

क्या है मामला?
नेपाली गोरखा सेना की भारतीय सेना में भर्ती एक ऐतिहासिक परंपरा रही है, जो भारत-नेपाल रिश्तों का महत्वपूर्ण हिस्सा थी। कई दशकों तक, भारतीय सेना में गोरखा रेजिमेंट के तहत नेपाली युवकों को भर्ती किया जाता रहा है। इन युवकों की भूमिका भारतीय सेना में महत्वपूर्ण रही है, और गोरखा रेजिमेंट ने भारत की रक्षा में कई बार अहम योगदान दिया है।
हालांकि, पिछले कुछ सालों में गोरखा युवकों की भर्ती को लेकर समस्याएं उठने लगी थीं। भारत और नेपाल के बीच सीमा विवाद, खासकर लिपुलेkh और कालापानी क्षेत्रों को लेकर मतभेदों के बाद, इस भर्ती प्रक्रिया में अवरोध आ गया था। भारतीय सेना में गोरखा युवकों की भर्ती अस्थायी रूप से बंद कर दी गई थी, जिसके बाद गोरखा समुदाय में निराशा का माहौल था।
भारतीय सेना प्रमुख की काठमांडू यात्रा:
अब भारतीय सेना प्रमुख जनरल मनोज पांडे की काठमांडू यात्रा को लेकर इस मुद्दे पर फिर से चर्चा होने की संभावना जताई जा रही है। जनरल पांडे की यात्रा के दौरान भारत-नेपाल रिश्तों को और मजबूत बनाने के लिए कई महत्वपूर्ण विषयों पर बात हो सकती है, जिनमें गोरखा युवकों की भर्ती फिर से शुरू करना भी एक महत्वपूर्ण मुद्दा होगा।
नेपाल में यह यात्रा काफी महत्वपूर्ण मानी जा रही है, क्योंकि इससे दोनों देशों के सैन्य संबंधों को बढ़ावा मिल सकता है। सूत्रों के मुताबिक, इस यात्रा के दौरान नेपाली युवाओं की भारतीय सेना में भर्ती को लेकर दोनों देशों के बीच नए समझौते या नवीन उपायों पर विचार किया जा सकता है।
गोरखा युवकों की भर्ती का महत्व:
भारतीय सेना में गोरखा युवकों की भर्ती का ऐतिहासिक महत्व है। गोरखा रेजिमेंट भारतीय सेना का हिस्सा बनकर कई महत्वपूर्ण युद्धों में भाग ले चुकी है और अपने साहस और बलिदान के लिए जानी जाती है। इनकी भर्ती से न केवल भारतीय सेना की ताकत बढ़ी है, बल्कि यह भारत और नेपाल के बीच संबंधों को भी मजबूत करता है।
गोरखा समुदाय के लिए भारतीय सेना में भर्ती एक बड़ा अवसर रही है, जो उन्हें बेहतर जीवन यापन और सम्मान की दिशा में एक रास्ता प्रदान करता है।
भारत-नेपाल रिश्तों में सुधार की दिशा:
भारत-नेपाल के बीच हालिया विवादों के बावजूद, दोनों देशों के संबंधों में सुधार के संकेत मिल रहे हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और नेपाल के प्रधानमंत्री पुष्पकमल दहल (प्रचंड) के बीच की उच्चस्तरीय वार्ताओं के बाद यह उम्मीद जताई जा रही है कि दोनों देशों के बीच सहयोग को फिर से पटरी पर लाया जाएगा। भारतीय सेना प्रमुख की यात्रा और गोरखा युवकों की भर्ती पर हो रही चर्चा इस दिशा में एक सकारात्मक कदम हो सकती है।
निष्कर्ष:
काठमांडू में भारतीय सेना प्रमुख की यात्रा से नेपाली गोरखा युवकों की भारतीय सेना में भर्ती को लेकर सकारात्मक बदलाव की उम्मीदें बढ़ी हैं। यदि यह प्रक्रिया फिर से शुरू होती है, तो यह न केवल दोनों देशों के बीच मजबूत सैन्य संबंधों को बढ़ावा देगा, बल्कि गोरखा समुदाय के लिए एक नए अवसर का द्वार खोलेगा।



