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।। परमिट की आड़ में ‘हरियाली’ का कत्लेआम: बस्ती सदर में ७५ के फेर में काट डाले २०० सागौन के पेड़ ।।

।। वन विभाग की 'गुलाबी' मेहरबानी: मामूली जुर्माने की रसीद काटकर लाखों के घोटाले पर 'लीपापोती' की तैयारी ।।

अजीत मिश्रा (खोजी)

।। खाकी की आड़ में ‘हरा’ शिकार: दुबहरा में वन विभाग की मेहरबानी से फल-फूल रहा अवैध कटान का काला कारोबार ।।

बस्ती मंडल, उत्तर प्रदेश।

बस्ती। प्रदेश सरकार एक तरफ ‘वृक्षारोपण जन अभियान’ चलाकर करोड़ों खर्च कर पर्यावरण बचाने का ढोंग कर रही है, वहीं दूसरी ओर बस्ती सदर रेंज के जिम्मेदार अधिकारी और कर्मचारी सरकारी दावों की धज्जियां उड़ाने में मस्त हैं। मामला दुबहरा क्षेत्र का है, जहाँ होली के हुड़दंग की आड़ में प्रतिबंधित सागौन और शीशम के बागों पर ऐसी आरी चली कि देखते ही देखते पूरा इलाका ठूंठ में तब्दील हो गया। अब इस पूरे मामले में नियमानुसार कार्यवाही करने के बजाय वन विभाग के ‘कारिंदे’ लीपापोती के खेल में जुट गए हैं।

🪾परमिट 75 का, कत्लेआम 200 पार!

सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, लकड़ी ठेकेदारों ने विभाग से मात्र 75 सागौन के पेड़ों का परमिट हासिल किया था। लेकिन विभाग की ‘मौन सहमति’ का फायदा उठाते हुए ठेकेदारों ने 200 से अधिक कीमती सागौन और शीशम के पेड़ों को जमींदोज कर दिया। बताया जा रहा है कि इस बाग का सौदा करीब 24 लाख रुपये में हुआ था और देखते ही देखते 5 ट्रकों से ज्यादा कीमती लकड़ी जिले की सीमा के बाहर पहुंचा दी गई।

🪾जुर्माने के नाम पर मजाक की तैयारी

शासनादेश की मानें तो एक हरे प्रतिबंधित पेड़ के अवैध कटान पर 10 हजार रुपये के जुर्माने का प्रावधान है। इस हिसाब से अवैध रूप से कटे पेड़ों का हर्जाना ही लाखों में बैठता है। लेकिन सूत्रों का दावा है कि ठेकेदार और वन विभाग के बीच ‘अंडर टेबल’ सेटिंग का दौर जारी है। सरकारी खजाने में नाममात्र का जुर्माना जमा कराकर इस बड़े घोटाले को रफा-दफा करने की पटकथा लिखी जा चुकी है।

🪾डीएफओ के लिए साख की लड़ाई

जिले में अपनी कार्यशैली के लिए चर्चित तेज-तर्रार डीएफओ डॉ. शिरीन के लिए यह मामला किसी बड़ी चुनौती से कम नहीं है। एक तरफ उनके अपने मातहत भ्रष्टाचार की चादर ओढ़कर ठेकेदारों को संरक्षण दे रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ आम जनता की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि क्या डॉ. शिरीन इन भ्रष्ट अधिकारियों और लकड़ी माफियाओं के गठजोड़ को तोड़ पाएंगी?

🌳75 पेड़ों के परमिट पर 200 से अधिक सागौन और शीशम के पेड़ काटे गए।

🌳24 लाख रुपये में हुआ था सौदा, 5 ट्रक लकड़ी जिले के बाहर भेजी गई।

🌳नियमतः प्रति पेड़ 10,000 रुपये जुर्माने के बजाय नाममात्र की धनराशि जमा कराकर मामले को दबाने की तैयारी।

🌳लकड़ी ठेकेदार और वन विभाग के कर्मचारियों के बीच साठगांठ के आरोप।

🌳जांच के घेरे में बस्ती सदर रेंज के अधिकारी, DFO की कार्यवाही का इंतज़ार।

बड़ा सवाल: क्या चंद रुपयों की खातिर सरकारी धन को चूना लगाने वाले अधिकारियों पर गाज गिरेगी, या फिर ‘साहब’ की मेहरबानी से लकड़ी माफिया बस्ती की हरियाली को इसी तरह निगलते रहेंगे?

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