
बस्ती में ‘हैंडपंप’ की प्यास बुझाने में डकार गए 42 लाख: सचिव और प्रधानों का ‘महा-रिबोर’ घोटाला! कागजों पर चमके हैंडपंप, जेब में गया सरकारी धन; कुसमौर और भौसिंहपुर में भ्रष्टाचार की ‘पाइपलाइन’!
विकास भवन के 'आशीर्वाद' से सदर ब्लॉक में मची लूट, हैंडपंप मरम्मत के नाम पर 27 महीने में 42 लाख साफ! सीएम के 'जीरो टॉलरेंस' को ठेंगा: सचिव आनंद सिंह और प्रधानों की जुगलबंदी ने किया सरकारी धन का 'बलिदान'!
।। भ्रष्टाचार की ‘पाइपलाइन’: बस्ती में हैंडपंप मरम्मत के नाम पर डकार गए 42 लाख ।।
👉जीरो टॉलरेंस पर भारी ‘सिंडिकेट’, 27 महीनों तक चलता रहा सरकारी धन की लूट का खेल।
अजीत मिश्रा (खोजी), बस्ती। उत्तर प्रदेश सरकार जहाँ एक ओर ‘जीरो टॉलरेंस’ की नीति का ढिंढोरा पीट रही है, वहीं बस्ती जिले के सदर ब्लॉक में भ्रष्टाचार का एक ऐसा “रिबोर मॉडल” सामने आया है जिसे सुनकर आम आदमी ही नहीं, बल्कि जांच अधिकारी भी दंग हैं। जिले की दो ग्राम पंचायतों—कुसमौर और भौसिंहपुर—में कागजों पर हैंडपंपों की ऐसी ‘मरम्मत’ हुई कि देखते ही देखते सरकारी खजाने से 42 लाख रुपये साफ कर दिए गए।
दो पंचायतों का ‘करोड़पति’ खेल
विकास की गंगा बहाने के नाम पर तैनात जिम्मेदार ही जब डकैत बन जाएं, तो सरकारी योजनाएं महज लूट का जरिया बन जाती हैं। सदर ब्लॉक के इन दो गाँवों में घोटाले का तरीका बेहद शातिर रहा:
ग्राम पंचायत कुसमौर: यहाँ 27 महीनों के भीतर हैंडपंप मरम्मत और रिबोर के नाम पर 27 लाख रुपये का भुगतान करा लिया गया। यानी औसतन हर महीने एक लाख रुपये सिर्फ हैंडपंप ठीक करने में खर्च हुए।
ग्राम पंचायत भौसिंहपुर: यहाँ भी इसी अवधि में 15 लाख रुपये की भारी-भरकम राशि पानी की तरह बहा दी गई।
भ्रष्टाचार का त्रिकोण: सचिव और प्रधान की जुगलबंदी
इस पूरे खेल के पीछे सचिव आनंद सिंह, प्रधान प्रेमराज और प्रधान पवन कुमार की तिकड़ी बताई जा रही है। ग्रामीणों का आरोप है कि धरातल पर हैंडपंपों की स्थिति जस की तस है, लेकिन कागजों में उन्हें बार-बार रिबोर और मरम्मत दिखाकर भुगतान निकाल लिया गया।
“यह महज संयोग नहीं है कि दो अलग-अलग पंचायतों में एक ही सचिव के कार्यकाल में एक ही मद में इतनी बड़ी रकम निकाली गई। यह पूरी तरह से सुनियोजित वित्तीय डकैती है।”
विकास भवन से ब्लॉक तक ‘संरक्षण’ का जाल
हैरानी की बात यह है कि 27 महीनों तक यह लूट चलती रही और ब्लॉक के आला अधिकारियों को इसकी भनक तक नहीं लगी? सूत्रों की मानें तो इस महाघोटाले के तार विकास भवन के एक बड़े अधिकारी से भी जुड़े हैं। यही कारण है कि मामला उजागर होने के बाद भी ब्लॉक के जिम्मेदार अधिकारी कार्रवाई करने के बजाय आरोपियों के “गुनाहों पर पर्दा” डालने में जुटे हैं।
अनसुलझे सवाल
क्या बस्ती जिले में हैंडपंप अब सोने के हो गए हैं जिनकी मरम्मत पर लाखों खर्च हो रहे हैं?
ऑडिट रिपोर्ट में इतनी बड़ी रकम का हेरफेर पकड़ में क्यों नहीं आया?
क्या मुख्यमंत्री के भ्रष्टाचार मुक्त यूपी के संकल्प को सदर ब्लॉक के अधिकारी ठेंगा दिखा रहे हैं?
अब देखना यह है कि क्या प्रशासन इन सफेदपोश भ्रष्टाचारियों पर नकेल कसता है या फिर यह फाइल भी ब्लॉक के धूल फांकते दफ्तरों में कहीं दफन हो जाएगी।













