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बस्ती में अवैध ई-टिकट कारोबार का पर्दाफाश; आरपीएफ ने 12 हजार से अधिक की टिकटें कीं बरामद

पेड़ के नीचे बैठकर कर रहा था अवैध ई-टिकट का खेल, आरपीएफ ने दबोचा

अजीत मिश्रा (खोजी)

बस्ती में अवैध ई-टिकट कारोबार का पर्दाफाश, आरपीएफ ने युवक को किया गिरफ्तार

  • बस्ती: अवैध ई-टिकट का धंधा करने वाला युवक गिरफ्तार।आरपीएफ की बड़ी कार्रवाई: अवैध ई-टिकट बुकिंग में युवक धराया
  • बस्ती में अवैध ई-टिकट गिरोह का खुलासा, आरोपी गिरफ्तारसावधान! अवैध ई-टिकट से ठगी करने वाला गिरफ्तार, ऐसे बनाता था शिकार। अवैध ई-टिकट बनाने वाला सलाखों के पीछे

बस्ती: रेलवे सुरक्षा बल (आरपीएफ) ने अवैध ई-टिकट कारोबार के खिलाफ एक बड़ी कार्रवाई करते हुए एक युवक को गिरफ्तार किया है। आरोपी लंबे समय से व्यक्तिगत यूजर आईडी का दुरुपयोग कर यात्रियों से अवैध वसूली कर रहा था।

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पेड़ के नीचे बैठकर कर रहा था अवैध धंधा

आरपीएफ को सूचना मिली थी कि मुंडेरवा थाना क्षेत्र के ओरावारा गांव के पास एक युवक मोबाइल फोन के जरिए अवैध रूप से रेलवे टिकट बुक कर रहा है। हैरानी की बात यह है कि आरोपी किसी दुकान या दफ्तर के बजाय सड़क किनारे एक पेड़ के नीचे बैठकर अपना काम अंजाम दे रहा था। वह यात्रियों से प्रति टिकट 150 से 200 रुपये तक अतिरिक्त वसूलता था।

लखनऊ से मिले इनपुट के बाद हुई कार्रवाई

आरपीएफ की टीम को लखनऊ मुख्यालय से एक संदिग्ध मोबाइल नंबर और यूजर आईडी की जानकारी मिली थी। सत्यापन के बाद, उप निरीक्षक लाल साहब सिंह के नेतृत्व में एक टीम ने मौके पर छापा मारा। पुलिस ने बृजेश कुमार उर्फ दुर्गेश को रंगे हाथों पकड़ा, जो उस समय भी मोबाइल के जरिए ई-टिकट बना रहा था।

भारी मात्रा में दस्तावेज बरामद

तलाशी के दौरान आरपीएफ ने आरोपी के पास से निम्नलिखित चीजें बरामद कीं:

  • 6 पर्सनल यूजर आईडी: जिनका उपयोग वह अवैध टिकट बुकिंग के लिए कर रहा था।
  • ई-टिकट: 2 लाइव और 2 पुराने टिकट बरामद किए गए, जिनकी कुल कीमत 12,177 रुपये से अधिक है।

​आरपीएफ अधिकारियों ने बताया कि आरोपी किसी अधिकृत एजेंट आईडी या प्रतिबंधित सॉफ्टवेयर का उपयोग नहीं कर रहा था, बल्कि अपनी व्यक्तिगत आईडी का दुरुपयोग करके यात्रियों को ठग रहा था।

रेल अधिनियम के तहत मामला दर्ज

आरपीएफ ने आरोपी बृजेश कुमार के खिलाफ रेल अधिनियम की धारा 143 के तहत मुकदमा दर्ज कर लिया है और मामले की गहन जांच शुरू कर दी है। इस सफल कार्रवाई में उप निरीक्षक लाल साहब सिंह के साथ हेड कांस्टेबल बीरबल उरांव, कांस्टेबल मोहम्मद शमशाद मंसूरी, राजकुमार सिंह और सीआईबी गोरखपुर के हेड कांस्टेबल धीरेंद्र प्रताप सिंह की मुख्य भूमिका रही।

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