
बस्ती से बड़ी खबर: सिस्टम की ‘शवयात्रा’ पर बैठे जिम्मेदार, साल भर से अंधेरे में गौरा रोहारी!
साहब के AC ने छीनी मासूमों की नींद: 45 डिग्री में तड़पता गांव, फाइलों में कैद है ट्रांसफार्मर!
अजीत मिश्रा (खोजी)
बस्ती: बिजली विभाग की ‘कब्र’ पर अंधेरे का मातम, साल भर से जल रहा गौरा रोहारी!
ब्यूरो रिपोर्ट: बस्ती मंडल (उत्तर प्रदेश)
- अंधेरगर्दी का इंतहा: अब आर-पार की जंग, ट्रांसफार्मर नहीं बदला तो विभाग फूंकेंगे ग्रामीण!
- डिजिटल इंडिया का ‘काला सच’: एक साल, एक जला ट्रांसफार्मर और विभाग की ‘हिमालयी’ नाकामी!
- बस्ती मंडल की शर्मनाक तस्वीर: कुदरहा फीडर बना ‘सफेद हाथी’, अंधेरे में डूबी मानवता!
बस्ती। प्रदेश में विकास के दावों की हवा निकालती एक डरावनी हकीकत बस्ती जिले से सामने आ रही है। जहाँ एक तरफ सरकार 24 घंटे बिजली का दम भर रही है, वहीं उपकेंद्र शंकरपुर के कुदरहा फीडर के अंतर्गत आने वाला गौरा रोहारी गांव पिछले एक साल से अंधेरे के आगोश में है। यहाँ का 10 केवी का ट्रांसफार्मर साल भर पहले क्या जला, विभाग की संवेदनशीलता भी उसी के साथ खाक हो गई।
साहब एसी में मस्त, जनता पसीने में पस्त
पारा 45 डिग्री के पार है। आसमान से आग बरस रही है, लेकिन बिजली विभाग के अधिकारियों के दिल नहीं पसीज रहे। मासूम बच्चे गर्मी से तड़प रहे हैं, बुजुर्गों का दम फूल रहा है, लेकिन विभाग ‘तमाशबीन’ बना तमाशा देख रहा है। गजब की विडंबना देखिए—जनता पसीने में तरबतर है और जिम्मेदार साहबान अपने वातानुकूलित (AC) कमरों में बैठकर फाइलों पर ‘सब ठीक है’ का ठप्पा लगा रहे हैं।
फाइलों में कैद समाधान: ‘हिमालय जीतने’ जैसा है ट्रांसफार्मर बदलना?
शिकायतों का अंबार लगा है, लेकिन समाधान की फाइलें दफ्तरों के कोनों में धूल फांक रही हैं। आलम यह है कि एक अदद 10 केवी का ट्रांसफार्मर बदलना बिजली विभाग के लिए ‘हिमालय फतह’ करने जैसा नामुमकिन काम बन गया है। ओवरलोडिंग के कारण फुके इस ट्रांसफार्मर की क्षमता बढ़ाना तो दूर, उसे बदलना तक मुनासिब नहीं समझा गया। क्या विभाग किसी बड़े हादसे या किसी मासूम की जान जाने का इंतजार कर रहा है?
खोखले वादे और रात का खौफनाक सन्नाटा
ग्रामीणों का कहना है कि हर बार सिर्फ आश्वासन का लॉलीपॉप थमाया जाता है। सूरज ढलते ही गांव में खौफनाक सन्नाटा पसर जाता है। पढ़ाई से लेकर सुरक्षा तक, सब कुछ दांव पर है। यह ‘अंधेरगर्दी’ विभाग की कार्यशैली पर करारा तमाचा है।
“हमारा सब्र अब टूट चुका है। अगर जल्द ही नया और उच्च क्षमता वाला ट्रांसफार्मर नहीं लगा, तो हम चुप नहीं बैठेंगे। अब विभाग का घेराव होगा और यह जंग आर-पार की होगी।” > — आक्रोशित ग्रामीण, गौरा रोहारी
सवालों के घेरे में विभाग: जवाब कौन देगा?
- साल भर से जल रहे ट्रांसफार्मर की सुध क्यों नहीं ली गई?
- क्या अधिकारियों की जवाबदेही सिर्फ कागजों तक सीमित है?
- गौरा रोहारी की इस बदहाली का असली गुनहगार कौन?
चेतावनी: यह सिर्फ खबर नहीं, विभाग के लिए आखिरी चेतावनी है। यदि समय रहते समाधान नहीं हुआ, तो बिजली विभाग के दफ्तर पर ग्रामीणों का ऐसा सैलाब उमड़ेगा जिसे संभालना प्रशासन के बस में नहीं होगा।













