
बस्ती: वाल्टरगंज पुलिस का ‘खेल’, प्रधान की दबंगई; न्यायालय के आदेशों की सरेआम धज्जियां
"हम घटनाओं के ठेकेदार नहीं" — वाल्टरगंज पुलिस की शह पर बड़कुइयाँ में अवैध निर्माण जारी
अजीत मिश्रा (खोजी)
खाकी की मिलीभगत से बड़कुइयाँ में ‘जंगलराज’: विवादित जमीन पर प्रधान का कब्जा, पुलिस बनी मूकदर्शक
ब्यूरो, बस्ती मंडल (उत्तर प्रदेश)
- खाकी की मिलीभगत से बड़कुइयाँ में ‘जंगलराज’, विवादित जमीन पर कब्जा करा रही वाल्टरगंज पुलिस
- न्यायालय से बड़ा वाल्टरगंज थाना! प्रधान के आगे नतमस्तक खाकी, बड़कुइयाँ में बड़ा बवाल तय
- साऊँघाट में पुलिस-प्रधान का ‘गठजोड़’, विवादित जमीन पर कब्जे से आक्रोश
- बड़कुइयाँ: कोर्ट में मामला लंबित, फिर भी पुलिस की देखरेख में चल रहा निर्माण कार्य
- विवादित जमीन पर अवैध कब्जा: वाल्टरगंज पुलिस की मूक सहमति से भड़का ग्रामीणों का गुस्सा
- क्या किसी बड़ी घटना का इंतजार कर रही है वाल्टरगंज पुलिस? बड़कुइयाँ का मामला गर्माया
- थाना प्रभारी का विवादित बयान: “हम घटनाओं के ठेकेदार नहीं”, सवालों के घेरे में वाल्टरगंज पुलिस
वाल्टरगंज (बस्ती): साऊँघाट विकास खंड के बड़कुइयाँ गांव में कानून और संविधान का मखौल उड़ाया जा रहा है। एक तरफ जहां मामला सिविल न्यायालय में लंबित है, वहीं दूसरी तरफ स्थानीय ग्राम प्रधान का ‘हुक्म’ और वाल्टरगंज पुलिस का ‘सहयोग’ मिलकर आबादी की जमीन पर अवैध कब्जा करा रहे हैं। खाकी की कार्यप्रणाली पर उठते सवालों के बीच अब यह मामला पूरे जनपद में चर्चा का विषय बन गया है।
न्यायालय के आदेशों की धज्जियां, पुलिस का संरक्षण
प्राप्त जानकारी के अनुसार, बड़कुइयाँ गांव में स्थित एक विवादित जमीन को लेकर मामला लंबे समय से सिविल न्यायालय में विचाराधीन है। बावजूद इसके, ग्राम प्रधान द्वारा जबरन निर्माण कार्य कराया जा रहा है। स्थानीय लोगों का आरोप है कि इस निर्माण कार्य को वाल्टरगंज पुलिस का प्रत्यक्ष संरक्षण प्राप्त है। हैरानी की बात यह है कि इसी प्रकरण में पुलिस पहले शांतिभंग की कार्रवाई कर चुकी है, लेकिन अब वही पुलिस निर्माण कराने वालों के साथ खड़ी दिखाई दे रही है।
थाना प्रभारी के बिगड़े बोल: “हम घटनाओं के ठेकेदार नहीं”
जब इस संदर्भ में वाल्टरगंज थाना प्रभारी से बात की गई, तो उनका जवाब बेहद गैर-जिम्मेदाराना और संवेदनहीन था। थाना प्रभारी ने पल्ला झाड़ते हुए कहा, “हम घटनाओं के ठेकेदार नहीं हैं।” जिम्मेदार पद पर बैठे अधिकारी का यह बयान न केवल पुलिसिया संवेदनशीलता पर प्रश्नचिन्ह लगाता है, बल्कि यह भी दर्शाता है कि क्षेत्र में किसी बड़ी अनहोनी के होने पर पुलिस ने पहले ही अपनी जिम्मेदारी से किनारा कर लिया है।

क्या किसी बड़ी घटना का इंतजार है?
ग्रामीणों का कहना है कि यदि यह अवैध निर्माण तुरंत नहीं रोका गया, तो गांव में कभी भी कोई बड़ी हिंसक घटना घट सकती है। पुलिस की इस मूकदर्शक बनी भूमिका से अपराधियों और दबंगों के हौसले बुलंद हैं। जनता का सवाल है कि क्या वाल्टरगंज पुलिस की प्राथमिकता कानून का राज स्थापित करना है या फिर भू-माफियाओं और सत्ता के करीबियों को संरक्षण देना?
शासन-प्रशासन की चुप्पी पर सवाल
साऊँघाट क्षेत्र के बड़कुइयाँ गांव में हो रहा यह ‘जबरिया निर्माण’ न केवल प्रशासनिक विफलता को दर्शाता है, बल्कि यह भी बताता है कि थानों में फरियादियों की सुनवाई के दावे कितने खोखले हैं। यदि न्यायालय में मामला लंबित होने के बाद भी पुलिस के सामने कब्जा हो रहा है, तो आम आदमी न्याय की उम्मीद किससे करे?
अब देखना यह है कि जनपद के उच्चाधिकारी इस मामले में संज्ञान लेते हैं या वाल्टरगंज पुलिस को इसी तरह ‘मनमानी’ करने की खुली छूट मिलती रहेगी।
















