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 प्रदेश भाजपा अध्यक्ष के नाम पर नहीं बन पा रही सहमति     

कौशिक नाग-कोलकाता                                                                                                                                                     प्रदेश भाजपा अध्यक्ष के नाम पर नहीं बन पा रही सहमति                                                                                                   प्रदेश भाजपा का अगला अध्यक्ष कौन होगा. यह सवाल भाजपा के अंदरखाने में चर्चा में है, क्योंकि केंद्रीय मंत्री बनने के बाद प्रदेश अध्यक्ष की जिम्मेवारी सुकांत मजूमदार को छोड़नी पड़ रही है. लेकिन उनकी जगह किसे चुना जाये, यह सवाल अहम हो गया है. पार्टी का एक तबका चाहता है कि ममता बनर्जी की जो लड़ाकू नेत्री की इमेज बनी है, उसे टक्कर देने के लिए भाजपा को कट्टर महिला नेत्री को सामने लाना चाहिए. जबकि संघ के लोग चाहते हैं कि उनका कोई करीबी ही इस अहम जिम्मेवारी को संभाले. इस बीच, साइंस सिटी सभागार में विपक्ष के नेता शुभेंदु अधिकारी ने जिस तरह से कड़ा रुख अख्तियार किया, वह चर्चा का विषय बन गया है. शुभेंदु ने साफ कहा कि सबका साथ, सबका विकास का नारा फिलहाल परे रखते हुए जो हमारे साथ, हम उनके साथ की नीति पर आगे बढ़ना होगा. उधर, सुकांत मजूमदार की जगह संभालने वाले नये चेहरे के बारे में इतनी देर क्यों हो रही है. इस पर राजनीतिक विश्लेषक कहते हैं कि सब कुछ संघ पर निर्भर है. आरएसएस के प्रति निष्ठा रखने वाला ही अगला प्रदेश अध्यक्ष होगा. यह तय है. तथागत राय, दिलीप घोष से लेकर सुकांत मजूमदार तक, हर कोई संघ का करीबी रहा है और है. भाजपा संगठन महामंत्री का पद पहले से ही संघ के पास रहता आया है. जो सीधे पार्टी के संचालन का काम करता है. लेकिन इस बार भाजपा और संघ के बीच सहमति नहीं बन पा रही है. इस वजह से देरी हो रही है. महिला नेत्री के रूप में दो नामों पर चर्चा थी. पहला नाम पूर्व केंद्रीय मंत्री देबश्री राय व दूसरा नाम अग्निमित्रा पाॅल का है. लेकिन फिलहाल दोनों ही चुनाव हार कर पर्दे के पीछे चली गयी हैं. इस बीच, शुभेंदु का हार्ड लाइनर बनना नयी रणनीति का संकेत दे रहा है. प्रदेश अध्यक्ष के रूप में राज्यसभा के सांसद शमिक भट्टाचार्य, बांकुड़ा जिले के पूर्व जिलाध्यक्ष विवेकानंद पात्र व विश्व हिंदू परिषद के नेता सचिन सिंह का नाम भी सामने आ रहा है. इसके अलावा ज्योतिर्मय सिंह महतो, जगन्नाथ सरकार के नाम को लेकर भी चर्चा हो रही है. लेकिन अभी तक किसी के नाम पर सहमति नहीं बन पायी है.

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