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कप्तानगंज में रेंजर के दावों को ठेकेदारों का ठेंगा: धड़ल्ले से कटे हरे पेड़, क्या कागजी आदेशों से डरेगा ‘लकड़ी माफिया’?

बस्ती: रेंजर के कड़े रुख के बाद भी नहीं रुकी कुल्हाड़ी, तीन गांवों में प्रकृति का 'कत्लेआम', वन विभाग की साख दांव पर!

अजीत मिश्रा (खोजी)

कप्तानगंज में ‘लकड़ी माफिया’ बेखौफ: रेंजर के आदेशों को ठेंगा दिखा धड़ल्ले से काटे जा रहे हरे पेड़, क्या कागजों से निकलकर होगी सख्त कार्रवाई?

  • लकड़ी माफिया बेखौफ! कप्तानगंज रेंज में बिना परमिट काटे गए आम और सागौन के दर्जनों पेड़; क्या सिर्फ जुर्माना या होगी जेल?
  • कप्तानगंज वन रेंज में हड़कंप: अवैध पेड़ कटान मामले में रेंजर ने दिए जांच के आदेश, ठेकेदारों में खलबली।

बस्ती। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की मंशा है कि प्रदेश हरा-भरा रहे, पर्यावरण सुरक्षित रहे। लेकिन बस्ती जिले के कप्तानगंज वन रेंज में बैठे लकड़ी माफियाओं के हौसले इतने बुलंद हैं कि उन्हें न तो शासन के सख्त आदेशों का डर है और न ही वन विभाग का कोई खौफ। कप्तानगंज वन रेंज के अंतर्गत आने वाली कई ग्राम पंचायतों में इन दिनों बिना परमिट के ही हरे-भरे, फलदार और कीमती पेड़ों पर बेरहमी से कुल्हाड़ी चलाई जा रही है।

​हाल ही में हुए इस अंधाधुंध पर्यावरण दोहन का मामला अब गरमा गया है। कप्तानगंज के वन रेंजर राजू प्रसाद ने मामले का संज्ञान लेते हुए तत्काल जांच के निर्देश तो जारी कर दिए हैं, लेकिन बड़ा सवाल यह है कि क्या ये निर्देश सिर्फ कागजी खानापूर्ति बनकर रह जाएंगे या सचमुच इन पर्यावरण के दुश्मनों को जेल की सलाखों के पीछे भेजा जाएगा?

कहाँ-कहाँ हुआ प्रकृति का ‘कत्लेआम’?

​स्थानीय सूत्रों और धरातली रिपोर्ट के मुताबिक, कप्तानगंज रेंज के कई गांवों को लकड़ी माफियाओं ने अपना चारागाह बना लिया है:

    • ग्राम पंचायत पोखरा (राजस्व गांव अहिरौलिया/रौहलिया): यहाँ फलदार और छायादार ‘आम’ के हरे पेड़ को बिना किसी परमिट के ही धराशायी कर दिया गया।
    • ग्राम पंचायत पिनेसर (राजस्व गांव निषाद पुरवा): यहाँ तो माफियाओं ने हद ही पार कर दी। बड़ी संख्या में ‘आम’ के साथ-साथ कीमती ‘सागौन’ के पेड़ों को काटकर ठिकाने लगा दिया गया।
    • ग्राम पंचायत शुक्लपुरा (राजस्व गांव तिवारी पुर): इस क्षेत्र में ‘आम’, ‘गूलर’, ‘नीम’ और ‘सागौन’ के हरे-भरे पेड़ों पर बेखौफ होकर आरी चलाई गई।

नियम क्या कहता है?

रेंजर राजू प्रसाद के मुताबिक, शासन का स्पष्ट आदेश है कि एक भी हरा पेड़ अवैध रूप से काटने पर 10,000 रुपये के जुर्माने का प्रावधान है। लेकिन माफियाओं की कमाई के आगे यह जुर्माना ऊंट के मुंह में जीरे के समान साबित हो रहा है।

 

चर्चा का विषय: रेंजर के निर्देश सख्त, फिर भी कटान जारी?

​क्षेत्र में यह बात आग की तरह फैली हुई है कि आखिर रेंजर राजू प्रसाद के कड़े रुख और निर्देशों के बाद भी इतनी बड़ी संख्या में हरे पेड़ों की कटान कैसे हो गई? क्या लकड़ी ठेकेदारों को स्थानीय वन कर्मियों की शह प्राप्त है? या फिर माफियाओं के रसूख के आगे विभाग नतमस्तक है? रेंजर के सख्त दावों के बावजूद धड़ल्ले से पेड़ों का कटना पूरे प्रशासनिक तंत्र पर एक बड़ा सवालिया निशान खड़ा करता है।

कड़ी कार्रवाई हुई तो मचेगा हड़कंप

​अब देखना यह है कि रेंजर राजू प्रसाद की ‘जांच’ कितनी निष्पक्ष और कितनी तेज होती है। क्षेत्र की जनता की नजरें अब वन विभाग की कार्रवाई पर टिकी हैं।

​यदि रेंजर ने इस मामले में सचमुच पूरी ताकत से हंटर चलाया, तो कप्तानगंज और उसके आसपास के क्षेत्रों में सक्रिय लकड़ी माफियाओं के सिंडिकेट में हड़कंप मचना तय है। इस मामले में ठोस और दंडात्मक कार्रवाई ही आगे होने वाले अवैध कटान पर लगाम लगा सकती है, अन्यथा कप्तानगंज रेंज के जंगल और बाग-बगीचे सिर्फ इतिहास के पन्नों में ही सिमट कर रह जाएंगे।

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