

🚨🚨🚨BREAKING | “चर्च सत्ता संग्राम का विस्फोट—फर्जी दावों, ट्रस्ट संपत्तियों की कथित हेराफेरी, वायरल संदेशों से फैला देशव्यापी भ्रम और कोर्ट रिकॉर्ड में सामने आए गंभीर आरोपों ने मचाया भूचाल, कर्नेल मसीह पर भगोड़ा घोषित होने से लेकर आपराधिक मामलों तक बड़े सवालों की आंधी!” 🚨🚨🚨
“चर्च विवाद में बड़ा खुलासा—फर्जी दावों, संपत्ति विवाद और कोर्ट रिकॉर्ड ने बढ़ाई हलचल, कर्नाइल मसीह भगोड़ा से मचा हड़कंप!”
नई दिल्ली/उत्तर प्रदेश/पंजाब/उत्तराखंड। देशभर में चर्च से जुड़ा विवाद अब एक बड़े राष्ट्रीय मुद्दे का रूप लेता जा रहा है, जहां एक ओर सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे संदेशों ने भ्रम की स्थिति पैदा कर दी है, वहीं दूसरी ओर न्यायालय के दस्तावेजों और कानूनी रिकॉर्ड ने इस पूरे मामले को और अधिक गंभीर बना दिया है। चर्च की संपत्तियों, पदों और अधिकारों को लेकर चल रहे इस टकराव में अब कई नाम खुलकर सामने आ रहे हैं, जिससे धार्मिक समुदाय के साथ-साथ प्रशासनिक और कानूनी तंत्र भी सतर्क हो गया है।
सूत्रों के अनुसार, हाल ही में वायरल हुए संदेशों में कुछ व्यक्तियों—जॉनसन टी. जॉन, अनिल डेविड और रॉबिन्सन—पर आरोप लगाया गया कि उन्होंने “एंग्लिकन चर्च ऑफ इंडिया” से जुड़े ट्रस्ट की संपत्तियों को कथित रूप से बेचने का काम किया। इन मामलों में उत्तर प्रदेश के हाथरस में गिरफ्तारी और जेल भेजे जाने की बात भी सामने आई है। इसके अलावा रजनीश मैथ्यू, जॉन अगस्टीन, संतोष सागर, सुनील कुमार (जालंधर), रवि नॉरिस (नई दिल्ली) और अनिल मैसी (दिल्ली) जैसे नामों पर भी चर्च के नाम पर फर्जी संस्थाएं बनाकर संपत्तियों के दुरुपयोग के आरोप लगाए जा रहे हैं।
हालांकि, इस पूरे घटनाक्रम के बीच एक दूसरा पक्ष भी उभरकर सामने आया है, जो इन दावों को भ्रामक और एकतरफा बता रहा है। इस पक्ष के अनुसार चर्च के भीतर असली विवाद केवल संपत्तियों का नहीं, बल्कि नेतृत्व और नियंत्रण को लेकर है। इसी संदर्भ में आर्चबिशप सैमुअल पीटर प्रकाश का नाम प्रमुखता से सामने आता है, जिन्हें चर्च ऑफ इंडिया C.I.P.B.C (Indian Church Trustees) का मेट्रोपोलिटन ऑफ इंडिया एवं चेयरमैन बताया जाता है। दावा किया जा रहा है कि उनकी संस्था भारत सरकार के Ministry of Corporate Affairs में पंजीकृत है, जिससे उनकी वैधता को लेकर समर्थकों द्वारा जोर दिया जा रहा है।
दूसरी ओर, कर्नाइल मसीह का नाम इस पूरे विवाद के केंद्र में आ गया है। सूत्रों और न्यायालयीन अभिलेखों के अनुसार उनके खिलाफ कई गंभीर मामले दर्ज हैं। उपलब्ध दस्तावेजों के अनुसार, पंजाब के गुरदासपुर की अदालत में उनके खिलाफ दर्ज एक मामले में जमानत याचिका 16 अप्रैल 2020 को खारिज कर दी गई थी। इसके अलावा 31 मई 2022 को अतिरिक्त सत्र न्यायालय, गुरदासपुर द्वारा उन्हें धारा 82 दंड प्रक्रिया संहिता के तहत भगोड़ा (Proclaimed Offender) घोषित किया गया, क्योंकि वे लगातार अदालत में पेश नहीं हो रहे थे और गिरफ्तारी से बच रहे थे।
इतना ही नहीं, एक अन्य गंभीर आपराधिक मामले में कर्नाइल मसीह के खिलाफ भारतीय दंड संहिता की धारा 376 (बलात्कार) और 506 (धमकी) के तहत एफआईआर दर्ज होने की जानकारी भी सामने आई है। शिकायतकर्ता, जो एक नर्स बताई गई है, ने आरोप लगाया कि आरोपी ने उसे झांसा देकर अपने साथ गुरदासपुर के एक होटल में रखा और उसकी इच्छा के विरुद्ध दुष्कर्म किया। जांच के दौरान मेडिकल साक्ष्य और गवाहों के बयान दर्ज किए गए, जिसके बाद मामला सेशंस कोर्ट में ट्रायल के लिए भेजा गया।
इन न्यायालयीन तथ्यों के सामने आने के बाद पूरे मामले ने और अधिक तूल पकड़ लिया है। जहां एक ओर कुछ लोग कर्नाइल मसीह को चर्च का वैध प्रतिनिधि बताने की कोशिश कर रहे हैं, वहीं दूसरी ओर उनके खिलाफ सामने आए कानूनी रिकॉर्ड कई गंभीर सवाल खड़े कर रहे हैं।
सूत्रों का यह भी दावा है कि कर्नाइल मसीह पर वित्तीय लेन-देन और कथित धोखाधड़ी से जुड़े आरोप भी लगे हैं। कुछ मामलों में यह भी कहा जा रहा है कि उन्होंने लोगों से लाखों रुपये की ठगी की, जिनमें कुछ पेशेवर लोग भी शामिल बताए जाते हैं। इसके अलावा कब्रिस्तान से जुड़े किसी सौदे के नाम पर भी धन लेने के आरोपों की चर्चा है। हालांकि, इन सभी आरोपों की आधिकारिक पुष्टि अभी तक नहीं हुई है और ये बातें मुख्य रूप से सूत्रों के हवाले से सामने आ रही हैं।
इस पूरे विवाद ने चर्च समुदाय के भीतर गहरा विभाजन पैदा कर दिया है। एक ओर जहां कुछ लोग खुद को असली प्रतिनिधि बताकर अधिकार जताने में लगे हैं, वहीं दूसरी ओर विरोधी पक्ष इन्हें फर्जी और अवैध करार दे रहा है। सोशल मीडिया पर चल रहे संदेशों और दावों ने आम लोगों के बीच भ्रम और असमंजस की स्थिति पैदा कर दी है।
👉 बड़े सवाल जो अब उठ रहे हैं:
• क्या चर्च के नाम पर फर्जी संस्थाओं का जाल फैलाया जा रहा है?
• क्या यह पूरा विवाद संपत्तियों और आर्थिक हितों से जुड़ा है?
• कौन है असली मेट्रोपोलिटन और किसकी मान्यता वैध है?
• क्या धार्मिक आस्था के नाम पर लोगों को गुमराह किया जा रहा है?
• क्या न्यायालय के रिकॉर्ड इस पूरे मामले की सच्चाई उजागर कर रहे हैं?
विशेषज्ञों का मानना है कि यह मामला केवल धार्मिक विवाद नहीं, बल्कि कानूनी, प्रशासनिक और सामाजिक स्तर पर एक बड़ा मुद्दा बन चुका है। यदि समय रहते इसकी निष्पक्ष जांच नहीं हुई, तो इससे न केवल समुदाय के भीतर अविश्वास बढ़ेगा, बल्कि कानून व्यवस्था पर भी असर पड़ सकता है।
👉 जनता से अपील:
इस तरह के संवेदनशील मामलों में किसी भी वायरल संदेश या अपुष्ट जानकारी पर तुरंत विश्वास न करें। केवल न्यायालयीन दस्तावेजों, आधिकारिक बयानों और प्रमाणित स्रोतों के आधार पर ही अपनी राय बनाएं।
फिलहाल, यह विवाद लगातार गहराता जा रहा है और आने वाले समय में इसमें और बड़े खुलासे होने की संभावना जताई जा रही है। अब निगाहें प्रशासन, जांच एजेंसियों और न्यायालय पर टिकी हैं कि इस पूरे मामले में सच्चाई सामने लाने के लिए क्या ठोस कदम उठाए जाते हैं।
✍ रिपोर्ट: एलिक सिंह
📞 संपर्क: 8217554083
📢 खबर, विज्ञापन, विज्ञप्ति एवं सूचना हेतु संपर्क करें
🖋 संपादक – वंदे भारत लाइव टीवी न्यूज़








