पर सामाजिक अंकेक्षण प्रणाली (Social Audit System) को सुदृढ़ किया जाए।

📣 स्थानीय जनभावना

स्थानीय नागरिकों का कहना है कि जब मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ स्वयं भ्रष्टाचार पर “जीरो टॉलरेंस” की नीति पर दृढ़ हैं, तब जिलास्तरीय प्रशासन द्वारा दो वर्षों से लंबित वसूली शासन की जवाबदेही और पारदर्शिता पर प्रश्नचिह्न लगाती है।जनता की अपेक्षा है कि शासन-प्रशासन शीघ्र ही लोकपाल आदेश का पालन कर दोषियों से वसूली सुनिश्चित करे, ताकि जनहित में पारदर्शिता और सुशासन की स्थापना हो सके।

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