उत्तर प्रदेशबस्तीसिद्धार्थनगर 

अवैध व्यापार और कमीशनखोरी को लेकर खबर चलाने पर बौखला जाते हैं जिम्मेदार

अजीत मिश्रा (खोजी)

।। अवैध शराब, गांजा, स्मैक, देह व्यापार और जुआ पर कमीशनखोरी को लेकर खबर चलाने पर बौखला जाते हैं जिम्मेदार।।

पत्रकारिता लोकतंत्र का वह एकमात्र चौथा स्तंभ है, जो सत्ता से सवाल करता है, समाज को दिशा देता है, पुलिस के जनविरोधी क्रियाकलापों को अपनी लेखनी से शासन तक पहुंचाता है, जनता को जागरूक कर समाज में हो रहे अवैध क्रियाविधियों से अवगत कराता है। लेकिन बिना लाभ की इच्छा रखे ऐसे पत्रकारों को कुछ जनप्रतिनिधि एवं वर्दीधारी फूटे आँख भी पसंद नहीं करते। कारण सरकार ने जिन पुलिसकर्मियों को समाज सेवा करने की ड्यूटी दी है उनमे से “कुछ वर्दीधारी” जिनके द्वारा महज चंद रुपयों की खातिर पुलिसिया कर्तव्य को दांव लगाने से बाज़ नहीं आते! आम जनता की क्या बिसात वो जुबान भी खोले। क्योंकि फिल्मों का प्रसिद्ध डायलॉग की “पुलिस की दोस्ती और दुश्मनी अच्छी नहीं होती” आज भी लोगों के जेहन मे बैठा है। जिले मे तो पत्रकार भी वर्दीधारियों की दबँगई के आगे खौफ खाये रहते हैँ। जो खबर लिखकर प्रशासन की नींद को तोड़ना चाहते हैँ उनपर झूठा मुकदमा और नोटिस की धमकी के साथ टारगेट रखकर कार्रवाई का भय दिखाया जाता है।

 जनता की माने तो अवैध शराब, गांजा, स्मैक और जुए ने अपनी ऐसी पैठ जमाई है की जनता त्रस्त नजर आ रहे हैँ, और ये माफिया बकायदा वर्दी के संरक्षण मे अपना अवैध धंधा जारी रखकर जिले के जनता को दीमक के भांति खाने मे लगे हैँ। ज़ब पत्रकार ने कलम चलाकर पुलिस की अवैध शराब और जुए मे वर्दीधारियों की संलिप्तता की जानकारी दी तो जिम्मेदारों को ये नागवार गुजरता है और उनके द्वारा फर्जी तरीके से कानूनी कार्रवाई और नोटिस की धमकी दी जाती है।अर्थात जो निष्ठा और निष्पक्षता के साथ जनहित की आवाज़ बन रहे हैं साहब उन्ही की कलम तोड़कर वर्दी की ताकत दिखाना चाह रहे हैँ! जबकि उन्हें इस बात की जानकारी भलीभांति है कि लोकतंत्र की असली ताकत पत्रकारिता ही है।

वैसे भी पत्रकारों के आवाज़ को दबाने की साजिश होते रहती है “क़भी ले देकर क़भी धमकी पूर्वक! “

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