
गाँव-गाँव में शराब का जहर: क्या हमारी बेटियों की शिक्षा से भी बड़ा है शराब माफियाओं का मुनाफ़ा?
शर्मनाक: 'शराब के अड्डों' के बीच शिक्षा पाने को मजबूर बेटियां, प्रशासन बना मूकदर्शक! विद्यालय या शराब का अड्डा? प्रशासन की नाक के नीचे चल रहा नियम-विरुद्ध खेल!
अजीत मिश्रा (खोजी)
बेटियों की शिक्षा या शराब का अड्डा: प्रशासन की नींद कब टूटेगी?
- बस्ती में प्रशासन की बड़ी लापरवाही: लड़कियों के स्कूल के पास अवैध तरीके से शराब की दुकान का संचालन!
- डर के साये में शिक्षा: क्या शराब माफियाओं के आगे नतमस्तक है प्रशासन?
- देवमी गाँव में उबाल: ‘बेटी पढ़ाओ’ का नारा या शराब की दुकान का सहारा?
बस्ती। क्या बस्तियों और गाँवों की बेटियां अब स्कूल नहीं, बल्कि ‘शराब के अड्डों’ से होकर गुजरने को मजबूर हैं? यह सवाल किसी कल्पना का नहीं, बल्कि उस कड़वी सच्चाई का है, जो देवमी गाँव के माथे पर कलंक की तरह चिपकी है।आज हमारे समाज में एक ऐसा भयावह दौर आ गया है जहाँ ज्ञान के मंदिर कहे जाने वाले विद्यालयों के ठीक बाहर ‘शराब के अड्डे’ खुलेआम पनप रहे हैं। ललगांज थाना क्षेत्र के देवमी गाँव से आई यह खबर केवल एक स्थान की समस्या नहीं, बल्कि पूरे सिस्टम की उस सड़ी हुई मानसिकता का चेहरा है, जहाँ बेटियों की सुरक्षा से ज्यादा महत्व शराब की दुकान के ‘धंधे’ को दिया जा रहा है।
प्रशासन की नाक के नीचे चल रहा नियम-विरुद्ध खेल
ललगांज थाना क्षेत्र के देवमी गाँव में संचालित हो रही एक देशी शराब की दुकान ने न केवल क्षेत्र की मर्यादा को तार-तार कर दिया है, बल्कि सरकारी नियमों की धज्जियाँ भी उड़ा दी हैं। हद तो तब हो गई जब कागजों पर मुंडेरवा थाना क्षेत्र के ‘बघाड़ी चौराहे’ के नाम पर स्वीकृत दुकान, ललगांज थाना क्षेत्र में खुलेआम चल रही है। बिना किसी बोर्ड के संचालित यह दुकान किसी बड़े घपले की ओर इशारा कर रही है।
यह पूरा मामला नियमों के उल्लंघन की पराकाष्ठा है। खबर के अनुसार:
- मुंडेरवा थाना क्षेत्र के ‘बघाड़ी चौराहे’ के नाम पर आवंटित की गई शराब की दुकान को ललगांज थाना क्षेत्र के देवमी गाँव में संचालित किया जा रहा है।
- इस दुकान पर कोई आधिकारिक बोर्ड तक नहीं लगा है, जिससे यह पता ही नहीं चलता कि यह किसके अधीन है।
- विद्यालय से मात्र 20 मीटर की दूरी पर शराब की दुकान का चलना न केवल सुरक्षा मानकों के खिलाफ है, बल्कि यह सरकारी नियमों की खुलेआम अवहेलना भी है।
बेटियाँ डरी हुई हैं, और प्रशासन सो रहा है!
विद्यालय से मात्र 20 मीटर की दूरी पर शराब की दुकान का होना क्या प्रशासन की अकर्मण्यता का प्रमाण नहीं है?
- सुरक्षा पर प्रश्न: शराब के नशे में धुत असामाजिक तत्वों के हुड़दंग और गाली-गलौज के बीच से छात्राओं का गुजरना किसी बड़ी अनहोनी को निमंत्रण देना है।
- शिक्षा का भविष्य: डर के साये में जी रहे अभिभावकों ने अपनी बेटियों को स्कूल भेजना बंद कर दिया है, जिससे क्षेत्र की शिक्षा व्यवस्था पर सीधा प्रहार हो रहा है।
सामाजिक पतन और भय का वातावरण
- जब विद्यालय के रास्ते में शराब की दुकानें खुलती हैं, तो वे केवल बोतलें नहीं बेचतीं, बल्कि समाज में अपराध का बीज बोती हैं।
- शराब के नशे में धुत असामाजिक तत्वों द्वारा खुलेआम की जा रही गाली-गलौज और हुड़दंग से स्थानीय नागरिकों में भारी आक्रोश है।
- इस माहौल ने पूरे क्षेत्र की सामाजिक शांति को भंग कर दिया है और आम नागरिकों में डर का माहौल व्याप्त है।
सबसे दुखद पहलू यह है कि जिन छात्राओं को बिना किसी डर के विद्यालय जाना चाहिए था, आज उनके अभिभावक उन्हें अकेले भेजने में हिचकिचा रहे हैं। कई परिवारों ने अपनी बेटियों को स्कूल भेजना ही बंद कर दिया है, जो हमारी शिक्षा व्यवस्था के लिए एक शर्मनाक स्थिति है।
स्थानीय प्रशासन की जिम्मेदारी और विफलता
- सुरक्षा का दायित्व: जिला प्रशासन, पुलिस और आबकारी विभाग का प्राथमिक कर्तव्य यह सुनिश्चित करना है कि शिक्षण संस्थानों के आसपास का वातावरण सुरक्षित और मर्यादित हो।
- नियमों का प्रवर्तन: प्रशासन की यह जिम्मेदारी है कि वह यह सुनिश्चित करे कि शराब की दुकानें निर्धारित नियमों और मानकों के अनुसार संचालित हों।
- जनता की चिंता पर कार्रवाई: ग्रामीणों द्वारा बार-बार शिकायत और विरोध जताने के बावजूद प्रशासन द्वारा समय रहते जाँच न करना और कोई प्रभावी कदम न उठाना उसकी प्रशासनिक विफलता को दर्शाता है।
कानूनी और नीतिगत प्रावधानों का उल्लंघन
- क्षेत्रीय नियम: खबर के अनुसार, जिस दुकान को मुंडेरवा थाना क्षेत्र के ‘बघाड़ी चौराहे’ के लिए स्वीकृति मिली थी, वह ललगांज थाना क्षेत्र के देवमी गाँव में संचालित हो रही है, जो कि गंभीर प्रशासनिक और कानूनी अनियमितता है।
- सुरक्षा मानकों की अनदेखी: एक बालिका इंटर कॉलेज से मात्र 20 मीटर की दूरी पर शराब की दुकान का संचालन सुरक्षा मानकों के विपरीत है।
- पारदर्शिता का अभाव: दुकान पर किसी भी प्रकार के आधिकारिक बोर्ड का न होना, यह स्पष्ट करता है कि यह दुकान सरकारी दिशा-निर्देशों और पारदर्शिता के नियमों का पालन नहीं कर रही है।
चेतावनी: जन-आक्रोश से पहले चेत जाएं जिम्मेदार
ग्रामीणों का सब्र अब जवाब दे चुका है। जब प्रशासन एक ओर ‘बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ’ का ढिंढोरा पीटता है, वहीं दूसरी ओर विद्यालय के पास शराब की दुकान को संरक्षण देना दोहरे मापदंडों को उजागर करता है।
यदि जिला प्रशासन, पुलिस और आबकारी विभाग ने इस दुकान को अविलंब वहाँ से नहीं हटाया, तो जनता अब मूकदर्शक बनकर नहीं रहेगी। ग्रामीणों ने स्पष्ट कर दिया है कि यदि कार्रवाई में देरी हुई, तो वे उच्चाधिकारियों के दरबार तक दस्तक देने के साथ-साथ सड़क पर उतरकर ‘व्यापक जन-आंदोलन’ करने को बाध्य होंगे।
सवाल अब यह है—क्या प्रशासन बेटियों की सुरक्षा को प्राथमिकता देगा, या शराब माफियाओं की जेब भरने में ही अपना धर्म निभाएगा?
















