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खाकी पर कालिख: कानपुर में बलात्कारी दरोगा 5 महीने से फरार, पुलिस की ‘नकेल’ साबित हुई फिसड्डी!

कानपुर का 'दरोगा' अपराधी: मासूम से दरिंदगी के बाद भी पुलिस की गिरफ्त से दूर, आखिर किसे बचाने की हो रही है कोशिश?

अजीत मिश्रा (खोजी)

खाकी पर कालिख: कानपुर में बलात्कारी दरोगा 5 महीने से फरार, पुलिस की ‘नकेल’ साबित हुई फिसड्डी

ब्यूरो रिपोर्ट, उत्तर प्रदेश

  • कानपुर पुलिस के लिए ‘चुनौती’ या ‘चहेता’? 5 महीने बाद भी गिरफ्त से बाहर बलात्कारी दरोगा!
  • खाकी का काला चेहरा: नाबालिग से सामूहिक दुष्कर्म का मुख्य आरोपी अभी भी फरार, पुलिस महकमे में मचा हड़कंप!
  • कानपुर में शर्मसार हुई वर्दी: बलात्कारी दरोगा की तलाश में पुलिस फेल, पीड़ित परिवार न्याय की राह में दर-दर भटकने को मजबूर!

कानपुर: उत्तर प्रदेश पुलिस के बड़े-बड़े दावों और अपराधियों पर ‘नकेल’ कसने की उनकी मंशा पर कानपुर का यह मामला एक करारा तमाचा है। एक नाबालिग मासूम के साथ दरिंदगी करने वाला दरोगा अमित कुमार मौर्या घटना के 5 महीने बाद भी आजाद घूम रहा है। जिस खाकी का फर्ज सुरक्षा करना था, उसी खाकी ने एक 14 वर्षीय बच्ची की अस्मत लूटकर उसे जनवरी की कड़कड़ाती ठंड में सड़क पर मरने के लिए छोड़ दिया।

​सवाल यह है कि आखिर कौन सी ऐसी ‘अदृश्य ताकत’ है, जो एक निलंबित अपराधी दरोगा को कानून की आंखों से ओझल रखे हुए है?

खून जमा देने वाली उस रात का खौफ

​यह घटना 5 जनवरी 2026 की है। बिठूर थाने में तैनात और भीमसेन चौकी का प्रभारी रहा दरोगा अमित कुमार मौर्या और उसका साथी शिवबरन एक नाबालिग लड़की के लिए काल बनकर पहुंचे। रात 10 बजे दरोगा की ही सरकारी स्कॉर्पियो कार में नाबालिग को अगवा किया गया। अगले दो घंटे तक गाड़ी के भीतर जो हुआ, वह मानवता को शर्मसार करने के लिए काफी है। दरिंदगी के बाद पीड़िता को घर के बाहर अधमरी हालत में फेंक दिया गया।

पुलिस की संवेदनहीनता का ‘काला अध्याय’

​पीड़ित परिवार जब न्याय की दहलीज पर पहुंचा, तो खाकी का ‘भाईचारा’ जाग उठा। आरोपी पुलिसकर्मी था, इसलिए स्थानीय पुलिस ने मामले को रफा-दफा करने में कोई कसर नहीं छोड़ी। पॉक्सो (POCSO) जैसे संगीन एक्ट को नजरअंदाज करना इस बात का सबूत है कि शुरुआती दौर में पुलिस विभाग किस तरह अपराधियों को बचाने की कोशिश कर रहा था। मीडिया की धमक और जनता के आक्रोश के बाद जब मामला तूल पकड़ा, तब जाकर आला अधिकारियों की नींद टूटी।

दोषियों पर गिरी गाज, पर ‘मुख्य दरिंदा’ फरार

​इस मामले ने कानपुर कमिश्नरेट की कार्यप्रणाली को कठघरे में खड़ा कर दिया। भारी दबाव में पुलिस कमिश्नर रघुवीर लाल को कड़े कदम उठाने पड़े:

  • DCP दिनेश चंद्र त्रिपाठी: पद से हटाए गए।
  • सचेंडी थाना प्रभारी विक्रम सिंह: सस्पेंड किए गए।
  • जांच: एडिशनल DCP कपिल देव सिंह के सुपुर्द।

​सह-आरोपी शिवबरन यादव तो सलाखों के पीछे है, लेकिन मुख्य आरोपी दरोगा अमित मौर्या का 5 महीने से गायब रहना पुलिस की कार्यकुशलता पर बड़ा प्रश्नचिह्न है।

दरोगा का ‘सफाईनामा’ या साजिश का नया जाल?

​फरारी के दौरान आरोपी दरोगा का मुख्यमंत्री और पुलिस कमिश्नर के नाम लिखा 3 पन्नों का पत्र एक नया मोड़ लेकर आया है। खुद को ‘बेगुनाह’ बताते हुए उसने ‘तेल चोरी सिंडिकेट’ की जांच का जो बहाना बनाया है, वह उसके ‘रसूख’ और सोची-समझी साजिश की ओर इशारा करता है। क्या यह पत्र सहानुभूति बटोरने की एक चाल है या सिस्टम के भीतर चल रही किसी बड़ी जंग का हिस्सा?

बड़ा सवाल:

क्या कानपुर पुलिस की सर्च ऑपरेशन केवल फाइलों में चल रही है? एक दरोगा, जिसे हर मोड़, हर तकनीक और पुलिस के हर दांव-पेच की जानकारी है, क्या उसे पकड़ना वाकई कानपुर पुलिस के लिए नामुमकिन है, या फिर उसके फरार रहने में ही महकमे के कुछ रसूखदारों की भलाई छिपी है?

​कानपुर की जनता आज खाकी के उस चेहरे का इंतजार कर रही है, जो उसे न्याय दिला सके, न कि केवल ट्रांसफर-पोस्टिंग के खेल में उलझी रहे।

क्या आपको लगता है कि पुलिस प्रशासन के उच्च अधिकारियों की सीधी निगरानी के बावजूद किसी अपराधी का 5 महीने तक फरार रहना सिस्टम की मिलीभगत की ओर इशारा करता है?

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