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बस्ती में आबकारी विभाग की छापेमारी: 3500 किलो लहन नष्ट, लेकिन धंधेबाज मौके से फरार

बस्ती: आबकारी विभाग की बड़ी कार्रवाई, 3500 किलो लहन नष्ट; धंधेबाज मौके से रफूचक्कर सरयू किनारे धधक रही थी कच्ची शराब की भट्ठी, छापेमारी में विभाग को मिले 40 लीटर शराब और 3500 किलो लहन

अजीत मिश्रा (खोजी)

सवालिया निशान: क्या महज ‘लहन’ नष्ट करना ही काफी है, या रसूखदारों को बचाया जा रहा है?

  • छावनी क्षेत्र में अवैध शराब का बड़ा जखीरा बरामद: विभाग ने नष्ट किया लहन, हाथ लगे सिर्फ खाली गड्ढे
  • बस्ती में शराब माफियाओं पर आबकारी विभाग की दबिश: लहन हुआ नष्ट, आरोपियों की गिरफ्तारी न होने पर उठे सवाल
  • छितौना में आबकारी विभाग का छापा: 3500 किलो लहन और 40 लीटर शराब बरामद, धंधेबाज फरार

बस्ती। जिले में कच्ची शराब का अवैध कारोबार फल-फूल रहा है। हालिया घटनाक्रम में, आबकारी विभाग की टीम ने छावनी थाना क्षेत्र के छितौना गांव और सरयू नदी के माझा क्षेत्र में छापेमारी कर 3500 किलो लहन और 40 लीटर कच्ची शराब बरामद की है। विभाग का दावा है कि उन्हें लंबे समय से इस क्षेत्र में अवैध शराब के कारोबार की सूचना मिल रही थी।जिले के छावनी थाना क्षेत्र में अवैध शराब के खिलाफ चलाए गए एक बड़े अभियान में आबकारी विभाग को बड़ी सफलता हाथ लगी है। जिला आबकारी अधिकारी राजेश कुमार के नेतृत्व में गठित टीम ने सरयू नदी के तटवर्ती माझा क्षेत्र में छापेमारी कर अवैध शराब बनाने के अड्डों को ध्वस्त किया है।

छापेमारी का विवरण

आबकारी विभाग को काफी समय से माझा क्षेत्र में कच्ची शराब के अवैध निर्माण और उसके कारोबार की गुप्त सूचना मिल रही थी। शुक्रवार को की गई इस कार्रवाई में टीम ने छितौना गांव में दबिश दी। वहां शराब माफियाओं ने धरातल पर गड्ढे खोदकर और बड़े-बड़े ड्रमों में भारी मात्रा में लहन छिपा रखा था।

कार्रवाई के दौरान निम्नलिखित सामग्री बरामद की गई:

  • लहन की मात्रा: कुल 3500 किलो लहन को मौके पर ही नष्ट कर दिया गया।
  • शराब की मात्रा: मौके से 40 लीटर तैयार कच्ची शराब बरामद की गई, जिसे विभाग ने सीज कर दिया है।

बड़ा सवाल: धंधेबाज हर बार कैसे बच निकलते हैं?

हैरानी की बात यह है कि इतनी बड़ी मात्रा में सामग्री बरामद होने के बावजूद, मौके से किसी भी आरोपी की गिरफ्तारी नहीं हो सकी। विभाग का कहना है कि “टीम की आहट पाते ही धंधेबाज भाग खड़े हुए”। यह दलील अब सवाल खड़े कर रही है कि क्या छापेमारी की सूचना पहले ही लीक कर दी जाती है?इतनी बड़ी कार्रवाई के बावजूद, आबकारी टीम किसी भी धंधेबाज को गिरफ्तार करने में नाकाम रही। विभाग का दावा है कि छापेमारी के दौरान टीम की आहट पाते ही आरोपी मौके से भाग निकले।

क्षेत्र में यह चर्चा का विषय बना हुआ है कि 3500 किलो लहन जैसा बड़ा स्टॉक तैयार करने वाले कारोबारी इतनी आसानी से कैसे बच निकले? क्या छापेमारी से पूर्व किसी प्रकार की सूचना लीक हुई थी, या फिर प्रशासनिक सुस्ती के कारण मुख्य आरोपी पकड़ से दूर रहे? ये वे सवाल हैं जो अब विभागीय कार्रवाई की पारदर्शिता पर संदेह पैदा कर रहे हैं।

क्या प्रशासनिक मिलीभगत का है खेल?

इतने बड़े पैमाने पर चल रहे धंधे और बार-बार आरोपियों का ‘फरार’ हो जाना सीधे तौर पर प्रशासनिक तंत्र की कार्यप्रणाली पर गंभीर प्रश्नचिह्न लगाता है। क्या विभाग केवल लहन नष्ट करके अपनी जिम्मेदारी पूरी कर रहा है? या फिर इस धंधे के पीछे उन रसूखदारों का हाथ है, जिन तक पहुंचने की हिम्मत महकमा नहीं जुटा पा रहा?

यदि वाकई विभाग इस अवैध कारोबार को जड़ से खत्म करना चाहता है, तो उसे केवल लहन नष्ट करने के बजाय उन चेहरों को बेनकाब करना होगा जो इस मौत के व्यापार को संरक्षण दे रहे हैं। अन्यथा, केवल ‘खानापूर्ति’ वाली छापेमारी से कच्ची शराब का यह काला धंधा कभी बंद नहीं होगा।

छापेमारी दल में शामिल अधिकारी

इस महत्वपूर्ण कार्रवाई के दौरान आबकारी विभाग के कई अधिकारी मौजूद रहे, जिनमें निम्नलिखित शामिल हैं:

  • आबकारी निरीक्षक सिटी सुनील कुमार
  • हरैया से रूपाली
  • रुधौली के निरीक्षक दिनेश प्रताप सिंह
  • भानपुर से इंद्रदेव प्रसाद
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