
“CHC दुबौलिया में ‘महायुद्ध’: डॉक्टर ने अधीक्षक पर लगाया प्रताड़ना का आरोप, CMO ने दिए जांच के आदेश”
"सिस्टम के रक्षकों में ठनी: CHC दुबौलिया में चिकित्साधिकारी और अधीक्षक के बीच रार, स्वास्थ्य सेवाएं राम भरोसे"
अजीत मिश्रा (खोजी)
।। CHC दुबौलिया: सेवा या अखाड़ा? डॉ. राजवीर के आरोपों ने हिलाया स्वास्थ्य महकमा।।

बस्ती।। कहने को तो अस्पताल जीवन बचाने की जगह होते हैं, लेकिन सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र दुबौलिया इन दिनों आरोपों और प्रत्यारोपों का ‘जंग का मैदान’ बना हुआ है। एक तरफ सेवा का संकल्प है, तो दूसरी तरफ मानसिक प्रताड़ना और अव्यवस्था के गंभीर आरोप। मामला अब मुख्य चिकित्साधिकारी (CMO) की चौखट तक जा पहुँचा है।
क्या है पूरा विवाद?
CHC दुबौलिया में तैनात चिकित्साधिकारी डॉ. राजवीर गोयल ने अपने ही अधीक्षक पर मानसिक रूप से प्रताड़ित करने का सनसनीखेज आरोप लगाया है। डॉ. गोयल द्वारा उच्चाधिकारियों को भेजे गए पत्र में न केवल निजी उत्पीड़न की बात कही गई है, बल्कि अस्पताल के भीतर सुरक्षा व्यवस्था की पोल भी खोल दी गई है।
डॉ. गोयल का आरोप है कि बीते दिसंबर माह में ड्यूटी के दौरान एक संविदा नर्स के पति ने उनके साथ चेंबर में घुसकर अभद्रता की और जानलेवा हमला करने की कोशिश की। उनका कहना है कि इस माहौल में काम करना मानसिक प्रताड़ना के समान है और अस्पताल प्रशासन कर्मचारियों को सुरक्षा देने में विफल रहा है।
बदहाली की ‘बीमार’ तस्वीर
पत्र में केवल आपसी झगड़ा ही नहीं, बल्कि अस्पताल की सांगठनिक विफलता का भी कच्चा चिट्ठा खोला गया है:
बिजली का अभाव: समय पर जांच न हो पाना।
बुनियादी सुविधाओं की कमी: पीने के पानी की किल्लत और परिसर में पसरी गंदगी।
सुरक्षा पर सवाल: आए दिन तीमारदारों और डॉक्टरों के बीच होने वाली कहासुनी और मीडियाबाजी।
अधीक्षक का पलटवार और CMO का रुख
वहीं दूसरी ओर, अधीक्षक ने इन सभी आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए इन्हें ‘निराधार’ बताया है। अस्पताल प्रशासन की मानें तो यह केवल छवि खराब करने की कोशिश है।
बढ़ते विवाद को देखते हुए मुख्य चिकित्साधिकारी (CMO) बस्ती ने मामले का संज्ञान लिया है। उन्होंने स्पष्ट किया है कि आरोपों की निष्पक्ष जांच कराई जाएगी और जो भी दोषी पाया जाएगा, उस पर सख्त अनुशासनात्मक कार्रवाई होगी।
खोजी नजर: सवाल यह उठता है कि अगर सिस्टम के ‘रक्षक’ ही आपस में लड़ेंगे, तो आम जनता का इलाज राम भरोसे कैसे नहीं होगा? क्या यह वाकई व्यक्तिगत विवाद है या फिर अस्पताल की बदहाली को दबाने की एक कोशिश?
अजीत मिश्रा (खोजी)
बस्ती ब्यूरो
















