आजमगढ़इतवाउत्तर प्रदेशकानपुरकुशीनगरगोंडागोरखपुरबस्तीबहराइचबाराबंकीलखीमपुरसिद्धार्थनगर सीतापुर

“बस्ती का अजूबा: विधायक निधि की सड़क पर पंचायत ने भी हाथ साफ किया।”

"बस्ती के बहादुरपुर ब्लॉक में भ्रष्टाचार का नया कीर्तिमान! 🚩

अजीत मिश्रा (खोजी)

।। भ्रष्टाचार की ‘डबल इंजन’ रफ्तार: एक सड़क, दो फंड और जनता की जेब पर डाका।।

समीक्षा:

हाल ही में बस्ती जिले के बहादुरपुर ब्लॉक से भ्रष्टाचार का एक ऐसा नमूना सामने आया है, जो हमारे सिस्टम की खोखली हो चुकी नैतिकता पर गहरा प्रहार करता है। मामला ‘माइन गांव’ का है, जहाँ विकास के नाम पर सरकारी धन की ऐसी “दोहरी लूट” मचाई गई कि सड़क एक ही बनी, लेकिन उसका भुगतान दो अलग-अलग सरकारी निधियों (फंड्स) से करा लिया गया।

यह केवल एक प्रशासनिक चूक नहीं है, बल्कि यह एक सुनियोजित वित्तीय अपराध है, जिसे ग्राम पंचायत के जिम्मेदारों ने बड़े ही शातिर तरीके से अंजाम दिया।

प्रमुख बिंदु और सिस्टम की नाकामी:

दोहरी लूट का खेल: पहले सड़क ‘विधायक निधि’ से बनाई गई और फिर उसी बनी-बनाई सड़क को ग्राम पंचायत का कार्य दिखाकर दोबारा भुगतान ले लिया गया। यानी कागजों पर विकास हुआ, लेकिन तिजोरियां भ्रष्टाचार की भरी गईं।

आंकड़ों की बाजीगरी: ऑडिट रिपोर्ट में ₹8.28 लाख की भारी वित्तीय अनियमितता पाई गई है। यह पैसा किसी एक व्यक्ति का नहीं, बल्कि आम करदाताओं का है जिसे विकास के नाम पर हड़प लिया गया।

जिम्मेदारों का चेहरा: इस मामले में चार सचिवों और पांच पूर्व प्रधानों को नोटिस जारी किया गया है। यह साफ दर्शाता है कि भ्रष्टाचार नीचे से लेकर ऊपर तक फैला हुआ है, जहाँ रक्षक ही भक्षक बने बैठे हैं।

जांच पर भी सवाल?

हैरानी की बात तो यह है कि जब स्थानीय ग्रामीण (लालचंद्र) ने शिकायत की, तो जांच टीम पर भी आरोप लगे कि उन्होंने मूल शिकायत की जांच करने के बजाय किसी दूसरी सड़क की जांच कर रिपोर्ट लगा दी। यह प्रशासन के भीतर ‘कवर-अप’ यानी मिलीभगत की ओर इशारा करता है। अगर मंडलायुक्त की सख्ती न होती, तो शायद यह मामला रद्दी की टोकरी में दब चुका होता।

अब आगे क्या?

प्रशासन ने अब 12% ब्याज के साथ रिकवरी का आदेश तो दे दिया है, लेकिन सवाल वही है— क्या केवल रिकवरी ही काफी है?

“जब तक ऐसे भ्रष्ट अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों को सलाखों के पीछे नहीं भेजा जाता और उन्हें भविष्य के लिए अयोग्य घोषित नहीं किया जाता, तब तक सरकारी धन की यह बंदरबांट बंद नहीं होगी।”

निष्कर्ष

यह घटना हमारे लोकतंत्र के लिए एक चेतावनी है। पंचायतों को ‘ग्राम स्वराज’ का केंद्र बनाया गया था, लेकिन कुछ लालची तत्वों ने इसे ‘लूट का अड्डा’ बना दिया है। रिकवरी के आदेश स्वागत योग्य हैं, लेकिन यह सुनिश्चित करना होगा कि वसूली केवल कागजों तक सीमित न रहे, बल्कि दोषियों को कड़ी सजा मिले ताकि दूसरे गाँवों में ऐसे ‘डबल पेमेंट’ वाले खेल खेलने से पहले लोग सौ बार सोचें।

Back to top button
error: Content is protected !!