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एस.डी. पब्लिक स्कूल, नरवाना में बच्चों के स्वास्थ्य को लेकर जागरूकता की पहल..

एस.डी. पब्लिक स्कूल, नरवाना में बच्चों के स्वास्थ्य को लेकर जागरूकता की पहल…….
नरवाना  FB IMG 1767005056804 एस.डी. पब्लिक स्कूल में बच्चों के स्वास्थ्य को ध्यान में रखते हुए “जंक फूड का बच्चों के स्वास्थ्य पर प्रभाव” विषय पर एक विशेष जागरूकता शिविर का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम का उद्देश्य विद्यार्थियों को बदलती जीवनशैली और असंतुलित खान-पान से होने वाले दुष्प्रभावों के प्रति सचेत करना तथा उन्हें स्वस्थ जीवनशैली अपनाने के लिए प्रेरित करना था। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में विद्यार्थी, शिक्षक एवं स्कूल स्टाफ उपस्थित रहे।
इस जागरूकता शिविर के मुख्य वक्ता श्री विश्वकर्मा कौशल विश्वविद्यालय के फूड टेक्नोलॉजी विभाग के प्रोफेसर डॉ. हरिश कुमार रहे। डॉ. हरिश कुमार ने अपने व्याख्यान के माध्यम से बच्चों को सरल भाषा में यह समझाया कि जंक फूड क्या है और यह किस प्रकार धीरे-धीरे शरीर को नुकसान पहुंचाता है। उन्होंने बताया कि आज के समय में बच्चे फास्ट फूड, पैकेज्ड स्नैक्स, कोल्ड ड्रिंक्स और मीठे खाद्य पदार्थों की ओर तेजी से आकर्षित हो रहे हैं, जो उनके स्वास्थ्य के लिए अत्यंत हानिकारक सिद्ध हो रहे हैं। डॉ. हरिश कुमार ने कहा कि जंक फूड में अत्यधिक मात्रा में चीनी, नमक, कृत्रिम रंग, प्रिज़रवेटिव्स और अस्वस्थ वसा होती है, जो बच्चों की शारीरिक वृद्धि और मानसिक विकास पर प्रतिकूल प्रभाव डालती है। नियमित रूप से ऐसे खाद्य पदार्थों का सेवन करने से बच्चों में मोटापा तेजी से बढ़ता है, जिससे आगे चलकर मधुमेह, उच्च रक्तचाप और हृदय संबंधी रोगों का खतरा भी बढ़ जाता है। उन्होंने यह भी बताया कि जंक फूड बच्चों की रोग प्रतिरोधक क्षमता को कमजोर कर देता है, जिससे वे जल्दी बीमार पड़ने लगते हैं। अपने संबोधन में उन्होंने इस बात पर विशेष जोर दिया कि जंक फूड का असर केवल शरीर तक सीमित नहीं रहता, बल्कि यह बच्चों की एकाग्रता, यादाश्त और पढ़ाई पर भी नकारात्मक प्रभाव डालता है। अधिक जंक फूड खाने वाले बच्चों में चिड़चिड़ापन, थकान और ध्यान की कमी देखने को मिलती है, जिससे उनका शैक्षणिक प्रदर्शन भी प्रभावित होता है। इसके अलावा, दांतों की समस्याएं, पेट से जुड़ी बीमारियां और नींद की कमी जैसी समस्याएं भी जंक फूड के अत्यधिक सेवन से उत्पन्न होती हैं।

कार्यक्रम के दौरान शिविर को संवादात्मक रखा गया, जिसमें विद्यार्थियों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया और अपने सवाल पूछे। बच्चों ने यह जानने में रुचि दिखाई कि वे किस प्रकार अपनी रोजमर्रा की खान-पान की आदतों में छोटे-छोटे बदलाव करके स्वस्थ रह सकते हैं। डॉ. हरिश कुमार ने उनके प्रश्नों का विस्तार से उत्तर देते हुए उन्हें सही दिशा में मार्गदर्शन प्रदान किया विद्यालय प्रशासन की ओर से इस प्रकार के जागरूकता कार्यक्रम की सराहना की गई। स्कूल के शिक्षकों ने कहा कि आज के समय में बच्चों को केवल किताबी शिक्षा देना ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि उन्हें स्वास्थ्य, पोषण और जीवनशैली से जुड़े विषयों पर भी जागरूक करना अत्यंत आवश्यक है। ऐसे कार्यक्रम बच्चों के सर्वांगीण विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। कार्यक्रम के अंत में विद्यार्थियों को यह संदेश दिया गया कि स्वस्थ खान-पान की आदतें बचपन में ही विकसित की जानी चाहिए, क्योंकि यही आदतें भविष्य में उनके अच्छे स्वास्थ्य और सफल जीवन की नींव रखती हैं। यह जागरूकता शिविर न केवल ज्ञानवर्धक रहा, बल्कि बच्चों और शिक्षकों के लिए एक प्रेरणादायक अनुभव भी साबित हुआ।

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