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महाराष्ट्र सरकार का बड़ा फैसला, आधार से बने बर्थ सर्टिफिकेट होंगे रद्द। कोई अंतर पाया गया तो एफआईआर भी दर्ज और भगोड़ा घोषित किया जाएगा।

महाराष्ट्र सरकार ने केंद्र के दिशानिर्देशों के अनुसार, सिर्फ आधार कार्ड के आधार पर जारी किए गए जन्म प्रमाण पत्रों को रद्द करने का फैसला किया है। राज्य के राजस्व मंत्री, चंद्रशेखर बावनकुले ने गुरुवार को यह जानकारी दी।

मीनाक्षी विजय कुमार भारद्वाज/मुंबई
महाराष्ट्र सरकार का बड़ा फैसला, आधार से बने बर्थ सर्टिफिकेट होंगे रद्द। कोई अंतर पाया गया तो एफआईआर भी दर्ज और भगोड़ा घोषित किया जाएगा।IMG 20251128 WA0024
महाराष्ट्र/मुंबई: महाराष्ट्र सरकार ने केंद्र के दिशानिर्देशों के अनुसार, सिर्फ आधार कार्ड के आधार पर जारी किए गए जन्म प्रमाण पत्रों को रद्द करने का फैसला किया है। राज्य के राजस्व मंत्री, चंद्रशेखर बावनकुले ने गुरुवार को यह जानकारी दी। उन्होंने बताया कि अमरावती, अकोला, लातूर और संभाजीनगर सहित 14 जिलों को ऐसे इलाकों के रूप में पहचाना गया है, जहां फर्जी जन्म प्रमाण पत्र धड़ल्ले से बनाए जा रहे हैं। जन्म के एक साल तक स्वास्थ्य विभाग जन्म प्रमाण पत्र जारी करता है। इसके बाद, यह जिम्मेदारी राजस्व विभाग की होती है। गुरुवार को गृह और राजस्व विभागों के अतिरिक्त मुख्य सचिवों की अध्यक्षता में हुई एक उच्च-स्तरीय बैठक में यह स्पष्ट किया गया कि जन्म की तारीख और जन्म स्थान के अकेले सबूत के तौर पर आधार कार्ड को स्वीकार नहीं किया जा सकता।
मंत्री ने क्या कहा
राजस्व विभाग ने सभी तहसीलदार, उप-विभागीय अधिकारी, जिला कलेक्टर और संभागीय आयुक्तों के लिए 16-सूत्रीय सत्यापन दिशानिर्देश जारी किए हैं। चंद्रशेखर बावनकुले ने कहा कि 11 अगस्त, 2023 को हुए संशोधन के बाद नायब तहसीलदारों द्वारा जारी किए गए सभी जन्म/पंजीकरण आदेश रद्द माने जाएंगे। यदि आवेदन में दी गई जानकारी और आधार कार्ड की जानकारी में कोई अंतर पाया जाता है, तो एफआईआर दर्ज की जाएगी। जो लोग अपने मूल फर्जी जन्म प्रमाण पत्र जमा नहीं करेंगे या जिन्हें ट्रेस नहीं किया जा सकेगा, उन्हें भगोड़ा घोषित कर दिया जाएगा। उनके खिलाफ FIR दर्ज की जाएगी।
14 जिलों में विशेष सत्यापन शिविर आयोजित करने का निर्देश
जिला कलेक्टरों और संभागीय आयुक्तों को इन 14 जिलों में विशेष सत्यापन शिविर आयोजित करने का निर्देश दिया गया है। यह कदम फर्जीवाड़े को रोकने और जन्म प्रमाण पत्रों की प्रामाणिकता सुनिश्चित करने के लिए उठाया गया है। सरकार यह सुनिश्चित करना चाहती है कि जन्म प्रमाण पत्र सही जानकारी के आधार पर ही जारी हों। सरकार ने यह भी स्पष्ट किया है कि यह कार्रवाई उन लोगों के खिलाफ नहीं है जिन्होंने सही जानकारी के साथ जन्म प्रमाण पत्र प्राप्त किए हैं।

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