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भ्रष्टाचार के खिलाफ आवाज उठाने वाले सिपाही सुनील शुक्ला सस्पेंड, पुलिस लाइन में हड़कंप

"मैं सत्य का महंगा नशा करता हूँ..." निलंबन के बाद भी अपने बयानों पर अडिग रहे सिपाही सुनील शुक्ला लखनऊ पुलिस लाइन में 'ड्यूटी स्कैम' का भंडाफोड़ करने वाले सिपाही पर गिरी गाज, विभाग ने किया निलंबित

अजीत मिश्रा (खोजी)

भ्रष्टाचार के खिलाफ आवाज उठाने वाले सिपाही सुनील शुक्ला निलंबित, पुलिस महकमे में हड़कंप

विशेष संवाददाता, लखनऊ

  • सिपाही के वसूली के आरोपों के बाद लखनऊ पुलिस लाइन में बड़ा फेरबदल; हटाए गए कर्मी, जांच शुरू
  • ड्यूटी आवंटन में भ्रष्टाचार के आरोपों पर एक्शन: अब सॉफ्टवेयर तय करेगा पुलिसकर्मियों की ड्यूटी
  • लखनऊ पुलिस कमिश्नरेट का बड़ा फैसला: गणना कार्यालय में इंसानी दखल खत्म, लागू होगी डिजिटल प्रणाली
  • गार्ड ड्यूटी के लिए ₹2000 की वसूली? सिपाही ने खोला ‘चैन सिस्टम’ का राज, पुलिस ने कहा- जांच जारी
  • दबिश या नोटिस? सिपाही सुनील शुक्ला के नए वीडियो और पुलिस के दावों में टकराव तेज

मई 20, 2026

लखनऊ पुलिस कमिश्नरेट में कथित भ्रष्टाचार को उजागर करने वाले सिपाही सुनील शुक्ला पर गाज गिरी है। विभाग ने अनुशासनात्मक कार्रवाई करते हुए उन्हें तत्काल प्रभाव से निलंबित (सस्पेंड) कर दिया है। सिपाही सुनील शुक्ला ने सोशल मीडिया पर कई वीडियो जारी कर पुलिस महकमे के भीतर चल रहे ‘चैन सिस्टम’ और अवैध वसूली का गंभीर आरोप लगाया था। इस निलंबन के बाद पुलिस महकमे में हड़कंप मच गया है, वहीं सिपाही अपने बयानों पर पूरी तरह अडिग हैं।

“मैं सत्य का महंगा नशा करता हूँ”

निलंबन की कार्रवाई के बाद सिपाही सुनील शुक्ला ने बेहद तल्ख और भावुक प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने साफ शब्दों में कहा, “मैं सत्य का महंगा नशा करता हूँ। मैं इस नशे में झूम रहा हूँ और मुझे कभी तोड़ा नहीं जा सकेगा।” सिपाही के इस बयान के बाद सोशल मीडिया और आम जनता के बीच इस मामले को लेकर चर्चाएं और तेज हो गई हैं।

गार्ड ड्यूटी के नाम पर ₹2,000 की वसूली का आरोप

दरअसल, लखनऊ पुलिस लाइन में तैनात सिपाही सुनील शुक्ला ने सिलसिलेवार कई वीडियो सोशल मीडिया पर पोस्ट किए थे। अपने पहले वीडियो में उन्होंने दावा किया था कि पुलिस कर्मियों की ‘गार्ड ड्यूटी’ लगाने के नाम पर प्रति सिपाही लगभग दो हजार रुपये की अवैध वसूली की जाती है। उन्होंने आरोप लगाया कि यह वसूली एक तय ‘चैन सिस्टम’ के जरिए निचले स्तर से लेकर ऊपर बैठे अधिकारियों तक पहुँचती है।

सूत्रों के अनुसार, सुनील शुक्ला ने सिर्फ ड्यूटी आवंटन तक ही अपने आरोपों को सीमित नहीं रखा, बल्कि मेडिकल प्रतिपूर्ति (Medical Reimbursement) और अन्य विभागीय प्रक्रियाओं में भी व्यापक भ्रष्टाचार होने की बात कही थी। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया था कि उन्हें विभागीय अधिकारियों द्वारा की जाने वाली जांच पर रत्ती भर भी भरोसा नहीं है।

पुलिस महकमे में फेरबदल, जांच के आदेश

मामला तूल पकड़ते ही पुलिस कमिश्नरेट ने पूरे प्रकरण की उच्च स्तरीय जांच बैठा दी है। जांच निष्पक्ष हो और गवाहों या साक्ष्यों को प्रभावित न किया जा सके, इसके लिए पुलिस लाइन के गणना कार्यालय (जहां से ड्यूटियां लगती हैं) में तैनात कर्मियों को तत्काल प्रभाव से हटाकर वहां नई तैनाती कर दी गई है।

इसके साथ ही, पुलिस अधिकारियों ने भविष्य में इस तरह की गड़बड़ियों को रोकने के लिए व्यवस्था में बड़े बदलाव के संकेत दिए हैं। अधिकारियों के मुताबिक, गणना कार्यालय में अब पूरी तरह से कंप्यूटरीकृत सॉफ्टवेयर आधारित प्रणाली (Computerized Software-Based System) लागू की जाएगी। इस डिजिटल व्यवस्था से ड्यूटी लगाने की प्रक्रिया पारदर्शी होगी और मानवीय हस्तक्षेप (Human Interference) न्यूनतम हो जाएगा, जिससे भ्रष्टाचार की गुंजाइश खत्म होगी।

दबिश या नोटिस? पुलिस और सिपाही के दावों में टकराव

पहले वीडियो के वायरल होने के बाद सुनील शुक्ला ने तीन और वीडियो जारी किए थे। इनमें उन्होंने आरोप लगाया था कि आवाज उठाने के कारण पुलिस प्रशासन उनके परिवार को प्रताड़ित कर रहा है और उनके घर पर भारी पुलिस बल द्वारा दबिश दी गई।

हालांकि, पुलिस प्रशासन ने सिपाही के इस दावे को सिरे से खारिज कर दिया है। अधिकारियों की ओर से स्पष्टीकरण जारी करते हुए कहा गया कि पुलिस की टीम सिपाही के घर कोई दबिश देने नहीं, बल्कि विभागीय कार्रवाई से जुड़ा आधिकारिक नोटिस तामीर कराने (देने) गई थी।

जांच रिपोर्ट पर टिकीं नजरें

फिलहाल, लखनऊ पुलिस कमिश्नरेट इस पूरे मामले की कड़ियों को जोड़ने में जुटा है। विभागीय अधिकारियों का कहना है कि सिपाही द्वारा लगाए गए आरोपों और उनके आचरण, दोनों ही बिंदुओं पर विस्तृत जांच जारी है। आगे की सख्त कानूनी और विभागीय कार्रवाई जांच रिपोर्ट के तथ्यों के आधार पर तय की जाएगी। लेकिन इस पूरे घटनाक्रम ने उत्तर प्रदेश पुलिस की आंतरिक कार्यप्रणाली और पारदर्शिता पर एक बार फिर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

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