
।। खाद की किल्लत और मिलावटी यूरिया से कैसे होगी किसानों की आय दोगुनी।।
।। एक ओर सरकार किसानों की आय दोगुनी करने के दावे कर रही है, वहीं दूसरी ओर खेती के लिए सबसे जरूरी खाद ही शुद्ध रूप में उपलब्ध नहीं हो पा रही।।
।। सरकारी समिति से मिल रही यूरिया खाद में ईट और कंकड़ ,किसानों के साथ खुला धोखा।।
अजीत मिश्रा (खोजी)
💫 खाद की किल्लत और मिलावटी यूरिया से कैसे होगी किसानों की आय दोगुनी ।
18 दिसंबर 25, उत्तर प्रदेश।
बस्ती ।। जिले की सरकारी समितियों से किसानों को उपलब्ध कराई जा रही यूरिया खाद की गुणवत्ता को लेकर गंभीर आरोप सामने आए हैं। एक किसान, जो बस्ती जिले का ही निवासी है बताया कि समिति से मिलने वाली यूरिया खाद में भारी मात्रा में ईट,कंकड़ और पत्थर मिले हुए हैं। ऐसी मिलावटी खाद किसानों को मजबूरी में खेतों में डालनी पड़ रही है, जिससे फसलों को नुकसान होने की आशंका बढ़ गई है।किसान का कहना है कि एक ओर सरकार किसानों की आय दोगुनी करने के दावे कर रही है, वहीं दूसरी ओर खेती के लिए सबसे जरूरी खाद ही शुद्ध रूप में उपलब्ध नहीं हो पा रही है। खाद की किल्लत इतनी अधिक है कि किसान घंटों लाइन में खड़े रहने के बाद भी खाद नहीं पा रहे हैं। और जिन किसानों को किसी तरह खाद मिल भी जाती है, उसकी गुणवत्ता बेहद खराब है।किसानों के अनुसार मिलावटी खाद से बुवाई करने पर न तो फसल की सही बढ़वार होती है और न ही अपेक्षित उत्पादन मिलता है। इससे किसानों की लागत बढ़ रही है और मुनाफा घटता जा रहा है। मजबूरी में किसान यही खाद इस्तेमाल करने को विवश हैं, क्योंकि निजी दुकानों पर खाद या तो उपलब्ध नहीं है या फिर ऊंचे दामों पर ब्लैक में बेची जा रही है।
अब सवाल यह उठता है कि इस पूरे मामले की जिम्मेदारी किसकी है—सरकार की या प्रशासन की? क्या संबंधित विभाग और अधिकारी खाद की गुणवत्ता की नियमित जांच नहीं कर रहे हैं, या फिर लापरवाही के चलते यह मिलावट किसानों तक पहुंच रही है? यदि सरकारी समिति से ही मिलावटी खाद वितरित हो रही है, तो यह पूरे तंत्र की विफलता को दर्शाता है। कई किसानों ने मांग की है कि इस मामले की निष्पक्ष जांच कराई जाए, दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई हो और सरकारी समितियों से किसानों को समय पर शुद्ध एवं पर्याप्त मात्रा में यूरिया खाद उपलब्ध कराई जाए। किसानों का कहना है कि जब तक उन्हें सही गुणवत्ता की खाद नहीं मिलेगी, तब तक किसानों की आय दोगुनी करने की बात सिर्फ नारे तक सीमित रह जाएगी। यह मामला बस्ती जिले के किसानों की समस्याओं को उजागर करता है और अब सबकी निगाहें प्रशासन की कार्रवाई पर टिकी हैं कि वह इस गंभीर मुद्दे पर कब और क्या ठोस कदम उठाता है।















