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इलाज के नाम पर कसाईखाना: मरियम हॉस्पिटल की लापरवाही से गई जान, स्वास्थ्य विभाग मौन!

क्या बस्ती में स्वास्थ्य विभाग ने बेच दिया है 'इंसानी जान' का सौदा? अवैध अस्पतालों पर कब चलेगी कार्रवाई?

अजीत मिश्रा (खोजी)

बस्ती का स्वास्थ्य विभाग: मौत के सौदागरों के आगे ‘धृतराष्ट्र’ बने सीएमओ?

बस्ती। जिले में स्वास्थ्य सेवाएं भगवान भरोसे हैं, या यूं कहें कि मौत के सौदागरों के हाथों में सुरक्षित हैं। स्वास्थ्य विभाग के जिम्मेदार अधिकारी अपनी कुंभकर्णी नींद में सोए हुए हैं, जबकि शहर के गली-मोहल्लों में कुकुरमुत्तों की तरह उगे अवैध और मानक विहीन अस्पताल मासूम मरीजों की जान से खिलवाड़ कर रहे हैं। ताजा मामला पुरानी बस्ती थाना क्षेत्र के पचपेड़िया रोड स्थित ‘मरियम हार्ट हॉस्पिटल’ का है, जहाँ एक महिला की दर्दनाक मौत ने स्वास्थ्य महकमे की कार्यप्रणाली पर गंभीर प्रश्नचिह्न खड़े कर दिए हैं।

💫इलाज के नाम पर मौत का मंजर

वाल्टरगंज थाना क्षेत्र की एक महिला को पेट दर्द और सांस लेने में दिक्कत के कारण परिजनों ने बड़ी उम्मीद से इस अस्पताल में भर्ती कराया था। लेकिन, यहाँ इलाज के नाम पर सिर्फ मौत का इंतज़ार किया गया। आरोप है कि भर्ती होने के बाद 24 घंटे तक अस्पताल में कोई डॉक्टर नहीं पहुँचा। रात भर महिला दर्द से कराहती रही, लेकिन वहां तैनात अप्रशिक्षित नर्सों ने दर्द कम करने के नाम पर धड़ाधड़ इंजेक्शन दिए, जिससे महिला की हालत और बिगड़ गई। अंततः समय पर उचित चिकित्सकीय परामर्श न मिल पाने के कारण महिला ने दम तोड़ दिया।

💫सीएमओ की चुप्पी, बड़ा सवाल

सवाल यह है कि आखिर किसके संरक्षण में ये अस्पताल चल रहे हैं? क्या जिला मुख्य चिकित्सा अधिकारी (CMO) राजीव निगम को इन अवैध हॉस्पिटलों की भनक नहीं है? या फिर ‘धृतराष्ट्र’ बनकर वे इन मौतों का तमाशा देख रहे हैं? जिले में सैकड़ों की संख्या में ऐसे अस्पताल संचालित हैं, जिनके पास न तो योग्यता है, न ही पर्याप्त संसाधन और न ही स्वास्थ्य विभाग की कोई वैध मान्यता।

💫कब जागेगा प्रशासन?

प्रतिदिन किसी न किसी मरीज की जान इन अवैध हॉस्पिटलों की भेंट चढ़ रही है। क्या स्वास्थ्य विभाग का काम केवल कागजों पर खानापूर्ति करना और अवैध वसूली करना रह गया है? जनता के स्वास्थ्य के साथ खुलेआम खिलवाड़ हो रहा है और जिम्मेदार अधिकारी खामोश हैं।

💫जनता की मांग:

उच्च स्तरीय जांच: मरियम हार्ट हॉस्पिटल सहित पूरे जिले के प्राइवेट अस्पतालों की तत्काल प्रभाव से गहन जांच हो।

👉कठोर कार्रवाई: जो भी अस्पताल मानक विहीन हैं, उन्हें सील किया जाए और दोषियों पर हत्या का मुकदमा दर्ज हो।

👉जवाबदेही: क्या इन मौतों की नैतिक और प्रशासनिक जिम्मेदारी सीएमओ लेंगे?

अगर समय रहते इन पर लगाम नहीं कसी गई, तो यह अस्पताल भविष्य में और भी कई घरों के चिराग बुझा देंगे। अब देखना यह है कि प्रशासन कब जागता है या फिर अभी और कितनी लाशों के ढेर पर स्वास्थ्य विभाग अपनी सफलता की कहानी लिखेगा।

जिले में स्वास्थ्य सेवाएं भगवान भरोसे हैं। शहर के गली-मोहल्लों में कुकुरमुत्तों की तरह उगे अवैध और मानक विहीन अस्पताल मासूम मरीजों की जान से खिलवाड़ कर रहे हैं। ताजा मामला पुरानी बस्ती थाना क्षेत्र के पचपेड़िया रोड स्थित ‘मरियम हार्ट हॉस्पिटल’ का है, जहाँ एक महिला की दर्दनाक मौत ने स्वास्थ्य महकमे की कार्यप्रणाली पर गंभीर प्रश्नचिह्न खड़े कर दिए हैं।

💫क्लिनिकल एस्टेब्लिशमेंट एक्ट की धज्जियां

हकीकत यह है कि जिले में चल रहे अधिकांश निजी अस्पताल ‘क्लिनिकल एस्टेब्लिशमेंट (रजिस्ट्रेशन एंड रेगुलेशन) एक्ट, 2010’ का खुला उल्लंघन कर रहे हैं। इस कानून के अनुसार, किसी भी अस्पताल को तभी पंजीकृत किया जा सकता है जब वह न्यूनतम मानकों (जैसे: चौबीसों घंटे योग्य डॉक्टर की उपलब्धता, आपातकालीन सुविधाओं के लिए प्रोटोकॉल, और प्रशिक्षित पैरामेडिकल स्टाफ) को पूरा करता हो।

मरियम हार्ट हॉस्पिटल में 24 घंटे तक डॉक्टर का न पहुंचना और अप्रशिक्षित नर्सों द्वारा इलाज करना, न केवल घोर लापरवाही है, बल्कि इस कानून की धाराओं का सीधा उल्लंघन है।

🔥जिम्मेदार कौन?

सवाल यह है कि आखिर किसके संरक्षण में ये अस्पताल चल रहे हैं? क्या जिला मुख्य चिकित्सा अधिकारी (CMO) राजीव निगम को इन मानकों की अनदेखी दिखाई नहीं देती?

क्या इन अस्पतालों के पास अग्निशमन विभाग से एनओसी है? * क्या अस्पताल में पंजीकृत डॉक्टरों की सूची विभाग के पोर्टल पर उपलब्ध है? * अवैध रूप से चल रहे इन केंद्रों का ऑडिट आखिर क्यों नहीं होता?

💫प्रशासन को अब सख्त कदम उठाने होंगे

जनता के स्वास्थ्य के साथ खुलेआम खिलवाड़ हो रहा है। प्रशासन को अब केवल दिखावटी जांच नहीं, बल्कि सख्त कार्रवाई करनी होगी:

👉तत्काल सीलिंग: मरियम हार्ट हॉस्पिटल सहित उन सभी केंद्रों को तत्काल सील किया जाए जो क्लिनिकल एस्टेब्लिशमेंट एक्ट के मानकों को पूरा नहीं करते।

👉दोषियों पर मुकदमा: मृतक महिला के परिजनों को न्याय दिलाने के लिए अस्पताल प्रबंधन और वहां तैनात संबंधित स्टाफ पर भारतीय न्याय संहिता (BNS) की सुसंगत धाराओं में गैर-इरादतन हत्या (अथवा लापरवाही से मौत) का मुकदमा दर्ज हो।

👉सीएमओ कार्यालय की जवाबदेही: अवैध संचालन के लिए स्थानीय स्वास्थ्य अधिकारियों की मिलीभगत की निष्पक्ष जांच कराई जाए।

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