दरभंगाबिहार

रंगों में सजी रचनात्मकता: द्रोण एकेडमी में रंगोली प्रतियोगिता का भव्य आयोजन

दरभंगा के पिंडारूच स्थित द्रोण एकेडमी में मेधा कुञ्ज के तहत रंगोली प्रतियोगिता का आयोजन हुआ, जिसमें छात्रों ने शानदार रचनात्मकता का प्रदर्शन किया।

रंगों में सजी रचनात्मकता: द्रोण एकेडमी में रंगोली प्रतियोगिता का भव्य आयोजन

दरभंगा जिला के पिंडारूच गाँव स्थित सामाजिक संस्था मेधा कुञ्ज के तत्वावधान में संचालित विद्यालय द्रोण एकेडमी में शनिवार को रंगोली प्रतियोगिता का भव्य आयोजन किया गया। विद्यालय परिसर में सुबह से ही बच्चों में उत्साह का माहौल देखने को मिला। सभी छात्रों ने अपने-अपने ग्रुप के अनुसार प्रतियोगिता में भाग लिया और अपनी कला एवं सृजनात्मकता का शानदार प्रदर्शन किया।

विद्यालय प्रशासन ने बताया कि द्रोण एकेडमी में प्रत्येक ग्रुप में 15 छात्र-छात्राएं शामिल हैं। विद्यालय की विशेषता यह है कि हर अतिरिक्त गतिविधि संबंधी प्रतियोगिता इन्हीं ग्रुपों के बीच होती है। प्रत्येक ग्रुप का नेतृत्व एक ग्रुप मेंटर शिक्षक करते हैं, जबकि ग्रुप लीडर के रूप में सबसे वरिष्ठ छात्र या छात्रा को चयनित किया जाता है।

रंगोली प्रतियोगिता में बच्चों ने संस्कृति पर आधारित अपनी कला प्रस्तुत की। सभी ग्रुपों ने बेहद आकर्षक और सटीक रंग संयोजन से रंगोली बनाई, जिससे निर्णायक मंडल के लिए विजेता चुनना कठिन हो गया। काफी विचार-विमर्श के बाद राकेश शर्मा ग्रुप को विजेता घोषित किया गया, जिसकी मेंटर सुश्री रितिका कुमारी एवं ग्रुप लीडर राखी कुमारी रहीं। वहीं, व्यक्तिगत श्रेणी में सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन के लिए सी. वी. रमण ग्रुप की नेहा मंडल को सम्मानित किया गया।

कार्यक्रम के मुख्य अतिथि के रूप में दिल्ली विश्वविद्यालय के अवकाशप्राप्त प्रोफेसर एवं अनादि फाउंडेशन के संस्थापक प्रदीप कान्त चौधरी की उपस्थिति ने समारोह में गरिमा जोड़ दी। उन्होंने सभी विजेताओं को पुरस्कार प्रदान किया एवं बच्चों को जीवन में रचनात्मकता बनाए रखने की प्रेरणा दी।

विद्यालय के निदेशक ज्ञानेश चौधरी ने बताया कि ऐसी गतिविधियाँ बच्चों में आत्मविश्वास बढ़ाती हैं और टीम भावना का विकास करती हैं। कार्यक्रम में सभी शिक्षक, सहकर्मी और अभिभावक उपस्थित रहे। प्रतियोगिता के सफल समापन के बाद बच्चों ने मनोरंजक गतिविधियों के साथ दिन का आनंद उठाया।

यह आयोजन न केवल प्रतिभा प्रदर्शन का मंच बना, बल्कि बच्चों में कला, सहयोग और नेतृत्व की भावना को भी मजबूत किया।

Sitesh Choudhary

चढ़ते हुए सूरज की परस्तिश नहीं करता, लेकिन, गिरती हुई दीवारों का हमदर्द हूँ।
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